facebookmetapixel
दूध के साथ फ्लेवर्ड दही फ्री! कहानी क्विक कॉमर्स की जो बना रहा नए ब्रांड्स को सुपरहिटWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड की लहर! IMD ने जारी किया कोहरा-बारिश का अलर्ट67% चढ़ सकता है सिर्फ ₹150 का शेयर, Motilal Oswal ने शुरू की कवरेज; BUY की दी सलाहअमेरिका का सख्त कदम, 13 देशों के लिए $15,000 तक का वीजा बॉन्ड जरूरीवेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिका की नजर: ट्रंप बोले- अमेरिकी कंपनियों को मिल सकती है सब्सिडीस्टॉक स्प्लिट का ऐलान: इस रियल्टी कंपनी के शेयर 15 जनवरी से होंगे स्प्लिट, जानें डिटेलStock Market Update: हैवीवेट शेयरों में बिकवाली से बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 340 अंक गिरा; निफ्टी 26,200 के पासStocks To Watch Today: ONGC से Adani Power तक, आज बाजार में इन स्टॉक्स पर रहेगी नजरमजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटा

मंदिर का प्रबंधन त्रावणकोर राजघराने के हाथ

Last Updated- December 15, 2022 | 4:54 AM IST

उच्चतम न्यायालय ने ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की संपदा और प्रबंधन अपने हाथ में लेने के लिए एक न्यास गठित करने के केरल सरकार को आदेश देने संबंधी उच्च न्यायालय का 2011 का फैसला सोमवार को निरस्त कर दिया। शीर्ष अदालत ने श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन में त्रावणकोर राजघराने के अधिकार बरकरार रखे हैं। श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को देश के सबसे धनी और प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है। न्यायमूर्ति यू यू ललित की अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा कि अंतरिम उपाय के रूप में मंदिर के मामलों के प्रबंधन वाली प्रशासनिक समिति की अध्यक्षता तिरुवनंतपुरम के जिला न्यायाधीश करेंगे। शीर्ष अदालत ने इस मामले में उच्च न्यायालय के 31 जनवरी, 2011 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया। इस फैसले को चुनौती देने वालों में त्रावणकोर राजघराने के कानूनी प्रतिनिधियों भी शामिल थे।
शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर पिछले साल 10 अप्रैल को सुनवाई पूरी करते हुए कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा। इस भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण 18वीं सदी में इसके मौजूदा स्वरूप में त्रावणकोर शाही परिवार ने कराया था, जिन्होंने 1947 में भारतीय संघ में विलय से पहले दक्षिणी केरल और उससे लगे तमिलनाडु के कुछ भागों पर शासन किया था। शीर्ष अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि त्रावणकोर राजपरिवार के पूर्व शासक की मृत्यु हो जाने से राजघराने के अंतिम शासक के भाई मार्तंड वर्मा और उनके कानूनी वारिसों के सेवायत के अधिकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि शाही परिवार के अंतिम शासक की मृत्यु राज्य सरकार को समिति के प्रबंधन अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं देती है क्योंकि इस मामले में संपदा राज्य को वापस मिलने संबंधी कानून लागू नहीं होता है और मंदिर का प्रबंधन त्रावणकोर के राज परिवार के न्यास में ही बना रहेगा।

First Published - July 13, 2020 | 11:30 PM IST

संबंधित पोस्ट