facebookmetapixel
₹50 लाख से कम की लग्जरी SUVs से मुकाबला करेगी महिंद्रा, जानिए XUV 7XO में क्या खासकम महंगाई का फायदा: FMCG सेक्टर में फिर से तेजी आने वाली है?CRED के कुणाल शाह ने जिस Voice-AI स्टार्टअप पर लगाया दांव, उसने जुटाए 30 लाख डॉलरकंटेनर कारोबार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, कानून में ढील का प्रस्तावसुधार नहीं है नुकसान की भरपाई करनासेवा क्षेत्र की रफ्तार थमी, PMI 11 महीने के निचले स्तर पर फिसलाजीएसटी घटने से बढ़ी बैंकों से ऋण की मांगअच्छा माहौल, बिक्री वृद्धि की आस; बैंकों में कारोबार बढ़ाने पर जोरStocks to Watch today: टाइटन, जुबिलेंट फूडवर्क्स, गोदरेज कंज्यूमर, अदाणी एंटरप्राइजेज समेत कई शेयर फोकस मेंStock Market Update: लाल निशान में हुई बाजार की शुरुआत, सेंसेक्स 116 अंक टूटा; निफ्टी 26150 अंक नीचे

पांचवां दिया नहीं, छठे की तैयारी

Last Updated- December 09, 2022 | 10:50 PM IST

चुनावी साल में उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार के लिए स्थानीय निकायों और निगमों के लिए छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर पाना टेढ़ी खीर साबित हो रही है।


केंद्र की तर्ज पर राज्य सरकार ने आनन-फानन में अपने कर्मचारियों के लिए छठे वेतन आयोग की तर्ज पर वेतन देने की घोषणा तो कर दी पर निकाय और निगम कर्मियों को इसका लाभ नहीं मिला था।

निकाय और निगम कर्मचारियों के आंदोलित होने पर राज्य सरकार के रिजवी आयोग ने इनसे वार्ता कर वेतनमान की सिफारिशें तैयार कर ली हैं।

अब यही सिफारिशें सरकार के लिए मुसीबतों का सबब बन रही हैं। दरअसल उत्तर प्रदेश के अधिकतर निगमों में काम करने वाले कर्मचारी अभी भी पांचवा वेतनमान पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। 

राज्य में केवल जल निगम, आवास विकास, परिवहन निगम, वन निगम, राजकीय निर्माण निगम, राज्य भण्डारागार निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सेतु निगम के कर्मचारियों को ही पांचवा वेतनमान मिला है।

बाकी निगम के कर्मी अभी पांचवे वेतनमान के लिए ही लड़ाई लड़ रहे हैं। चलचित्र निगम, आचार्य नरेंद्र देव शोध संस्थान, सिंधी अकादमी, अयोधया शोध संस्थान, पोल्ट्री कॉरपोरेशन सहित कई संस्थानों में अभी भी तीसरा वेतनमान ही मिल रहा है।

जबकि शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड को चौथा वेतनमान ही मिलता है। शायद इसी के चलते इन निगमों के कर्मचारी रिजवी कमेटी से गुहार लगा रहे हैं कि सरकार को पहल कर उन्हें कम से कम पांचवा वेतनमान तो दिला ही देना चाहिए। राज्य सरकार के 43 में से 35 निगमों के कर्मचारी सरकार से यही गुहार लगा रहे हैं।

छठे वेतनमान की सिफारिशों के लागू होने की कम आशा को देखते हुए अभी तक निकायों के लिए इनका हिसाब ही नहीं लगाया गया है। जबकि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे जूनियर डॉक्टरों को वेतन देने पर सालाना 23 करोड़ का खर्च बढ़ने का अनुमान है।

गौरतलब है कि इसी साल राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों के लिए एरियर के रुप में भी 11,051 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।

साथ ही राज्य सरकार के पेंशन भोगियों के लिए भी एरियर के तौर पर करीब 3,724 करोड़ रुपये जुटाने होंगे। सरकार को बढ़ा हुआ वेतनमान देने में इस साल से करीब 5189 करोड़ रुपये सालाना खर्च करना होगा।

राज्य में कई कर्मचारी अब भी पांचवे वेतनमान से वंचित तो ऐसे में उन्हें कैसे मिलेगा छठा वेतनमान

43 में से 35 निगमों के कर्मचारी तो अब भी सरकार से कर रहे हैं पांचवे वेतनमान की गुहार

राज्य में पेंशन भोगियों के लिए एरियर के तौर पर सरकार को जुटाना होगा 3,724 करोड़ रुपये

First Published - January 22, 2009 | 9:03 PM IST

संबंधित पोस्ट