सरकार का राजकोषीय घाटा वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 27) में 4.6 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि अनुमान यह है कि सरकार आगामी बजट में यह लक्ष्य 4.3 प्रतिशत घोषित कर सकती है। फिच सॉल्यूशंस की इकाई बीएमआई की गुरुवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा बढ़ने के कारक नए खर्चों की जरूरत और कम कर की प्राप्ति हो सकती है।
बीएमआई के मुताबिक सरकार के अधिक राजस्व अर्जित कर पाती है तो नए खर्च से सार्वजनिक घाटे में वृद्धि होना जरूरी नहीं है। हालांकि 2025 में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और आयकर सुधारों के कारण कर राजस्व पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। रिपोर्ट में कहा गया कि आगामी केंद्रीय बजट में सीमा शुल्क के युक्तिकरण से कर राजस्व में और कमी आएगी।
बीएमआई के अनुसार भारत को खतरनाक बाहरी वातावरण के कारण नए खर्चों के साथ रक्षा पर खर्च बढ़ाने की जरूरत है। लेकिन केंद्रीय सरकार का के व्यय में स्थिरता आ गई है और यह 2018-2000 के बाद महत्त्वपूर्ण रूप से कम हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘चीन ने रक्षा पर खर्च बढ़ा दिया है। इसके अलावा पाकिस्तान ने भी रक्षा बजट बढ़ाने का फैसला किया है। ऐसे में भारत के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में सुरक्षा पर खर्च बढ़ाना अनिवार्य है।’ रिपोर्ट के अनुसार सरकार को वित्त वर्ष 27 के लिए बजट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3 प्रतिशत तय करना पड़ सकता है ताकि आर्थिक गतिविधियां पर प्रभाव को न्यूनतम कर मध्यम अवधि के ऋण लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। विकसित भारत के विजन के मुताबिक आधारभूत ढांचे और लघु से लेकर मध्यम आकार के उद्यमों को मदद करने की आवश्यकता है।