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नीलाम खदानों पर सख्ती! 3 साल की मोहलत खत्म करने की तैयारी में सरकार

एमएमडीआर अधिनियम में संशोधन की तैयारी, राज्य सरकारों द्वारा दिया जाने वाला एक साल का विस्तार खत्म करने का प्रस्ताव; उद्योग संगठनों ने जताई चिंता

Last Updated- January 09, 2026 | 8:54 AM IST
uranium mine

सरकार ने कंपनियों के लिए नई नीलाम की गई खदानों को परिचालन में लाने की समयसीमा को मौजूदा 3 साल से घटाकर 2 साल करने का प्रस्ताव रखा है। खान मंत्रालय ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (एमएमडीआर अधिनियम) की धारा 4ए(4) के तहत राज्य सरकारों द्वारा वर्तमान में दिए जा सकने वाले एक साल के विस्तार को हटाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे खदान परिचालन की समयसीमा प्रभावी रूप से कम हो जाएगी।

मंत्रालय द्वारा 7 जनवरी को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्रौद्योगिकी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमेशन और डिजिटल प्रक्रियाओं में सुधार की वजह से खदान को चालू करने में लगने वाला समय घट गया है। इसने एमएमडीआर (संशोधन) विधेयक, 2026 के लिए व्यापक परामर्श के हिस्से के रूप में 22 जनवरी तक प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

एमएमडीआर अधिनियम की धारा 4ए(4) में कहा गया है कि अगर पट्टा मिलने की तारीख से 2 साल के भीतर उत्पादन और प्रेषण शुरू नहीं होता है तो खनन पट्टा स्वतः समाप्त हो जाएगा। वर्तमान में कानून राज्य सरकारों को एक साल और देने की अनुमति है। प्रस्तावित संशोधन में इस प्रावधान को हटाने और विस्तार को पूरी तरह से समाप्त करने की कवायद की गई है।

इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्योग संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल्स इंडस्ट्रीज (फिमी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस प्रस्ताव में पट्टा मिलने के बाद तमाम तरह की मंजूरियां लेने के प्रावधानों की उपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा 3 साल समय भी चुनौतीपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘खनन पट्टा मिलने के बाद खदान खोलने की अनुमति, पर्यावरण मंजूरी, भूमि अधिग्रहण, लॉजिस्टिक्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के बाद स्थापित करने की सहमति और संचालन करने की सहमति, और वन क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों को जोड़ने के लिए अनुमति के अलावा स्थानीय सामाजिक मुद्दों पर काम करना होता है। इन कामों में बहुत समय लगता है।’

इसके अलावा विरासत में मिले मसले भी जटिलता पैदा करते हैं। अधिकारी ने कहा, ‘विरासत में मिले मसलों वाली खदानें भी होती हैं, जहां पर्यावरण और वन मंजूरी पट्टा मिलने के बाद मिलीं और उनके मुकदमें न्यायालय में चल रहे होते हैं।’

उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को मौजूदा कानून के तहत हाल में विस्तार मिला है, उन्हें भी अनिश्चितता से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक बाद जब यह संशोधन प्रभावी हो जाएगा, जिन्हें 2 साल की अवधि और मिल सकती थी, संभवतः उस पर विचार नहीं होगा।’

फिमी ने सरकार से सुरक्षा बरकरार रखने का अनुरोध किया है। फिमी के अधिकारी ने कहा, ‘हमें लगता है कि खनिज विकास के हित में वर्तमान प्रावधान खत्म करना उचित नहीं है। मौजूदा प्रावधान जारी रहना चाहिए और एमएमडीआर अधिनियम की वर्तमान धारा 4ए (4) के मुताबिक यथास्थिति बरकरार रखी जानी चाहिए।’

First Published - January 9, 2026 | 8:54 AM IST

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