facebookmetapixel
Corporate Action Next Week: अगले हफ्ते बाजार में हलचल, स्प्लिट-बोनस के साथ कई कंपनियां बांटेंगी डिविडेंड1485% का बड़ा डिविडेंड! Q3 में जबरदस्त प्रदर्शन के बाद हाल में लिस्ट हुई कंपनी ने निवेशकों पर लुटाया प्यार300% का तगड़ा डिविडेंड! IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी का निवेशकों को गिफ्ट, रिकॉर्ड डेट भी फिक्सICICI Bank Q3 Results: मुनाफा 4% घटकर ₹11,318 करोड़ पर, NII में 7.7% की बढ़ोतरीX पर लेख लिखिए और जीतिए 1 मिलियन डॉलर! मस्क ने किया मेगा इनाम का ऐलान, जानें पूरी डिटेलChatGPT में अब आएंगे Ads, अमेरिका के यूजर्स के लिए ट्रायल शुरूलक्ष्मी मित्तल के पिता मोहन लाल मित्तल का निधन, उद्योग और समाज में गहरा शोकHDFC Bank Q3 Results: नेट प्रॉफिट 11.5% बढ़कर ₹18,654 करोड़ पर पहुंचा, NII ₹32,600 करोड़ के पारहर 40 शेयर पर मिलेंगे 5 अतिरिक्त शेयर! IT और कंसल्टिंग कंपनी का निवेशकों को तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सYES Bank की कमाई में जबरदस्त उछाल, Q3 में मुनाफा 55% बढ़ा

महिलाओं को समान दर्जा अब भी सपना, वेतन से लेकर नेतृत्व तक गहरी खाई

शिक्षा बढ़ी, लेकिन रोजगार और निर्णयकारी भूमिकाओं में महिलाएं अब भी हाशिये पर—टीमलीज अध्ययन में खुलासा

Last Updated- January 09, 2026 | 8:45 AM IST
Chennai, Bengaluru & Pune top cities for women in India

महिला-पुरुष असमानता की जड़ें दुनिया में काफी गहरी हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महिलाओं को समान भूमिकाओं के लिए पुरुषों की तुलना में 25-30 प्रतिशत कम वेतन मिलता है। शीर्ष स्तर पर तो यह अंतर और बढ़ कर 28 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।

भारतीय कंपनी जगत में शुरुआती स्तर पर होने वाले कार्यों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 31 प्रतिशत है मगर कार्यकारी स्तर पर उनकी भूमिकाएं तेजी से घटकर 17 प्रतिशत और कंपनी निदेशक मंडल (बोर्ड) स्तर पर यह मात्र 20 प्रतिशत तक सिमट जाती है। इतनी उपस्थिति भी इसलिए है, क्योंकि नियम-कायदों के अनुसार उनकी न्यूनतम उपस्थिति जरूरी है।

टीमलीज द्वारा इंडिया एम्प्लॉयर फोरम और जीएएन ग्लोबल के सहयोग से किए गए अध्ययन ‘हर पाथ, हर पावर’ के अनुसार निर्णय लेने वाली भूमिकाओं और आर्थिक सशक्तीकरण से उन्हें एक साजिश के तहत दूर रखा जा रहा है। यह अध्ययन गुरुवार को जारी किया गया है। महिलाओं की शैक्षणिक योग्यताएं बढ़ रही हैं, मगर तब भी उन्हें कम वेतन वाली नौकरियों में लगाया जा रहा है। उदाहरण के लिए एमबीबीएस की डिग्री लेने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनमें से केवल 17 प्रतिशत ही एलोपैथिक डॉक्टर बनती हैं।

इस अध्ययन में एक स्पष्ट वास्तविकता को भी रेखांकित किया गया है कि केवल शिक्षा ही महिलाओं के लिए रोजगार की गारंटी नहीं देती है। इसके अनुसार भारत की चुनौती न केवल महिलाओं को शिक्षित करना है बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उनका हुनर बाजार की जरूरतों के अनुरूप तराशा जाए।

उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 28 प्रतिशत है और इसका झुकाव कला, विज्ञान और स्वास्थ्य सेवा की ओर अधिक देखा गया है। एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है।

भारत में हरेक साल लगभग 1.2 से 1.5 करोड़ महिलाएं स्नातक की पढ़ाई पूरी करती हैं मगर तब भी अकादमिक उपलब्धियों को रोजगार में परिवर्तित करना बड़ी चुनौती बनी हुई है। महिलाओं की रोजगार क्षमता 2024 में 50.9 प्रतिशत से घटकर 2025 में 48 प्रतिशत रह गई जिससे पता चलता है कि उच्च शिक्षा स्तर बढ़ने के बावजूद वे रोजगार के मौके पाने में पुरुषों से पिछड़ रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार मुख्य अभियंत्रण (कोर इंजीनियरिंग) में रोजगार क्षमता विशेष रूप से 22 प्रतिशत के साथ कम है, जो तकनीकी प्रशिक्षण, आत्मविश्वास-निर्माण और उद्योग के प्रदर्शन में अंतर को दर्शाती है। सूचना-प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में 36 प्रतिशत महिलाएं रोजगार के काबिल समझी जाती हैं। बैंकिंग, वित्तीय सेवा एवं बीमा इंश्योरेंस में यह तादाद 40 प्रतिशत और स्वास्थ्य सेवा में 55 से 60 प्रतिशत है जो संबद्ध स्वास्थ्य प्रशिक्षण की संरचित और विनियमित प्रकृति द्वारा समर्थित है।

एक अच्छी बात यह है कि रोजगार के काबिल महिला प्रतिभाओं के समूह में 2021 से 46 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है।

First Published - January 9, 2026 | 8:45 AM IST

संबंधित पोस्ट