अंतरराष्ट्रीय

500% टैरिफ का अल्टीमेटम! ट्रंप ने भारत को सीधे निशाने पर लिया

Sanctioning of Russia Act 2025 के जरिए अमेरिका का दबाव, भारत की ऊर्जा नीति पर मंडराया संकट

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- January 08, 2026 | 12:32 PM IST

US tariffs on India: अमेरिका ने पहले भी भारत पर टैरिफ बढ़ाए हैं, लेकिन अब मामला सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि तेल और जियो-पॉलिटिक्स का बन चुका है। Donald Trump एक ऐसा बिल लेकर आ रहे हैं, जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगा सकता है। इस लिस्ट में भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश सीधे निशाने पर हैं।

अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के मुताबिक, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक अहम बिल को समर्थन दे दिया है। इस बिल का नाम है- Sanctioning of Russia Act 2025। ग्राहम का दावा है कि उन्होंने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की और ट्रंप ने इस बिल को मंजूरी दे दी, जिस पर वह महीनों से डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों के साथ काम कर रहे थे। हालांकि यह बिल अभी कानून नहीं बना है, लेकिन अगले हफ्ते ही इसे संसद में वोटिंग के लिए लाया जा सकता है।

US कांग्रेस की वेबसाइट के मुताबिक, यह बिल रूस से जुड़े लोगों और कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात करता है। लेकिन सबसे बड़ा और विवादित प्रावधान यह है कि अगर कोई देश रूस से तेल, पेट्रोलियम या यूरेनियम खरीदता है, तो अमेरिका उस देश से आने वाले सामान पर कम से कम 500 फीसदी टैरिफ लगा सकता है। यानी रूस से तेल खरीदो, तो अमेरिका तुम्हारे एक्सपोर्ट पर सीधा हमला करेगा।

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई थी। रूस ने भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल दिया और भारत की जरूरत भी थी- सस्ती और स्थिर सप्लाई। नतीजा ये हुआ कि जहां यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से सिर्फ 0.2 फीसदी तेल खरीदता था, वहीं बाद में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया। कई बार रूसी तेल भारत के कुल इंपोर्ट का 35-40 फीसदी तक पहुंच गया।

जनवरी 2025 में ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद अमेरिका ने भारत समेत कई देशों पर दबाव बढ़ाना शुरू किया। अगस्त 2025 में अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया। इससे भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ बोझ 50 फीसदी तक पहुंच गया।

नवंबर 2025 में जब रूस की बड़ी तेल कंपनियों- Rosneft और Lukoil पर नए प्रतिबंध लगे, तो भारत की रूसी तेल खरीद तेजी से घटी। डेटा के मुताबिक, नवंबर में भारत रोज करीब 18 लाख बैरल रूसी तेल खरीद रहा था, जो दिसंबर में घटकर 10 लाख बैरल प्रति दिन रह गया। जनवरी 2026 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने साफ कहा कि उसे कई हफ्तों से रूसी तेल की कोई डिलीवरी नहीं मिली और जनवरी में मिलने की उम्मीद भी नहीं है।

4 जनवरी को ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद नहीं किया, तो अमेरिका टैरिफ और बढ़ा सकता है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि हम बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं, और यह भारत के लिए बहुत बुरा होगा।

भारत सरकार ने ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने उन्हें रूसी तेल न खरीदने का भरोसा दिया है। भारत का साफ कहना है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और कीमतों की मजबूरी पर आधारित है, खासकर तब, जब दुनिया में तेल की कीमतें अस्थिर हैं।

 

First Published : January 8, 2026 | 12:19 PM IST