अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) से अमेरिका के पांव पीछे खींचने के बावजूद भारत इस संगठन के साथ काम करना जारी रखेगा। जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए सौर ऊर्जा समाधानों को लागू करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में पेरिस में कॉप21 के मौके पर इस गठबंधन की रूपरेखा तैयार की गई थी।
यह भारत और फ्रांस के बीच सहयोगात्मक पहल है और इसका लक्ष्य 2030 तक सौर निवेश में 1 लाख करोड़ डॉलर जुटाना है। भारत में मुख्यालय वाले आईएसए में वर्तमान समय में 90 से अधिक देश पूर्ण सदस्य और 100 से अधिक देश हस्ताक्षरकर्ता हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के 7 जनवरी को लिए गए एक फैसले के साथ अमेरिका आईएसए समेत 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हट गया है। इनमें से अधिकांश जलवायु परिवर्तन से निपटने पर ध्यान केंद्रित हैं। ट्रंप ने इन संगठनों को ‘अनावश्यक’ और ‘व्यर्थ’ बताया है। आईएसए जो अपनाने को बढ़ावा देता है, इन संस्थानों में से एक है। ट्रंप के फैसले का मतलब है कि इन संगठनों में अमेरिका की भागीदारी और वित्तीय मदद बंद हो जाएगी।
सरकारी सूत्रों ने कहा, ‘आईएसए विभिन्न क्षेत्रों में सौर ऊर्जा समाधानों के कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के साथ-साथ उनकी व्यवहार्यता और प्रभावशीलता को प्रदर्शित करने में सफल रहा है। हम इसके साथ काम करना जारी रखेंगे और सौर ऊर्जा को अपनाने एवं ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों का समर्थन करते रहेंगे।’