Budget 2026: बजट से पहले सुस्त रहा है बाजार, इस बार बदलेगी कहानी; निवेशक किन सेक्टर्स पर रखें नजर?

Budget 2026: एनालिस्ट्स के अनुसार, जनवरी में कंपनी नतीजों, वैश्विक संकेतों और बजट संबंधी उम्मीदों के बीच संतुलन बनाए रखने के कारण कंसोलिडेशन का दौर जारी रहने की संभावना है।

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साई अरविंद   
Last Updated- January 08, 2026 | 2:16 PM IST

Budget 2026 Stocks: भारत देश के सबसे बड़े आर्थिक आयोजनों में से एक वित्त वर्ष 2026-27 केंद्रीय बजट की तैयारी कर रहा है। लेकिन शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बजट से पहले का महीना आमतौर पर सुस्त रहता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2003 से अब तक बजट पेश होने से पहले वाले महीने में MSCI इंडिया इंडेक्स औसतन 1 फीसदी गिरा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रिटर्न का रुझान नेगेटिव रहा है। इस अवधि में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी सिर्फ दो बार देखने को मिली। जबकि इतनी ही बड़ी गिरावट नौ बार दर्ज की गई। देश में भी यही ट्रेंड देखने को मिला है। बजट से पहले जनवरी महीने में निफ्टी 50 और निफ्टी 500 जैसे प्रमुख इंडेक्स अक्सर दबाव में रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर, निफ्टी 50 जनवरी 2025 में 0.58 फीसदी, 2024 में 0.03 फीसदी (अंतरिम बजट), 2023 में 2.45 फीसदी, 2022 में 0.08 फीसदी और 2021 में 2.48 फीसदी गिरा था। इसी तरह, निफ्टी 500 जनवरी 2025 में 3.5 फीसदी, 2023 में 3.3 फीसदी, 2022 में 0.5 फीसदी और 2021 में 1.8 फीसदी फिसला था। साल 2024 ही ऐसा रहा, जब यह इंडेक्स 1.9 फीसदी चढ़ा था।

इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट सर्विस कंपनी इनवएसेट पीएमएसके पार्टनर और फंड मैनेजर अनिरुद्ध गर्ग के मुताबिक, ”इतिहास बताता है कि बजट से पहले का महीना आमतौर पर साफ दिशा के बिना रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि निवेशक नीतियों को लेकर स्पष्टता आने तक बड़े दांव लगाने से बचते हैं।”

इस साल भी एनालिस्ट्स का मानना है कि जनवरी में बाजार की चाल स्टॉक फोकस्ड रहने वाली है। गर्ग के अनुसार, जनवरी का महीना कंसॉलिडेशन का दौर रह सकता है। जहां निवेशक कमाई की स्थिति, वैश्विक संकेत और बजट से जुड़ी उम्मीदों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेंगे।

विश्लेषकों का कहना है कि स्ट्रेटेजी की तौर पर बजट जैसे बड़े इवेंट से पहले निवेशकों को संतुलित निवेश करना चाहिए। ध्यान ऐसे कारोबारों पर होना चाहिए, जिनमें स्थिर कैश फ्लो, प्राइसिंग पावर और नीति से जुड़े शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव का कम असर हो।

अनिरुद्ध गर्ग ने कहा, ”कुछ कैश बनाए रखना समझदारी है। यह बाजार को लेकर नेगेटिव सोच नहीं है, बल्कि बजट के बाद आने वाली अस्थिरता में मौके भुनाने की तैयारी है। निवेश में साहस से ज्यादा संतुलन जरूरी है।” गौरतलब है कि जनवरी में अब तक निफ्टी 0.04 फीसदी ऊपर है। जबकि निफ्टी 500 में 0.61 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। 5 जनवरी 2026 को निफ्टी ने 26,373.2 का नया रिकॉर्ड स्तर भी छुआ था।

बजट से पहले किन सेक्टर्स पर फोकस

ब्लूमबर्ग की ट्रेंड रिपोर्ट के अनुसार, बजट से पहले कैपिटल गुड्स और आईटी सेक्टर ने तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन किया है। एसएंडपी बीएसई कैपिटल गुड्स इंडेक्स साल 2003 से अब तक बजट से पहले औसतन 1 फीसदी की बढ़त दिखाता रहा है।

दूसरी तरफ, रियल एस्टेट और पावर सेक्टर लगातार कमजोर प्रदर्शन करने वालों में रहे हैं। इनमें औसतन 1 फीसदी और 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी जैसे कंज्यूमर सेक्टर आमतौर पर सीमित दायरे में ही कारोबार करते रहे हैं।

अनिरुद्ध गर्ग के मुताबिक, कैपेक्स यानी पूंजीगत खर्च अभी भी ग्रोथ का सबसे बड़ा आधार है। इसे वित्तीय अनुशासन का समर्थन मिल रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और औपचारिक अर्थव्यवस्था को सरकारी खर्च से फायदा होता है। जबकि फाइनेंशियल्स और मैन्युफैक्चरिंग थीम्स को उधारी, कैपेक्स फंडिंग और नीति समर्थन पर स्पष्टता मिलने के बाद मजबूती मिलती है।

सरकार का फोकस मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स!

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के फाउंडर जी चोक्कलिंगम का मानना है कि बजट 2026 में सरकार का फोकस मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स की ओर शिफ्ट हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले बजट में मिडिल क्लास और कंज्यूमर को बड़ी टैक्स राहत दी गई थी।

उन्होंने कहा कि पिछले बजट में वेलफेयर स्कीम्स, इनकम टैक्स में छूट और जीएसटी में परोक्ष कटौती जैसे कदम उठाए गए थे। इससे मीडिल क्लास को फायदा मिला। अब सरकार का एजेंडा ग्रोथ पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, कैपिटल खर्च और आयात पर निर्भरता घटाने पर जोर होगा। यह कदम वैश्विक टैरिफ तनाव और निर्यात पर मंडराते जोखिमों को देखते हुए अहम माने जा रहे हैं। इसके अलावा, डिफेंस सेक्टर भी सरकार के फोकस में रह सकता है।

चोक्कलिंगम ने निवेशकों को मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस से जुड़े शेयरों, खासकर लार्ज-कैप और क्वालिटी मिड-कैप कंपनियों पर ध्यान देने की सलाह दी है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि स्मॉल और मिड-कैप शेयरों में दबाव मार्च तक बना रह सकता है। इसका कारण प्रमोटरों की हिस्सेदारी बिक्री और बड़े स्तर पर आईपीओ के जरिए फंड जुटाना हो सकता है।

First Published : January 8, 2026 | 1:06 PM IST