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दशहरी आम पर कोरोना की मार

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Last Updated- December 12, 2022 | 2:41 AM IST

खराब मौसम, कीड़ों के असर और कोरोना की मार ने इस बार उत्तर प्रदेश के मशहूर दशहरी के कारोबार को आधा कर दिया। सामान्य दिनों के मुकाबले मौसम की मार से बदरंग हुए दशहरी का सीजन भी समय से पहले खत्म हो गया और कारोबारियों को तगड़ी चपत लगी है। बाजार में बिकने के लिए आए दशहरी आमों को काले धब्बे और खराब गुणवत्ता के चलते न दाम मिले, न ग्राहक। मुंबई और दिल्ली में भी दशहरी के तलबगार खासे कम हो गए।
 
आम तौर पर सालाना 2,000 करोड़ रुपये कारोबार वाले दशहरी पर बीते साल भी कोरोना की मार पड़ी थी और लॉकडाउन के चलते धंधा घटकर महज 1,200 करोड़ रुपये ही रह गया था। इस बार कोरोना से भी ज्यादा खराब गुणवत्ता ने दशहरी के कारोबारियों को तोड़ कर रख दिया है। बीते कई सालों में पहली बार यह हुआ है कि दशहरी का धंधा महज 650-700 करोड़ रुपये के बीच ही हो पाया है। दशहरी का सीजन जून के पहले हफ्ते से शुरू होकर जुलाई के दूसरे हफ्ते तक चलता था। इस बार यह दो हफ्ते पहले ही सिमट गया और अब बाजार में लंगड़ा, चौसा जैसे दूसरे आम नजर आने लगे हैं।
 
मुंबई और दिल्ली की मंडियों में मांग कम होने के चलते उत्तर प्रदेश के फल पट्टी क्षेत्र काकोरी-मलिहाबाद के बागबानों और आढ़तियों को इस बार अपना माल औने पौने दामों पर स्थानीय मंडियों में ही खपाना पड़ा। सीजन के पीक पर आते आते जून के तीसरे हफ्ते में दशहरी आम की कीमत घटकर 10-15 रुपये किलो रह गई थी। हालांकि इस बार भी पहली जून को जब मलिहाबाद में मंडी सजी थी तो दशहरी के दाम 35-40 रुपये किलो पर खुले थे।
 
मलिहाबाद की मशहूर नफीस नर्सरी के मालिक शबीहुल हसन का कहना है कि मॉनसून के पहले ही हुई कई बार की बारिश के कारण दशहरी पर काले धब्बे पड़ गए जिसके चलते इसकी कीमतों पर असर पड़ा। इसके बाद दशहरी को ऐंर्थेकनोज नाम की बीमारी लगी जिससे यह अंदर से सडऩे लगा और फिर तो खरीदार मिलने मुश्किल हो गए। इतना ही नहीं जब दशहरी के फल लगे ही थे तभी थ्रिस नाम के कीट का हमला हुआ था और इसके बदरंग होने की शुरुआत हो गई थी।
 
आम कारोबारी हकीम त्रिवेदी बताते हैं कि इस बार समय से कहीं पहले ही दशहरी के पेड़ों में बौर आ गए थे और उसमें से भी 25 फीसदी खराब हो गए थे। उनका कहना है कि अकेले एक ही नहीं कई तरह के कीटों के हमले दशहरी पर हुए और कोरोना संकट के चलते बंदी में बागवान ठीक से कीटनाशक भी नहीं डाल पाए। कुछ दूसरे कारोबारी बताते हैं कि सरकार ने निर्यात सब्सिडी भी घटाकर 26 फीसदी की जगह 10 फीसदी कर दी है। सब्सिडी कम होने से बहुत से लोग निर्यात भी नहीं कर पाए हैं। शबीहुल का कहना है कि अच्छी दशहरी जरूर कुछ देशों तक गई है।

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First Published - July 16, 2021 | 6:13 PM IST

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