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सीएम का फरमान बना आफत-ए-जान

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Last Updated- December 11, 2022 | 1:20 AM IST

ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनने के लिए उत्तराखंड महंगे दाम पर भी बिजली खरीदने को तैयार है। लेकिन राज्य सरकार के स्वामित्व वाले विद्युत निगम को दूसरे राज्यों से महंगे दामों पर भी बिजली खरीदने में मुश्किल हो रही है।
हालांकि राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति में थोड़ा सा ही फर्क है। उत्तराखंड ने कई राज्यों के साथ बैंकिंग व्यवस्था की हुई है, लेकिन लोकसभा चुनावों को देखते हुए इनमें से अधिकतर राज्यों ने इसके बदले में उसे बिजली की आपूर्ति करने से इनकार कर दिया है। इसी वजह से राज्य में बिजली की थोड़ी सी किल्लत हो रही है।
गर्मी में बिजली की बढ़ती मांग के  कारण उत्तराखंड पावर कॉर्पोरशन लिमिटेड (यूपीसीएल) पर इस समय बिजली आपूर्ति करने का काफी दबाव है। लोकसभा चुनावों के कारण राज्य के मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने निगम को बिजली क टौती नहीं करने का आदेश दिया है। इस कारण यूपीसीएल को दूसरे राज्यों से अधिक कीमत पर बिजली खरीदने के लिए मजबूर हो रही है। यूपीसीएल इसके लिए गुजरात, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों से बातचीत भी कर रही है।
यूपीसीएल के अधिकारी ने बताया, ‘इस समय हमारे ऊपर काफी ज्यादा दबाव है। कई बार तो हमें दूसरे राज्यों से बिजली की आपूर्ति के लिए गिड़गिड़ाना भी पड़ता है।’ यूपीसीएल के सूत्रों ने बताया कि काफी मोलभाव के बाद गुजरात यूपीसीएल को 12 रुपये प्रतियूनिट के हिसाब से लगभग 32 लाख यूनिट की आपूर्ति करने को तैयार हो गया है।
जबकि दूसरी तरफ यूपीसीएल दिल्ली, हरियाणा और बाकी राज्यों से बिजली खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है।  उत्तराखंड को इस समय लगभग 230 लाख यूनिट बिजली की आवश्यकता है। लगभग 70 लाख यूनिट का उत्पादन करने के साथ ही बिजली निगम केंद्र सरकार से मिलने वाली बिजली के साथ ही निगम उत्तरी ग्रिड से भी बिजली ले रही है।
लेकिन इन सभी के बावजूद राज्य के इस लक्ष्य में अभी 60 लाख यूनिट की कमी है। राज्य में काफी तेजी से औद्योगिक विकास हुआ है। इस औद्योगिक विकास के कारण ही पिछले साल के मुकाबले इस साल लगभग 22 लाख यूनिट बिजली की अधिक खपत हो रही है।
गर्मियों में उत्तराखंड लगभग 120-130 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन करता है, लेकिन सर्दियों के मौसम में राज्य की विभिन्न नदियों में जल प्रवाह आधा होने के कारण बिजली उत्पादन भी घटकर आधा ही रह जाता है। लेकिन अब यूपीसीएल के अधिकारियों को अगले 15 दिनों में हालात कुछ सुधरने की उम्मीद लग रही है।
जब यूपीसीएल के अधिकारियों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बिजली की समस्या काफी गंभीर है, लेकिन आने वाले 15 दिनों में नदियों में जमी बर्फ के पिघलने के कारण जल स्तर बढ़ने से हालात कुछ बेहतर होने की उम्मीद है।
इस बारे में उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें भी सभी जलविद्युत परियोजनाओं के पूरी क्षमता से शुरू होने के कारण लगभग 60 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। यूपीसीएल को कालागढ़ परियोजना से भी लगभग 14 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होने की संभावना है।

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First Published - April 20, 2009 | 10:23 AM IST

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