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सियासी हलचल: कौन होगा स्टालिन का उत्तराधिकारी?

स्टालिन को शायद खुद ही अपने पुत्र की स्वीकार्यता और गंभीरता पर संदेह है। वह एक से ज्यादा बार कह चुके हैं कि उदयनिधि अभी इस जिम्मेदारी के लिए ‘तैयार’ नहीं हैं।

Last Updated- August 16, 2024 | 9:26 PM IST
कौन होगा स्टालिन का उत्तराधिकारी? Political turmoil: Who will be Stalin's successor?
M K Stalin

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अगस्त के आखिर में प्रदेश के लिए निवेश जुटाने अमेरिका जाएंगे। वह करीब तीन सप्ताह तक विदेश में रहेंगे। कुछ लोगों का कहना है कि इसमें कुछ नया नहीं है और अन्य मुख्यमंत्रियों की तरह वह भी प्रवासियों को लुभाने जा रहे हैं। परंतु इतने समय के लिए बाहर रहने पर अपनी जगह राज्य की बागडोर संभालने के लिए किसी व्यक्ति का चयन उत्तराधिकारी के चयन में बदल सकता है। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में अब दो वर्ष से भी कम बचे हैं (प्रदेश में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं), इसलिए उन पर दबाव होना स्वाभाविक है।

सबकी नजरें उनके बेटे उदयनिधि पर टिकी हैं, जो फिलहाल राज्य में द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार में खेल मंत्री हैं। सरकार में अन्य मंत्रियों का कहना है कि उदयनिधि को पहले उप मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। ऐसे लोगों में उच्च शिक्षा और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री आर एस राजकन्नपन और आवास एवं शहरी विकास मंत्री एस मुत्तुस्वामी जैसे लोग शामिल हैं। ऐसा बोलने वालों में सबसे नया नाम है नागर प्रशासन मंत्री केएन नेहरू का।

राजकन्नपन पहले द्रमुक छोड़कर अखिल भारतीय अन्ना द्रमुक में चले गए थे मगर पार्टी में लौट आए हैं और यह जताने के लिए अधीर हुए जा रहे हैं कि पार्टी के साथ उनका जोड़ अब एकदम पक्का है। इस माह के आरंभ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने उदयनिधि को उप मुख्यमंत्री कहकर संबोधित किया। उसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी बात में संशोधन किया और कहा कि लोग उन्हें उप मुख्यमंत्री कह सकते हैं लेकिन ’19 अगस्त’ के बाद। मुत्तुस्वामी भी पहले अन्नाद्रमुक में ही थे मगर वह 2010 में करुणानिधि के जीवित रहते ही द्रमुक में शामिल हो गए थे। उन्होंने भी उप मुख्यमंत्री पद के लिए उदयनिधि का नाम लिया है। परंतु नेहरू को गंभीरता से लेना होगा। वह त्रिची से पांच बार के विधायक हैं। वह कभी पार्टी छोड़कर नहीं गए हालांकि स्टालिन के साथ भी उनके मतभेद रहे हैं, जिन्हें वह राजनीति में देर से आने वाला व्यक्ति मानते हैं।

बहरहाल लोक सभा चुनावों के बाद द्रमुक में पार्टी के विस्तार के लिए सुझाव देने हेतु एक समिति बनाई गई, जिसमें उन्हें रखा गया था। इससे लगता है कि सब कुछ भुला दिया गया है और उन्हें माफ कर दिया गया है। लेकिन स्पष्ट है कि उदयनिधि के मामले में किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले नेहरू वही गलती नहीं दोहराना चाहते। उन्होंने भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ता उदयनिधि को उप मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और ऐसा हुआ तो ‘हम सब खुश होंगे।’ किंतु उन्होंने साथ में यह भी कहा कि स्टालिन ‘किसी को भी उप मुख्यमंत्री’ बनाने के लिए स्वतंत्र हैं।

अब कुछ बातें उदयनिधि के बारे में भी। सनातन धर्म पर अपनी टिप्पणी के बाद वह देश भर में सुर्खियों में आ गए। उन्होंने सनातन धर्म को जाति व्यवस्था के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराते हुए उसकी तुलना संक्रामक रोग से कर दी और उसका सफाया करना जरूरी बताया। इस पर मद्रास उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी खिंचाई की मगर उदयनिधि ने पीछे हटने से इनकार कर दिया और वह देश भर की अदालतों में मुकदमे लड़ रहे हैं। उन्होंने तमिल फिल्मों में अभिनय भी किया, जिसमें उन्हें थोड़ी-बहुत सफलता मिली। उन्होंने फिल्म निर्माण कंपनी रेड जाइंट्स भी शुरू की और 2021 के विधानसभा चुनावों के समय राजनीति में उतर गए। वह चेन्नई के चेपक-तिरुवल्लिकेनी विधानसभा क्षेत्र से चुने गए।

किंतु स्टालिन को शायद खुद ही अपने पुत्र की स्वीकार्यता और गंभीरता पर संदेह है। वह एक से ज्यादा बार कह चुके हैं कि उदयनिधि अभी इस जिम्मेदारी के लिए ‘तैयार’ नहीं हैं। मगर वह यह भी मानते हैं कि पार्टी में उनका कद बढ़ाने की ‘मांग बढ़ी’ है। द्रमुक के जनक एम करुणानिधि ने स्टालिन को अपने मंत्रिमंडल में तब शामिल किया जब वह 50 वर्ष की उम्र पार कर चुके थे। 2009 में जब उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाया गया तब वह 55 वर्ष के थे। करुणानिधि 2018 में निधन तक पार्टी के मुखिया बने रहे।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर उदयनिधि नहीं तो भला कौन? इसके जवाब में 86 वर्ष के दुरईमुरुगन का नाम उठता है, जो अभी जल संसाधन मंत्री हैं। उनकी उम्र से चिंता नहीं होनी चाहिए क्योंकि इस उम्र में भी उनके बाल पूरी तरह काले हैं। अगस्त में बतौर विधायक उनके 53 वर्ष पूरे हो रहे हैं। वह पहली बार 1971 में कटपडी विधानसभा से जीते और आठ बार उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वह दो बार रानीपेट से भी विधायक रहे। पार्टी में कुछ ही लोग हैं जो उनकी वरिष्ठता या वफादारी को चुनौती दे सकते हैं।

परंतु उदयनिधि को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है। उनसे वरिष्ठ लोग सोच सकते हैं कि उन्हें एक नेता के रूप में अभी और मंझना है। किंतु कांग्रेस जैसे गठबंधन साझेदार के नेता भी मानते हैं कि वह उस पार्टी में उत्तराधिकारी के रूप में स्वाभाविक पसंद होंगे, जहां उत्तराधिकार का संघर्ष किसी लंबे धारावाहिक से कम नहीं चलता। द्रमुक की राजनीति हमेशा दिलचस्प होती है और आने वाले दिनों में यह और रोचक होने जा रही है।

First Published - August 16, 2024 | 9:26 PM IST

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