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जनवरी में बाजार की हालत खराब, निफ्टी 500 के 70% शेयर टूटे; आगे क्या करें निवेशक?

जनवरी महीने में अब तक निफ्टी 500 इंडेक्स के 348 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयर को हुआ है।

Last Updated- January 14, 2026 | 3:18 PM IST
stock market

Stock Market: भारतीय शेयर बाजार ने वैश्विक अनिश्चितता को लेकर बनी बेचैनी के साथ साल 2026 की शुरुआत की है। जनवरी महीने में अब तक निफ्टी 500 के ज्यादातर शेयर नुकसान में रहे हैं। एसीई इक्विटी के आंकड़ों के मुताबिक, 13 जनवरी 2026 तक निफ्टी 500 के करीब 70 प्रतिशत शेयरों ने नेगेटिव रिटर्न दिया है। यह पिछले पांच सालों में इस अवधि के दौरान दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन है।

इससे पहले कैलेंडर वर्ष 2025 में भी इसी अवधि में निफ्टी 500 के करीब 88 प्रतिशत शेयर लाल निशान में थे। वहीं, 2020, 2021 और 2022 में इस दौरान 50 से 75 प्रतिशत शेयरों में बढ़त देखने को मिली थी। इंडेक्स के स्तर पर देखें तो जनवरी 2026 में अब तक निफ्टी 500 इंडेक्स करीब 1.6 प्रतिशत गिर चुका है। जबकि निफ्टी 50 में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई है।

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इसके साथ ही जनवरी 2026 में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा है। अमेरिका का एस एंड पी 500 इंडेक्स करीब 2 प्रतिशत चढ़ चुका है। जबकि एशिया में जापान का निक्केई इंडेक्स साल की शुरुआत से अब तक 6 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दिखा चुका है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च प्रमुख देवर्ष वकील के मुताबिक, यह फर्क विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से शुल्क बढ़ाने की धमकियों और वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता की वजह से है। वहीं, अमेरिका और कुछ एशियाई बाजारों को नई तकनीक से जुड़ी तेजी और नीतिगत समर्थन का फायदा मिल रहा है।

2026 में बाजार में सुस्ती

जनवरी महीने में अब तक निफ्टी 500 इंडेक्स के 348 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयर को हुआ है, जो अब तक करीब 20 प्रतिशत टूट चुका है।

इसके अलावा आईटीसी, एलेकों इंजीनियरिंग, तेजस नेटवर्क्स, सिग्नेचरग्लोबल (इंडिया), कोहैंस लाइफसाइंसेज, एनबीसीसी (इंडिया), एथर एनर्जी, जुपिटर वैगन्स, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर और जीई वर्नोवा टीएंडडी इंडिया जैसे कई बड़े शेयर भी कमजोर रहे हैं। इन शेयरों में इस दौरान 13 से 17 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।

तकनीकी तौर पर देखें तो निफ्टी 500 के 60 प्रतिशत से ज्यादा यानी 302 शेयर अपने लॉन्ग टर्म के 200-दिन के मूविंग एवरेज से नीचे फिसल चुके हैं। यह निवेशकों के बीच सतर्कता का संकेत देता है।

आमतौर पर जो शेयर 200-दिन के मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार करते हैं, उन्हें नेगेटिव रुझान में माना जाता है। यह संकेतक किसी शेयर या इंडेक्स के लंबे समय के रुझान को समझने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एक अन्य अहम तकनीकी संकेतक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स के मुताबिक, निफ्टी 500 के करीब 8 प्रतिशत यानी 40 शेयर अभी ओवरसोल्ड जोन में हैं।

रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स का पैमाना 0 से 100 के बीच होता है। इसमें 30 से नीचे का स्तर ओवरसोल्ड और 70 से ऊपर का स्तर ओवरबॉट माना जाता है, जब इसे 14 दिन की अवधि के आधार पर देखा जाता है।

आगे क्या करें निवेशक ?

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के देवर्ष वकील के अनुसार, भारतीय शेयर बाजारों ने मौजूदा नेगेटिव बातों को काफी हद तक पहले ही अपनी कीमतों में शामिल कर लिया है। अब बाजार की नजरें यूनियन बजट 2026-27 और दिसंबर तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही) के नतीजों पर टिकी हैं, ताकि निवेशकों का भरोसा फिर से लौट सके। हालांकि, उम्मीदें बजट के मुकाबले तिमाही नतीजों से ज्यादा जुड़ी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि बाजार ने तीसरी तिमाही के नतीजों को लेकर अपनी उम्मीदें कुछ कम कर ली हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में अब भी चुनौतियां बनी हुई हैं और कमाई में सीमित बढ़त की ही संभावना है। लेकिन अगर कमाई में लगातार मजबूती दिखती है, तो इससे बाजार के रुझान में साफ बदलाव आ सकता है और निवेशकों का भरोसा दोबारा बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा झटका नहीं आता, तो निकट अवधि में बाजार कमाई के दम पर संभल सकता है।

बजट 2026 से क्या उम्मीदें ?

यूनियन बजट को लेकर विश्लेषकों का मानना है कि कर नियमों में स्थिरता, पूंजीगत खर्च पर जोर, छोटे और मझोले उद्योगों के लिए मदद का पैकेज और कुछ टैक्स राहत (संभव है पूंजीगत लाभ कर में) बाजार का मनोबल बढ़ा सकती है। हालांकि, सरकारी वित्तीय सीमाएं किसी बड़े प्रोत्साहन की गुंजाइश को सीमित करती हैं।

राइट रिसर्च पीएमएस की फाउंडर और फंड मैनेजर सोनम श्रीवास्तव के मुताबिक, बाजार के मनोबल में थोड़े समय के लिए सुधार हो सकता है। लेकिन जब तक कमाई के अनुमान नहीं बढ़ते, तब तक बाजार में तेजी और मजबूती की वापसी मुश्किल है। आमतौर पर बजट पूरे बाजार को ऊपर नहीं उठाता, बल्कि कुछ खास क्षेत्रों में पैसा घूमता है। जैसे पूंजीगत खर्च से जुड़े क्षेत्र, डिफेंस, रेलवे या ग्रामीण क्षेत्र। वहीं, अब तक आए तीसरी तिमाही के नतीजों में बैंकिंग और कुछ सुरक्षित क्षेत्रों में मजबूती दिखी है। लेकिन यह कुल कमाई के अनुमान को बदलने के लिए काफी नहीं है।

उन्होंने कहा कि जब तक मुनाफे या मांग को लेकर कोई बड़ा और चौंकाने वाला सुधार नहीं दिखता, तब तक बाजार में आने वाली तेजी सीमित रहेगी और यह ज्यादा तर मनोबल पर आधारित होगी, न कि मजबूत बुनियादी वजहों पर।

First Published - January 14, 2026 | 2:25 PM IST

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