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विधिक मजबूती से आएगा निवेश

Last Updated- December 15, 2022 | 4:50 AM IST

गूगल ने घोषणा की है कि वह अगले पांच से सात वर्षों में भारत में 10 अरब डॉलर (करीब 75 हजार करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। यह राशि इक्विटी निवेश और डिजिटलीकरण बढ़ाने के लिए की जाने वाली साझेदारियों के रूप में दी जाएगी। इस तरह गूगल भी फेसबुक, क्वालकॉम, सॉवरिन फंड और विभिन्न वेंचर कैपिटल तथा निजी इक्विटी फर्म की राह पर बढ़ चली है। ये सभी भारत के टेक्नोलॉजी क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो इस समय अत्यंत आकर्षक माना जा रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की गैरसूचीबद्ध अनुषंगी जियो प्लेटफॉम्र्स सबसे बड़ी लाभार्थी साबित हुई है। बीते चार महीनों में उसे 4 अरब डॉलर मूल्य का निवेश हासिल हुआ है। गूगल द्वारा जियो में 33,737 करोड़ रुपये का निवेश कर 7.7 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा हो चुकी है। माना जा रहा है कि इस साझेदारी से रिलायंस को दूरसंचार क्षेत्र के बाद अपने दबदबे को मनोरंजन, खुदरा बाजार, सोशल मीडिया, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, इंस्टैंट मेसेजिंग और फिनटेक आदि क्षेत्रों में बढ़ाएगी। हालांकि देश के कई स्टार्टअप और दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी एयरटेल में भी निवेश आ रहा है।
ऐसा कई वजहों से हो रहा है। एक तो यह कि महामारी के कारण लग रहे लॉकडाउन तथा घर से काम करने की प्रवृत्ति बढऩे के साथ ही लोगों द्वारा ऑनलाइन बिताए जाने वाले समय में इजाफा हुआ है। इसके साथ ही नए क्षेत्रों में डिजिटल सेवा आपूर्ति की संभावना बढ़ी है। एक अन्य कारक यह है कि टिकटॉक जैसे चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगने के बाद भारतीय डिजिटल क्षेत्र में काफी गुंजाइश उत्पन्न हुई है। उद्यमी वैसी ही विशेषताओं वाले ऐप के साथ उस जगह को भरने की होड़ में हैं। जनांकीय स्थिति भी एक कारक है। आबादी की दृष्टि से भारत एक युवा देश है और मोबाइल ब्रॉडबंैड ग्राहकों की तादाद के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर है। प्रति व्यक्ति डेटा खपत के मामले में भारत अव्वल है और नीतिगत गतिरोध के बावजूद ई-कॉमर्स तेजी से विकसित हो रहा है। महामारी के कारण डेटा खपत बढ़ी है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
इस बात को लेकर चिंताएं भी हैं कि कमजोर नीति निर्माण तथा विधान इस बड़े बाजार की राह भटका सकते हैं और उसके पूर्ण विकास को बाधित कर सकते हैं। नागरिकों के डेटा की सुरक्षा में नीति निर्माता सही ढंग से काम नहीं कर पाए हैं। डिजिटल कारोबार से जुड़ी कुछ मांगें भी असंगत हैं। सरकार ने सुरक्षा कारणों से 50 चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाया। वह ऐसी नीति बनाने पर जोर दे रही है जिसके तहत भारतीयों के निजी और व्यक्तिगत डेटा को देश के सर्वर के भीतर रखा जाए। परंतु हमारे यहां डेटा संरक्षण कानून नहीं है। भारतीय सर्वर पर भंडारित डेटा का दुरुपयोग संभव है।
इसका मसौदा कानून 2018 से लंबित है। बीएन श्रीकृष्ण समिति द्वारा पेश किए जाने के बाद संसदीय समिति ने इसमें संशोधन भी किया। नए मसौदे में सरकारी एजेंसियों की निगरानी से कोई बचाव नहीं है। इसके अलावा सरकार गैर निजी डेटा पर पूरी पहुंच चाहती है। यानी कारोबारियों की वाणिज्यिक गोपनीयता भी खतरे में आ जाएगी। सरकार दूरसंचार उपकरणों का सोर्स कोड भी चाहेगी। इसमें मोबाइल फोन भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक उसने सोशल मीडिया डेटा को स्थानीय सर्वरों पर रखने तथा मांग करने पर प्रस्तुत करने को भी कहा है। ये मांगें इस विशाल क्षेत्र के विकास को प्रभावित कर सकती हैं और नागरिकों की निजता को जोखिम में डाल सकती हैं। ऐसे में सरकार को डेटा संरक्षण कानून को समुचित प्रावधानों के साथ पारित करना चाहिए। मजबूत कानूनी ढांचा इस क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ाने और निवेश जुटाने का काम करेगा।

First Published - July 15, 2020 | 11:40 PM IST

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