आधुनिक और गतिशील बाजार अर्थव्यवस्था में परिणामों को बेहतर बनाने के लिए कानूनों और विनियमों का नियमित रूप से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। संभव है कि बाजार संबंधी बदलती परिस्थितियां समायोजन की मांग करें, या कार्यान्वयन का अनुभव स्वयं विनियमन में खामियों को उजागर कर दे। ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी), 2016 का कार्यान्वयन […]
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चीन के साथ दुनिया भर की मझोली शक्तियां अपने आर्थिक रिश्तों का पुनर्परीक्षण कर रही हैं। कनाडा और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री तथा फ्रांस के राष्ट्रपति ने हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की है और वे आपसी रिश्तों को नए सिरे से बहाल करने की उम्मीद कर रहे हैं। यूरोपीय समुदाय […]
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भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में ‘विनियमित संस्थाओं द्वारा वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री’ तथा ‘ऋण की वसूली और रिकवरी एजेंटों की नियुक्ति में विनियमित संस्थाओं के आचरण’ को लेकर मसौदा संशोधन निर्देश जारी किए हैं। इनके 1 जुलाई 2026 से लागू होने की उम्मीद है। यह उपभोक्ता केंद्रित बैंकिंग […]
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गत सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से उन पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर फ्रंट ऑफ पैक यानी पैकेट पर सामने की ओर चेतावनी लेबल लगाने पर गंभीरता से विचार करने को कहा, जो चीनी, संतृप्त वसा, ट्रांस वसा और सोडियम की अधिक मात्रा वाले हों। न्यायालय ने यह भी कहा […]
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नई दिल्ली में इस सप्ताह होने जा रही एआई इम्पैक्ट समिट एक ऐसे समय में आयोजित हो रही है जब आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) को दुनिया भर में तेजी से अपनाया जा रहा है। सरकार की महत्त्वाकांक्षा एकदम स्पष्ट है: भारत को वैश्विक एआई परिदृश्य की एक विश्वसनीय आवाज के रूप में स्थापित करना। अभी इस […]
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साइबर सुरक्षा से जुड़ा जोखिम वर्तमान में देश के उद्योग जगत के समक्ष उत्पन्न सबसे गंभीर खतरा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) और ईवाई के जोखिम सर्वेक्षण 2026 के मुताबिक सर्वे में शामिल 61 फीसदी कारोबारी नेतृत्व ने साइबर सुरक्षा को संस्थागत प्रदर्शन को आकार देने के मामले में प्राथमिक […]
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नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) श्रृंखला दिखाती है कि मुद्रास्फीति की दर जनवरी में बढ़कर 2.75 फीसदी हो गई। यह पुरानी श्रृंखला के मुताबिक दिसंबर में आए 1.33 फीसदी केे आंकड़े से काफी अधिक है। खाद्य मुद्रास्फीति की दर 2.13 फीसदी रही। सीपीआई के घटकों में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं। उसके आधार वर्ष को 2012 […]
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नीति आयोग द्वारा इस सप्ताह प्रकाशित नए शोध से देश की दीर्घकालिक जलवायु रणनीति केंद्र में आ गई है। यह 2047 तक विकसित भारत बनाने के रास्ते बताती है और देश को 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य तक ले जाने की राह पर भी रखती है। अनुमान है कि मौजूदा नीतियों में भारत को […]
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चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के स्थिर मूल्यों पर 7.4 फीसदी की दर से वृद्धि हासिल करने का अनुमान है। वर्ष 2024-25 में इसमें 6.5 फीसदी की वृद्धि हुई थी। कोविड-19 महामारी के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख थीम लगातार उच्च सरकारी पूंजीगत व्यय रही है। महामारी के बाद आर्थिक सुधार में […]
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‘पुराना जमाना खत्म हो रहा है, और नया जमाना आने के लिए जूझ रहा है। अब राक्षसों का समय है।’ इटली के दार्शनिक एंटोनियो ग्राम्शी का यह उद्धरण आज राजनीतिक-नीति जगत में अक्सर दोहराया जाता है। यह गलत नहीं है। जनवरी 2026 में मौजूदा विश्व व्यवस्था में और अधिक उथल-पुथल तथा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। […]
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