साल 2025 के अंत में गिग कर्मियों और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के लिए काम करने वाले कामगारों के एक वर्ग द्वारा मेहनताने और काम के हालात को लेकर की गई हड़ताल ने क्विक कॉमर्स और फूड डिलिवरी कंपनियों को अपने कारोबारी मॉडल को नए सिरे से तैयार करने का अवसर प्रदान किया है। गिग कर्मचारियों की मांगें बुनियादी हैं। इनमें न्यायसंगत और पारदर्शी वेतन, 10 मिनट में सामान की आपूर्ति करने पर प्रतिबंध तथा हाल ही में अधिसूचित श्रम संहिताओं के अनुरूप वेतन और लाभों का समायोजन करना शामिल है।
नियोक्ताओं के लिए भी प्रतिक्रिया देना तेजी से जरूरी होता जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ साल में क्विक कॉमर्स का तेजी से विस्तार हुआ है और गिग तथा प्लेटफॉर्म श्रमिकों की मांग में भारी इजाफा होने की संभावना है। नीति आयोग का अनुमान है कि राइड शेयरिंग, डिलिवरी, लॉजिस्टिक्स और पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कार्यरत कामगारों की संख्या एक करोड़ तक हो चुकी है। वर्ष 2029-30 तक यह बढ़कर 2.3 करोड़ तक पहुंच सकती है। दूसरे शब्दों में कहें तो अर्थव्यवस्था का यह खंड युवाओं के लिए रोजगार का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत बनने की क्षमता रखता है। इसके बावजूद यह तेजी से स्पष्ट होता जा रहा है कि उनके काम करने के हालात को आदर्श नहीं माना जा सकता है।
पहली बात तो यही कि क्विक कॉमर्स तेजी से एक ऐसा व्यापार मॉडल बनता जा रहा है जो ट्रैफिक नियमों को तोड़ने पर आधारित है। उपभोक्ताओं तक पहुंचने की प्रतिस्पर्धी होड़ ने एक ऐसी संरचना बना दी है जो डिलिवरी पार्टनर्स को तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने और न केवल खुद को बल्कि आम जनता को भी खतरे में डालने के लिए मजबूर करती है। डिलिवरी समय-सीमा और सड़क सुरक्षा के बीच संबंध को साबित करने के लिए आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन समस्या इतनी गंभीर हो गई थी कि बेंगलूरु पुलिस ने इस पर ध्यान दिया और डिलिवरी कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। वहां की पुलिस ने यह कदम तब उठाया जब उसने लापरवाह ड्राइविंग के कारण डिलिवरी पार्टनर्स के खिलाफ बुकिंग और जुर्माने में उल्लेखनीय वृद्धि देखी। इसलिए, गिग श्रमिकों की यह मांग कि इन समय-सीमाओं को समाप्त किया जाए, निराधार नहीं है।
दूसरे, पिछले वर्ष एक से 30 सितंबर के बीच किए गए एक सर्वेक्षण ने गिग कर्मियों और स्थायी कर्मचारियों के बीच बड़े अंतर को उजागर किया। इसमें 47 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि गिग कर्मियों को 10 से 25 फीसदी कम मेहनताना मिलता है। अन्य सर्वेक्षणों ने यह भी दिखाया है कि गिग श्रमिक बेहद असुरक्षित स्थिति में रहते हैं। लंबे समय तक काम करने के बावजूद यानी दिन में 16-16 घंटे काम करने के बावजूद कई गिग कर्मी ईंधन और प्लेटफॉर्म कमीशन जैसी लागतों के बाद न्यूनतम तय वेतन से भी कम कमाते हैं।
उन्हें बुनियादी चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं मिलते। इसके कारण कोई बीमारी या दुर्घटना उनकी मामूली कमाई को पूरी तरह समाप्त कर सकती है। नीति आयोग के वर्ष 2024 के एक सर्वेक्षण ने खुलासा किया कि 90 फीसदी गिग श्रमिकों के पास बचत नहीं है। प्लेटफॉर्म के कुछ व्यवहार जैसे छुट्टी लेने वाले कर्मियों को डिस्कनेक्ट करना, उनकी आय की अस्थिरता को और बढ़ा देते हैं। हड़ताल की धमकी के जवाब में, कुछ एग्रीगेटर्स ने क्रिसमस और वर्षांत के दौरान प्रोत्साहन भुगतान बढ़ा दिए।
इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता क्योंकि यह एक गहरे तक जड़ जमाई समस्या है। श्रम संहिताएं, जो 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हुई हैं, औपचारिक रूप से गिग कर्मियों को कल्याण, दुर्घटना और स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती हैं। ये संहिताएं एग्रीगेटर्स के लिए यह जरूरी करती हैं कि वे अपने वार्षिक कारोबार का 1 से 2 फीसदी एक समर्पित सामाजिक सुरक्षा कोष में जमा करें, जिसे श्रमिक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करने के बाद उपयोग कर सकते हैं।
साथ ही, सप्ताह के काम को 48 घंटे तक सीमित किया गया है। इन सबके कारण क्विक कॉमर्स कंपनियों और एग्रीगेटर्स को अपनी लागत और प्रोत्साहन संरचनाओं को पुनः समायोजित करना होगा। एक ऐसे उद्योग में जो अभी तक बड़े पैमाने पर अनियमित है, सरकार के लिए वास्तविक चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि ये अपेक्षाकृत अधिक मानवीय कार्य परिस्थितियां वास्तव में लागू हों।