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उम्मीदों की वजह से उपभोक्ता धारणाओं में तेजी बरकरार

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Last Updated- March 16, 2023 | 8:28 PM IST
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BS

इस साल जनवरी और फरवरी महीने के दौरान भारत में उपभोक्ता धारणाओं में काफी सुधार हुआ। उपभोक्ता धारणा सूचकांक (आईसीएस) जनवरी में 4.2 प्रतिशत और फरवरी में 5.1 प्रतिशत बढ़ा। नतीजतन, आईसीएस ने इस साल के पहले दो महीनों में ही 9.5 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की। इसके साथ ही इसने नवंबर और दिसंबर में उपभोक्ता धारणा सूचकांक में लगभग 2.5 प्रतिशत की गिरावट के कारण अपनी खो चुकी जमीन फिर से हासिल करने में सफलता पाई थी।

इस साल 12 मार्च तक के उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि उपभोक्ता धारणाओं में सुधार जारी है, हालांकि चालू महीने में यह सुधार थोड़ी धीमी गति का है। आईसीएस का 30 दिनों का औसत 28 फरवरी की तुलना में 12 मार्च तक 1.2 प्रतिशत अधिक था। मार्च महीने में उपभोक्ता धारणाओं के सूचकांक में थोड़ी बढ़त दिखी।

पिछले दो हफ्तों में आईसीएस में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 5 मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान आईसीएस में 3.8 प्रतिशत की गिरावट आई। इस गिरावट का एक हिस्सा फरवरी के अंत में देखा गया था और इसका कुछ हिस्सा मार्च की शुरुआत में दिखा था। लेकिन, 12 मार्च को समाप्त हुए हफ्ते के बाद आईसीएस में दिख रही गिरावट में सुधार दिखा क्योंकि इसमें 3.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं आईसीएस के साप्ताहिक अनुमान इसकी दिशा का अंदाजा देते हैं और यह उपभोक्ता धारणाओं में विभिन्न महीने में हो रहे बदलाव पर भी रोशनी डालते हैं जो काफी स्पष्ट हो सकते हैं।

हमने वर्ष 2023 के पहले 10 हफ्ते के दौरान भारतीय उपभोक्ता धारणाओं में उल्लेखनीय सुधार देखा है। 12 मार्च तक आईसीएस का 30 दिनों का औसत दिसंबर 2022 के स्तर से 9.9 प्रतिशत अधिक है। इन 10 हफ्ते में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में देश के शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता धारणा सूचकांक में सुधार अधिक स्पष्ट है।

ग्रामीण उपभोक्ताओं ने भी अपनी धारणा में सुधार दर्शाया है लेकिन इन 10 हफ्तों के दौरान शहरी उपभोक्ताओं की धारणा में अधिक सुधार दिखा है। वर्ष 2023 के पहले 10 हफ्ते के दौरान शहरी आईसीएस में 15.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी अवधि के दौरान ग्रामीण उपभोक्ता धारणा सूचकांक में अच्छी बढ़ोतरी हुई। हालांकि, इसकी वृद्धि दर, शहरी विकास दर की आधी थी। ग्रामीण आईसीएस में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

फरवरी महीने में शहरी क्षेत्र की धारणाओं में वृद्धि ने ग्रामीण धारणा को पीछे छोड़ दिया। शहरी आईसीएस में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि ग्रामीण आईसीएस में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, ग्रामीण और शहरी उपभोक्ता धारणाओं के बीच बड़ा अंतर मार्च के पहले 12 दिनों में उभरता नजर आया। शहरी क्षेत्र के लिए फरवरी के स्तर की तुलना में, 12 मार्च तक आईसीएस के 30-दिनों के औसत में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के लिए इसमें 2.1 प्रतिशत की गिरावट दिखी।

आईसीएस के फरवरी के अनुमान में और मार्च के मध्य में 30-दिनों के औसत में इसका संचयी प्रभाव, शहरी और ग्रामीण वृद्धि दरों के बीच सात प्रतिशत अंक से अधिक के अंतर के तौर पर नजर आया। हाल के दिनों में शहरी धारणाओं में सापेक्ष बढ़त आईसीएस के दो व्यापक घटकों में दिखता है और वह है वर्तमान आर्थिक स्थिति का सूचकांक (आईसीसी) और उपभोक्ता अपेक्षाओं का अग्रगामी सूचकांक (आईसीई)।

फरवरी 2023 में देश भर में आईसीसी की वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत रही। शहरी क्षेत्र के आईसीसी में जहां 3.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं ग्रामीण आईसीसी में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मार्च के पहले 12 दिनों में यह अंतर काफी बढ़ गया जब देश के शहरी क्षेत्र के लिए आईसीसी में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि ग्रामीण क्षेत्र के लिए इसमें 2.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इसका शुद्ध प्रभाव यह था कि देश भर में आईसीसी में स्थिरता थी।

12 मार्च तक 30 दिनों की औसत की तुलना, फरवरी के स्तर से करने पर भारत के शहरी क्षेत्र के लिए आईसीई में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई जबकि ग्रामीण क्षेत्र के लिए इसमें 1.7 प्रतिशत की गिरावट आई। देश भर के स्तर पर आईसीई के प्रभाव में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि दिखी जो देश के शहरी क्षेत्र की वजह से संचालित थी।

फरवरी में ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में शहरी क्षेत्र में अपेक्षाकृत बेहतर धारणाएं, उसी महीने के श्रम आंकड़ों के अनुरूप दिखीं। शहरी क्षेत्र में श्रम भागीदारी दर में वृद्धि और बेरोजगारी दर में गिरावट देखी गई। नतीजतन, रोजगार दर जनवरी में 34.3 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 35 प्रतिशत हो गई। यह अगस्त 2020 के बाद से देश के शहरी क्षेत्र में सबसे अधिक रोजगार दर है।

ग्रामीण क्षेत्र में श्रम भागीदारी दर जनवरी के 41 प्रतिशत से कम होकर फरवरी में 40.9 प्रतिशत हो गई और बेरोजगारी दर उसी महीने के 6.5 प्रतिशत से बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो गई। नतीजतन, रोजगार दर जनवरी के 38.3 प्रतिशत से कम होकर फरवरी में 38 प्रतिशत हो गई।

हम यह भी जानते हैं कि जनवरी 2022 के बाद से शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र में उपभोक्ता मुद्रास्फीति की दर लगातार अधिक बनी रही है। फरवरी 2023 में शहरी मुद्रास्फीति ग्रामीण क्षेत्र के 6.7 प्रतिशत की तुलना में कम होकर 6.1 प्रतिशत रही।

निरंतर बरकरार रहने वाली उच्च मुद्रास्फीति और देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में वृद्धि, इस क्षेत्र में उपभोक्ता धारणाओं की कम वृद्धि में योगदान दे सकती है। आने वाले हफ्ते में ग्रामीण उपभोक्ता धारणाओं के रुझान को देखना अहम हो सकता है क्योंकि पहले दो हफ्तों में, देश के ग्रामीण क्षेत्र ने मौजूदा स्थितियों और उपभोक्ताओं की अपेक्षा में गिरावट देखी है। इस बीच देश के शहरी क्षेत्र में उम्मीदें सबसे अधिक बढ़ी हैं।

(लेखक सीएमआईई प्रा लि के एमडी और सीईओ हैं)

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First Published - March 16, 2023 | 8:28 PM IST

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