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PPF Loan: पीपीएफ अकाउंट पर लोन लेने से क्यों बचें ?

अगर आप चाहते हैं कि आपको कंपाउंडिंग का ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले तब आप पीपीएफ से लोन लेने से बचें।

Last Updated- May 28, 2024 | 7:44 PM IST
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PPF Loan: पीपीएफ (PPF) यानी पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (Public Provident Fund) से लोन लेना पर्सनल लोन के मुकाबले सस्ता है। यदि आप अभी PPF अकाउंट पर लोन लेते हैं तो आपको इस लोन की राशि पर 8.1 फीसदी इंटरेस्ट (पीपीएफ में जमा धनराशि पर इंटरेस्ट + 1 फीसदी) चुकाना होगा जबकि पर्सनल लोन के मामले में इंटरेस्ट 10 फीसदी से ऊपर है। PPF पर लोन लेने के लिए कोई चीज गिरवी रखने की जरूरत भी नहीं पड़ती। लेकिन PPF से लोन लेना निवेश के दृष्टिकोण से फिर भी सही नहीं है। इसकी पहली वजह यह है कि PPF में निवेश पर आपको जो ब्याज मिलता है वह टैक्स-फ्री है, दूसरे इस ब्याज की कंपाउंडिंग होती है और तीसरे आप ज्यादा अमाउंट का लोन पीपीएफ पर नहीं ले सकते। रिपेमेंट की समय सीमा भी पीपीएफ लोन के मामले में मायने रखती है।

आइए अब विस्तार से इसे समझते हैं:

टैक्स-फ्री ब्याज

पीपीएफ में निवेश पर ट्रिपल टैक्स बेनिफिट मिलता है यानी जमा, ब्याज और निकासी तीनों पर टैक्स में छूट। इस स्कीम में जमा की गई राशि पर इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 80C के तहत डिडक्शन का फायदा मिलता है। लेकिन यह फायदा आपको सिर्फ ओल्ड टैक्स रिजीम (old tax regime) में मिलेगा।

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यदि आप टैक्स के दायरे में नहीं आते, तब तो कोई बात नहीं लेकिन अगर आते हैं तो लोन के मामले में ब्याज का टैक्स-फ्री होना मायने रखता है। उदाहरण के तौर पर अगर आप 20 फीसदी टैक्स ब्रैकेट में हैं तो आपको एक तरह से PPF पर 7.1 फीसदी के बजाय 8.52 फीसदी ब्याज मिल रहा है। वहीं अगर 30 फीसदी टैक्स ब्रैकेट में आते हैं तो समझिए आपको 7.1 फीसदी के बजाय 9.23 फीसदी का ब्याज मिल रहा है। पीपीएफ पर मौजूदा तिमाही (अप्रैल-जून 2024) के लिए ब्याज दर 7.1 फीसदी है। सरकार पीपीएफ सहित अन्य छोटी बचत योजनाओं पर हर तिमाही ब्याज दरों का निर्धारण करती है। अप्रैल 2020 के बाद से पीपीएफ पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

ब्याज की कंपाउंडिंग

पीपीएफ पर मिलने वाले ब्याज की कंपाउंडिंग भी लंबे समय तक होती है। क्योंकि 15 साल (जिस वित्त वर्ष में अकाउंट खुला है उसके 15 साल बाद) तो इस स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड ही है। इसके बाद भी 5-5 साल के ब्लॉक में इस स्कीम को आगे बढ़ाने का विकल्प आपके पास होता है। अगर आप शुरुआत के तीसरे, चौथे, पांचवें और छठे वर्ष के दौरान लोन लेते हैं तो आपको लोन ली गई राशि पर तब तक कंपाउंडिंग की सुविधा नहीं मिलेगी जब तक आप इसे चुका नहीं देते हैं। इस तरह से लंबी अवधि में आपको जो रिटर्न मिलेगा उस पर असर होगा।

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अगर आप इस स्कीम के शुरुआती वर्षों में अधिकतम सीमा यानी प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये तक का निवेश कर लेते हो तो आपको बाद के वर्षों में कंपाउंडिंग का ज्यादा फायदा मिलेगा। वहीं आपने जिस वित्त वर्ष में पीपीएफ खाता खुलवाया है, उस वित्त वर्ष की समाप्ति के एक वित्त वर्ष बाद से लेकर पांचवें वित्त वर्ष की समाप्ति तक ही आप पीपीएफ से लोन लेने के हकदार हैं। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपको कंपाउंडिंग का ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले तब आप पीपीएफ से लोन लेने से बचें। यानी शुरुआती वर्षों में निवेश से छेड़छाड़ न करें।

लोन की राशि

इस स्कीम में एक वित्त वर्ष में निवेश की अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये है। अगर आप अपने पीपीएफ अकाउंट में प्रति वर्ष अधिकतम 1.5 लाख रुपये का भी निवेश किया है तो आपको मौजूदा 7.1 फीसदी ब्याज दर के हिसाब से तीसरे, चौथे, पांचवें और छठे वित्त वर्ष के दौरान अधिकतम क्रमश: 40,136 रुपये, 83,177 रुपये, 1,29,245 रुपये और 1,78,583 रुपये बतौर लोन मिल सकता है। इतनी राशि तो तब मिलेगी जब आपने प्रति वर्ष अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश किया हो। लेकिन अगर आप इससे कम राशि निवेश करेंगे तो आपको बतौर लोन और कम धनराशि मिलेगी। मतलब साफ है अगर आपको इससे ज्यादा की रकम बतौर लोन चाहिए तो आपको अन्य विकल्प मसलन पर्सनल लोन, एफडी पर लोन, गोल्ड लोन…वगैरह पर विचार करना होगा।

लोन चुकाने की समय सीमा

जिस महीने आप PPF से लोन लेते हैं उसके 36 महीने के अंदर आपको लोन की राशि ( प्रिंसिपल अमाउंट) या तो एकमुश्त या किस्तों में चुकानी होती है। जबकि प्रिंसिपल अमाउंट चुकाने के बाद अधिकतम दो मासिक किस्तों में आप ब्याज चुका सकते हैं। वहीं पर्सनल लोन आप 6 साल तक चुका सकते हैं। अगर आप बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर लोन लेते हैं तो यहां लोन चुकाने की समय सीमा एफडी का मैच्योरिटी पीरियड है। मतलब अगर आप लोन चुकाने में ज्यादा समय लेना चाहते हैं तो आपके लिए पर्सनल लोन ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।

First Published - May 28, 2024 | 6:32 PM IST

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