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ITAT ruling: क्रिप्टोकरेंसी से होने वाले मुनाफे पर लगेगा टैक्स, माना जाएगा कैपिटल गेन

निवेशकों के लिए इस फैसले का मतलब यह है कि क्रिप्टोकरेंसी से होने वाला मुनाफा हाई इनकम टैक्स स्लैब के बजाय कैपिटल गेन टैक्स माना जाएगा।

Last Updated- December 17, 2024 | 1:33 PM IST
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क्रिप्टोकरेंसी से होने वाले मुनाफे पर देश में अब टैक्स लगेगा। जोधपुर के आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने एक ऐतिहासिक फैसले में भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स को लेकर स्पष्टता प्रदान की है।

इस निर्णय के तहत क्रिप्टोकरेंसी को कैपिटल एसेट माना जाएगा। साथ ही यह फैसला क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-फरोख्त से होने वाले मुनाफे पर टैक्स किस प्रकार लगाया जाएगा। विशेष रूप से उन ट्रांसक्शन्स के लिए जो सरकार द्वारा 2022 में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) के लिए विशिष्ट नियम पेश करने से पहले हुए थे।

निवेशकों पर इसका क्या पड़ेगा असर ?

निवेशकों के लिए इस फैसले का मतलब यह है कि क्रिप्टोकरेंसी से होने वाला मुनाफा हाई इनकम टैक्स स्लैब के बजाय कैपिटल गेन टैक्स माना जाएगा। इस फैसले से यह स्पष्ट हो जाता है कि क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन को कैपिटल गेन की केटेगरी के रूप में माना जाना चाहिए।

क्या था मामला ?

आईटीएटी जिस मामले की सुनवाई कर रहा था, उसमें एक व्यक्ति शामिल था, जिसने 2015-16 में 5.05 लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी खरीदी और 2020-21 में उन्हें 6.69 करोड़ रुपये में बेच दिया, जिससे उसे बड़ा मुनाफा हुआ।

क्योंकि व्यक्ति के पास तीन साल से अधिक समय तक क्रिप्टोकरेंसी थी, इसलिए आईटीएटी इस बात पर सहमत हुआ कि मुनाफे को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के रूप में माना जाना चाहिए। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर आमतौर पर शार्ट टर्म कैपिटल गेन की तुलना में टैक्स की दरें कम होती हैं।

इस मामले में आईटीएटी ने टैक्स ऑफिसर को निर्देश दिया कि वह उस व्यक्ति को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के लिए कानून के तहत उपलब्ध बेनिफिट्स की अनुमति दे। इसका मतलब यह हुआ कि करदाता लॉन्ग टर्म निवेश पर लागू होने वाले बेनिफिट्स या डिडक्शंस का दावा कर सकता है। इससे भुगतान किए जाना वाला टैक्स का पैसा कम हो जाएगा।

First Published - December 17, 2024 | 1:22 PM IST

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