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क्या महामारी के बाद म्यूचुअल फंड बैंक डिपॉजिट के लिए खतरा बन गए हैं?

निवेशक जोखिम लेने के लिए ज्यादा इच्छुक, रिटर्न की तलाश में

Last Updated- September 21, 2023 | 7:04 PM IST
Stock market

म्यूचुअल फंड में निवेश बैंक डिपॉजिट की तुलना में पिछले महीने तेजी से बढ़ा। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, बैंक डिपॉजिट में सालाना 12.3% की वृद्धि हुई (HDFC विलय को छोड़कर), जबकि इसी अवधि के दौरान म्यूचुअल फंड में 18.6% की वृद्धि देखी गई।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (Amfi) के आंकड़ों के अनुसार, निवेशकों ने म्यूचुअल फंड कंपनियों द्वारा पेश की गई Systematic Investment Plans (SIP) के माध्यम से अगस्त 2023 में 15,813 करोड़ रुपये की राशि लगाई।

वित्तीय वर्ष 2023 में, लोगों ने म्यूचुअल फंड में 1.8 ट्रिलियन रुपये का निवेश किया, जिसमें SIP ने इस वृद्धि को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई। ऐसा महामारी के दौरान भी हुआ था जब ब्याज दरें कम थीं। खुदरा निवेशकों और कॉर्पोरेट दोनों ने म्यूचुअल फंड योजनाओं में ज्यादा पैसा निवेश किया था।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (Amfi) के आंकड़ों के अनुसार,  म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी अब  लगभग 20% तक बढ़ गई है, जबकि महामारी शुरू होने से पहले यह 13% थी।

रिपोर्ट में कहा गया है, “स्पष्ट रूप से, निवेशक अब म्यूचुअल फंड को पसंद कर रहे हैं और रिटर्न उनकी पसंद को प्रभावित करने वाला प्राथमिक फैक्टर है।”

बाजार नियामक सेबी के आंकड़ों के मुताबिक, 2022-2023 के दौरान घरेलू फंड का एक बड़ा हिस्सा इक्विटी योजनाओं में चला गया।

जैसा कि बिजनेस स्टैंडर्ड ने पहले बताया था, वित्त वर्ष 2023 के दौरान म्यूचुअल फंड ने शेयर बाजार में कुल 1.73 ट्रिलियन रुपये का निवेश किया, जो कि म्यूचुअल फंड में शुद्ध घरेलू (household) निवेश का 97% था।

मार्च 2020 से मार्च 2023 तक, भारत में शेयर बाजार का सूचकांक सेंसेक्स लगभग 30,000 से बढ़कर 58,992 हो गया, जो लगभग 26% की वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है। अगस्त तक सेंसेक्स 64,831 पर था।

डेट इंस्ट्रूमेंट, विशेष रूप से कॉर्पोरेट बांड, बैंक डिपॉजिट की तुलना में बेहतर रिटर्न प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें  लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स लाभ भी मिलता है।

म्यूचुअल फंड के AUM और बैंकों में डिपॉजिट राशि में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी कैसे बढ़ी है?

बैंक ऑफ इंडिया ने वर्ष 2019-20 को शुरुआती साल के रूप में इस्तेमाल किया। उसके बाद, फाइनेंशियल लैंडस्केप में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया क्योंकि ब्याज दरें बहुत कम रहीं। अगले तीन सालों के दौरान, म्यूचुअल फंड के प्रबंधन के तहत संपत्ति (AUM) में पर्याप्त वृद्धि हुई। AUM 24.8% की औसत वार्षिक दर से बढ़ा, जो उस अवधि में 20.26 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 39.42 लाख करोड़ रुपये हो गया।

दूसरी ओर, बैंक डिपॉजिट में वृद्धि केवल 10% थी। वित्त वर्ष 2020 में बैंक डिपॉजिट 135.67 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 23 में 180.44 लाख करोड़ रुपये हो गया।

संयुक्त बकाया राशि में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी में वृद्धि हुई जैसा कि नीचे दिए गए चार्ट में दिखाया गया है

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FY24 में अब तक क्या है तस्वीर?

नीचे दिया गया चार्ट अगस्त 2022 की तुलना में अगस्त 2023 के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश की विभिन्न कैटेगरी में वृद्धि बताता है।

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इस दौरान बैंक डिपॉजिट में ग्रोथ 12.3 फीसदी रही।

दिलचस्प बात यह है कि म्यूचुअल फंड योजनाओं में सबसे ज्यादा वृद्धि दर इक्विटी और ‘अन्य’ श्रेणी में थी।

रिपोर्ट में बताया गया है, “इससे पता चलता है कि निवेशक जोखिम लेने के लिए ज्यादा इच्छुक हो गए हैं। उन्होंने बेहतर रिटर्न पाने की उम्मीद में ग्रोथ केंद्रित स्कीम के साथ-साथ स्टॉक सूचकांकों और ईटीएफ में निवेश करना चुना है। यह बदलाव इसलिए हुआ है क्योंकि मुद्रास्फीति ऊंची रही है, 2022-23 तक तीन वर्षों में कीमतों में कुल 18.3% की वृद्धि हुई है।”

ऋण निवेश में प्रबंधित धन की मात्रा में वृद्धि इस वर्ष सबसे कम, केवल 7.4% थी।

म्यूचुअल फंड द्वारा उपयोग की जाने वाली निवेश योजनाओं में भी बदलाव आया है।

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ऋण और इनकम निवेश योजनाएं कम लोकप्रिय हो गई हैं, संभवतः इसलिए क्योंकि बैंकों ने हाई डिपॉजिट दरों की ऑफरिंग शुरू कर दी है, जिससे रिटर्न में अंतर कम हो गया है।

इन योजनाओं के आकर्षक न होने का एक अन्य कारण ऋण योजनाओं में दीर्घकालिक निवेश पर टैक्स लाभ को हटाने का सरकार का निर्णय है।

ऋण और इनकम स्कीम की लोकप्रियता में कमी इक्विटी योजनाओं और अन्य कैटेगरी में भी देखी गई।

बैंक ऑफ बड़ौदा के आर्थिक रिसर्च विभाग ने कहा, समय के साथ, लोगों द्वारा डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में अपना पैसा निवेश करने के तरीके में बदलाव आया है। इस बदलाव में COVID-19 महामारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, क्योंकि निवेशक हालातों से प्रेरित होकर म्यूचुअल फंड के माध्यम से जोखिम लेने के लिए ज्यादा इच्छुक हो गए। इसके अतिरिक्त, जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था ठीक होने लगी और भारत की विकास संभावनाएं बेहतर हुईं, शेयर बाजारों ने अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे ज्यादा रिटर्न मिला। परिणामस्वरूप, अब ज्यादा लोग शेयर बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों को चुनने के इच्छुक हैं।

म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक बड़ा लाभ प्रदान करते हैं क्योंकि वे व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के अनुरूप विभिन्न प्रकार के निवेश विकल्प प्रदान करते हैं। यदि आप अपने निवेश को लेकर बहुत रूढ़िवादी नहीं हैं, तो आप हाइब्रिड योजनाएं चुन सकते हैं। दूसरी ओर, यदि आप ज्यादा जोखिम लेने में सहज हैं, तो ऐसे इंडेक्स फंड और ईटीएफ हैं जो ज्यादा आक्रामक निवेश का अवसर प्रदान करते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये सभी निवेश विकल्प किसी न किसी तरह से शेयर बाजार से जुड़े हुए हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक निश्चित स्तर के जोखिम के साथ आते हैं।

First Published - September 21, 2023 | 6:54 PM IST

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