facebookmetapixel
उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें एथनॉल, बायोगैस और विमानन ईंधन उत्पादन में आगे₹1,550 तक का टारगेट! PSU stock समेत इन दो शेयरों पर BUY की सलाहRBI MPC की नजर आर्थिक आंकड़ों पर, ब्याज दर में आगे की रणनीति पर फैसलाAdani Green के Q3 रिजल्ट की तारीख-समय तय, जानें बोर्ड मीटिंग और निवेशक कॉल की पूरी डिटेलStock Market Today: एशियाई बाजार में तेजी, GIFT Nifty हरा; जानें कैसी होगी शेयर बाजार की शुरुआतTata Technologies Q3 रिजल्ट 2026: तारीख आ गई, इस दिन आएंगे तिमाही नतीजे2026 में भारतीय बैंकिंग पर आशावादी नजर, विदेशी निवेश और ऋण वृद्धि के संकेत2025 में म्युचुअल फंडों ने तोड़ा रिकॉर्ड, शुद्ध इक्विटी खरीद 4.9 लाख करोड़ तक पहुंचीभू-राजनीतिक चिंताओं के बीच आज रुपया और बॉन्ड खुल सकते हैं कमजोरDMart के शेयरों पर निगाह: पुराने स्टोर और प्रतिस्पर्धा से रेवेन्यू पर असर

वेतन सीमा दोगुनी कर सकता है EPFO, 1 जनवरी 2025 से केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली लागू

वेतन सीमा का मतलब यह है कि ईपीएफओ या ईएसआईसी के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठान में कार्यरत कर्मचारी के लिए उस सीमा तक मासिक योगदान करना अनिवार्य है।

Last Updated- December 01, 2024 | 9:40 PM IST
EPFO did not give the claim, how to fix it; Know the complete process EPFO ने नहीं दिया क्लेम, कैसे करें इसे ठीक; जानें पूरा प्रोसेस

अ​​धिक से अ​धिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए सरकार कर्मचारी भविष्य नि​धि (ईपीएफ) के तहत मासिक वेतन सीमा दोगुनी यानी 30,000 रुपये कर सकती है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के अंतर्गत वेतन सीमा भी इतनी ही की जा सकती है।

कर्मचारी भविष्य नि​धि संगठन (ईपीएफओ) का शीर्ष निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बीते शनिवार को हुई बैठक में इन दोनों मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय न्यासी बोर्ड के एक सदस्य ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘दोनों योजनाओं के तहत मासिक वेतन सीमा बढ़ाकर 30,000 रुपये की जा सकती है। इस बारे में सकारात्मक चर्चा हुई और बोर्ड के अ​धिकतर सदस्य और श्रम मंत्रालय वेतन सीमा को दोगुना करने के पक्ष में हैं। इस संबंध में फरवरी में प्रस्तावित सीबीटी की बैठक में अंतिम निर्णय किए जाने की उम्मीद है।’

वेतन सीमा का मतलब यह है कि ईपीएफओ या ईएसआईसी के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठान में कार्यरत कर्मचारी के लिए उस सीमा तक मासिक योगदान करना अनिवार्य है। फिलहाल ईपीएफओ के तहत मासिक वेतन सीमा 15,000 रुपये है और ईएसआईसी के तहत यह 21,000 रुपये प्रति माह निर्धारित है। मौजूदा नियमों के अनुसार 15,000 रुपये से अधिक कमाने वाले कर्मचारियों के पास ईपीएफ कवरेज से बाहर निकलने और योगदान न करने का विकल्प है। ईपीएफओ के लिए अंतिम बार 2014 में वेतन सीमा बढ़ाई गई थी।

सीबीटी और सीटू के सदस्य आर करुमालयन ने कहा, ‘कई राज्यों में सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम वेतन मौजूदा ईपीएफ सीमा से अधिक है। ऐसे में ईपीएफ के तहत वेतन सीमा भी बढ़ना चाहिए। इससे ईपीएफ के दायरे में ज्यादा कर्मचारी आएंगे। वित्त समिति इस पर अंतिम निर्णय लेगी।’

ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर के राष्ट्रीय महासचिव और सीबीटी के सदस्य एसपी तिवारी ने कहा कि बोर्ड ने लोगों को भी सामाजिक सुरक्षा संगठन के दायरे में लाने पर विचार-विमर्श किया जिनका वेतन अनिवार्य न्यूनतम वेतन सीमा से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि ईपीएफओ इन लोगों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने या कम से कम निर्धारित वेतन सीमा तक अपने हिस्से का योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करेगा। साथ ही ज्यादा पेंशन मुद्दे को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर भी चर्चा हुई और कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों की चिंता पर ध्यान दिया गया। मंत्रालय जल्द ही इस संबंध में दिशानिर्देश जारी कर सकता है।

बैठक में केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली को केंद्रीय बोर्ड ने अंतिम मंजूरी दे दी। इससे पेंशनभोगी अपनी सुविधा के अनुसार देश भर में किसी भी बैंक की कोई भी शाखा में अपना पेंशन प्राप्त कर सकते हैं। केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली 1 जनवरी, 2025 से लागू होगी। वर्तमान में देश में 21 जगहों पर इसे प्रयोगिक तौर पर शुरू किया गया है।

इसके साथ ही बोर्ड ने ईपीएफ योजना, 1952 के पैराग्राफ 60(2)(बी) में संशोधन को भी मंजूरी दे दी। इसके लागू होने से ईपीएफ सदस्यों को निपटान की तारीख तक के ब्याज का पूरा भुगतान किया जाएगा। फिलहाल महीने की 24 तारीख तक दावे का निपटान होने की स्थिति में पिछले महीने तक के ब्याज का ही भुगतान होता था।

First Published - December 1, 2024 | 9:40 PM IST

संबंधित पोस्ट