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भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच आज रुपया और बॉन्ड खुल सकते हैं कमजोर

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वैश्विक अनिश्चितता, डॉलर की मजबूत मांग और बॉन्ड आपूर्ति के दबाव से रुपये की शुरुआत कमजोर और सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी की संभावना है।

Last Updated- January 05, 2026 | 7:35 AM IST
rupees dollar
Representative Image

घरेलू बाजार में डॉलर की लगातार बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण सोमवार को रुपये की कमजोर शुरुआत हो सकती है। डीलरों ने यह अनुमान जताया है। शॉर्ट पोजीशन अभी भी ऊंची बनी हुई हैं क्योंकि पिछले सत्र में थोड़ी बिकवाली के बाद भी कारोबारी डॉलर की खरीदारी जारी रखे हुए हैं। वेनेजुएला से भारत के तेल आयात में संभावित रुकावटों समेत अन्य वैश्विक घटनाक्रम को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। बाजार के जानकारों का अनुमान है कि डॉलर के मुकाबले मुद्रा का भाव 90 से 90.50 प्रति डॉलर के बीच रह सकता है।  शुक्रवार को स्थानीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 90.21 पर बंद हुई थी।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, शुक्रवार को हुई संक्षिप्त बिकवाली को छोड़ दें तो शॉर्ट पोजीशन की अधिकता और घरेलू निवेशकों की निरंतर डॉलर खरीदारी के कारण रुपया कमजोर दिख रहा है। भारत के लिए मौजूदा संकट के संभावित परिणामों, विशेष रूप से वेनेजुएला से तेल आयात में कमी के जोखिम को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार की भावना को प्रभावित कर सकती है।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, रुपये के फॉरवर्ड मार्केट में केंद्रीय बैंक की बकाया नेट शॉर्ट डॉलर पोजीशन नवंबर के अंत तक बढ़कर 66.04 अरब डॉलर पर पहुंच गईं, जबकि अक्टूबर के अंत तक यह 63.6 अरब डॉलर थी।

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2025 में स्थानीय मुद्रा में 4.74 फीसदी की गिरावट आई और यह एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बनकर उभरी। यह कमजोरी अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता, अमेरिका और जापान जैसे विकसित बाजारों में लगातार उच्च ब्याज दरें (कैरी ट्रेड पूंजी के प्रमुख स्रोत) और विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर निवेश निकासी के कारण ई, क्योंकि वैश्विक पूंजी ज्यादा प्रतिफल वाले बाजारों की ओर जा रही थी।

इस बीच, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने राज्य विकास ऋणों (एसडीएल) के माध्यम से 4.99 लाख करोड़ रुपये तक जुटाने की योजनाओं की घोषणा की है जिससे जनवरी-मार्च तिमाही में बॉन्ड बाजार में आपूर्ति का दबाव फिर से बढ़ने की आशंका है और इस कारण ब्याज दरें ऊंची बनी रह सकती हैं। स्प्रेड भी व्यापक रहेगा। बाजार के जानकारों का कहना है कि अनुमानित 40,000 करोड़ रुपये से 50,000 करोड़ रुपये की भारी साप्ताहिक आपूर्ति ऐसे समय हो रही है, जब ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हैं, जिससे मांग सीमित हो रही है। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक के ओपन मार्केट ऑपरेशंस से समय-समय पर मिलने वाले समर्थन के बावजूद एसडीएल और सरकारी बॉन्ड की ब्याज दरों में निकट भविष्य में तेजी की संभावना है।

सोमवार को बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड 3 से 4 आधार अंक ज्यादा रहने की उम्मीद है। शुक्रवार को इसका स्तर 6.60 फीसदी रहा। एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, तात्कालिक असर यह हो सकता है कि सोमवार को बेंचमार्क बॉन्ड पर यील्ड 3 से 4 आधार अंक तक बढ़ जाए क्योंकि उधार उम्मीद से ज्यादा है।

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First Published - January 5, 2026 | 7:35 AM IST

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