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इनकम टैक्स रिटर्न का ई वेरिफिकेशन सिर्फ 5 मिनट में! आधार, EVC और नेट बैंकिंग की मदद से आसानी से होगा काम

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टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद 30 दिनों के भीतर वेरिफिकेशन पूरा करना होता है, ताकि रिटर्न मान्य रहे और प्रोसेसिंग में कोई रुकावट न आए।

Last Updated- July 18, 2025 | 3:44 PM IST
Income Tax Return
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: Freepik

ITR Filing 2025: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना आज के डिजिटल भारत में पहले से कहीं आसान हो गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल रिटर्न फाइल करना ही काफी नहीं है? असल में, टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया तभी पूरी मानी जाती है, जब आप उसका वेरिफिकेशन कर लें और वो भी 30 दिनों के भीतर। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपकी सारी मेहनत बेकार हो सकती है। बिना वेरिफिकेशन के ITR को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट मान्य ही नहीं मानता।

यहीं पर आता है ई-वेरिफिकेशन, यानी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से रिटर्न की पुष्टि करने का स्मार्ट तरीका। न कोई डॉक्यूमेंट, न ऑफिस की लंबी लाइन, सिर्फ कुछ क्लिक और कुछ सेकंड में यह काम हो जाता है। चाहे आधार OTP के जरिए हो, नेट बैंकिंग से, या फिर मोबाइल पर आए EVC कोड से विकल्प आपके हाथ में हैं।

ई वेरिफिकेशन क्या है और क्यों जरूरी है?

ई वेरिफिकेशन वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए आप फाइल किए गए इनकम टैक्स रिटर्न को ऑनलाइन वेरिफाई कर सकते हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नियमों के मुताबिक, रिटर्न फाइल करने के बाद उसे 30 दिनों के भीतर वेरिफाई करना जरूरी है। पहले यह समय सीमा 120 दिन थी, लेकिन 1 अगस्त 2022 से नया नियम लागू हो गया है, जिसके तहत अब केवल 30 दिन का समय मिलता है। अगर आप इस समय सीमा में वेरिफिकेशन नहीं करते, तो आपका रिटर्न अमान्य माना जाता है। इसका मतलब है कि आपने रिटर्न दाखिल ही नहीं किया। ई वेरिफिकेशन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह तुरंत हो जाता है और किसी भी तरह के पेपर डॉक्यूमेंट्स की जरूरत नहीं पड़ती। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है।

Also Read: ITR फाइल करने से पहले जानें ये 5 स्मार्ट टैक्स सेविंग स्कीम, जिसमें निवेश कर आप बचा सकते हैं मोटा पैसा

ई वेरिफिकेशन के अलग-अलग तरीके

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ई वेरिफिकेशन के लिए कई सुविधाजनक तरीका देता है, ताकि टैक्सपेयर्स अपनी सुविधा के अनुसार वेरिफिकेशन कर सकें। इसमें सबसे पहला तरीका है आधार OTP के जरिए वेरिफिकेशन। इसके लिए आपका आधार नंबर आपके पैन कार्ड से लिंक होना चाहिए। जब आप ई-फाइलिंग पोर्टल पर आधार OTP का विकल्प चुनते हैं, तो आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक OTP भेजा जाता है। इस OTP को 15 मिनट के भीतर दर्ज करके आप वेरिफिकेशन पूरा कर सकते हैं। दूसरा तरीका है नेट बैंकिंग के जरिए। आप अपने बैंक के नेट बैंकिंग अकाउंट में लॉगिन करके ई वेरिफिकेशन कर सकते हैं। इसके लिए आपका पैन नंबर बैंक अकाउंट से जुड़ा होना चाहिए।

तीसरा तरीका है इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) का उपयोग। यह कोड आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और Email ID पर भेजा जाता है। इसके अलावा, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, खासकर उन मामलों में जहां ऑडिट जरूरी हो। इन सभी तरीकों से वेरिफिकेशन तुरंत हो जाता है और आपको एक ट्रांजैक्शन ID मिलती है, जिसे भविष्य के लिए संभालकर रखना चाहिए।

ई वेरिफिकेशन की प्रक्रिया

ई वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को समझना और करना बेहद आसान है। सबसे पहले आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाना होगा। वहां लॉगिन करने के बाद ‘ई-फाइल’ टैब पर क्लिक करें और फिर ‘इनकम टैक्स रिटर्न’ चुनें। इसके बाद ‘ई-वेरिफाई रिटर्न’ का विकल्प चुनें। यहां आपको अपना पैन नंबर, असेसमेंट ईयर (AY) और रिटर्न का एकनॉलेजमेंट नंबर डालना होगा। इसके बाद आपके सामने कई वेरिफिकेशन विकल्प आएंगे, जैसे आधार OTP, नेट बैंकिंग या EVC। अपनी सुविधा के अनुसार एक विकल्प चुनें। उदाहरण के लिए, अगर आप आधार OTP चुनते हैं, तो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। इसे दर्ज करने के बाद ‘सबमिट’ करें।

वेरिफिकेशन पूरा होने पर स्क्रीन पर एक मैसेज और ट्रांजैक्शन ID दिखाई देगी। साथ ही, आपके रजिस्टर्ड Email पर भी इसकी पुष्टि भेजी जाएगी। अगर आपने समय सीमा यानी 30 दिन पार कर लिए हैं, तो आपको कंडोनेशन ऑफ डिले रिक्वेस्ट दाखिल करनी होगी, जिसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की मंजूरी के बाद ही वेरिफिकेशन माना जाएगा।

इस प्रक्रिया में न केवल समय बचता है, बल्कि कागजी झंझट से भी छुटकारा मिलता है। टैक्सपेयर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके पास रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और Email ID अपडेट हों, ताकि वेरिफिकेशन में कोई परेशानी न आए।

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First Published - July 18, 2025 | 3:44 PM IST

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