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SBI MF का आईपीओ जल्द, 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यूएशन की उम्मीद

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एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की शेयर बिक्री के जरिये स्टेट बैंक और संयुक्त उपक्रम साझेदार फ्रांसीसी कंपनी अमुंडी की भारतीय इकाई कुल 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगे

Last Updated- November 06, 2025 | 10:09 PM IST
State Bank of India

शीर्ष ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने आज कहा कि वह अगले साल आने वाले एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट (एसबीआई एफएम) के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचेगा। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की शेयर बिक्री के जरिये स्टेट बैंक और संयुक्त उपक्रम साझेदार फ्रांसीसी कंपनी अमुंडी की भारतीय इकाई कुल 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगे।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में भारतीय स्टेट बैंक ने 6.3 फीसदी और अमुंडी इंडिया हो​ल्डिंग ने 3.7 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय किया है। हालांकि यह नियामक की मंजूरी पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस कंपनी में स्टेट बैंक की 61.91 फीसदी और अमुंडी की 36.36 फीसदी हिस्सेदारी है।

स्टेट बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट को 2026 की पहली छमाही में सूचीबद्ध कराने का लक्ष्य है। कंपनी के प्रवर्तक 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के मूल्यांकन की संभावना देख रहे हैं। प्रवर्तकों को आईपीओ के जरिये 11,000 से 13,000 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। यह कदम वित्त मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण करने के अनुरूप है। हाल ही में केनरा बैंक की म्युचुअल फंड और बीमा सहायक कंपनियों ने आईपीओ के ज़रिये पूंजी बाजार में कदम रखा है।

यह दूसरा मौका है जब स्टेट बैंक ने एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट को सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके पहले वर्ष 2021 में बैंक ने 6 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की अपनी योजना की घोषणा की थी। मगर बाद में इसे स्थगित कर दिया गया था।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट म्युचुअल फंड (एमएफ) योजनाओं और वैकल्पिक साधनों के माध्यम से 28.3 लाख करोड़ रुपये का प्रबंधन करती है। 12 लाख करोड़ रुपये की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) के साथ एसबीआई एमएफ भारत का सबसे बड़ा म्युचुअल फंड है। एमएफ उद्योग के कुल एयूएम में एसबीआई एमएफ की हिस्सेदारी 16 फीसदी है।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, म्युचुअल फंड कारोबार वाली सूचीबद्ध सातवीं ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी बन सकती है। फिलहाल एचडीएफसी, निप्पॉन लाइफ इंडिया, आदित्य बिड़ला सन लाइफ, यूटीआई और केनरा रोबेको 5 सूचीबद्ध एएमसी हैं।

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के जल्द ही सूचीबद्ध होने की उम्मीद है क्योंकि उसके 10,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए नियामक से मंजूरी मिल गई है। सूचीबद्ध एएमसी में एचडीएफसी एएमसी का बाजार पूंजीकरण (एमकैप) सबसे ज्यादा 1.2 लाख करोड़ रुपये है। निप्पॉन लाइफ का एमकैप 55,000 करोड़ रुपये है।

गैर-सूचीबद्ध शेयरों में लेनदेन पर नजर रखने वाली वेबसाइटों ने एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का एमकैप 1.3 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है। भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी ने कहा कि बैंक ने उद्योग में अपनी अग्रणी स्थिति और वर्षों के निरंतर प्रदर्शन को देखते हुए सहायक कंपनी को सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया है।

भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी ने कहा, ‘एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के लगातार मजबूत प्रदर्शन और वर्षों से बाजार में अग्रणी स्थिति को देखते हुए आईपीओ प्रक्रिया शुरू करने का यह उपयुक्त समय माना जा रहा है। मौजूदा हितधारकों के लिए मूल्य प्राप्ति को अधिकतम करने के अलावा यह आईपीओ आम शेयरधारकों के लिए अवसर पैदा करेगा, बाजार में भागीदारी को व्यापक बनाएगा और संभावित निवेशकों के व्यापक समूह में उत्पादों के बारे में जागरूकता बढ़ाएगा।’

एसबीआई कार्ड्स ऐंड पेमेंट सर्विसेज और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के बाद एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध होने वाली एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट स्टेट बैंक की तीसरी सहायक कंपनी होगी। बैंक एसबीआई जनरल इंश्योरेंस को भी सूचीबद्ध करने पर विचार कर रहा है। स्टेट बैंक के एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘एसबीआई जनरल इंश्योरेंस का आईपीओ अगला कदम है। बैंक चाहता है कि यह कंपनी सामान्य बीमा क्षेत्र की शीर्ष तीन कंपनियों में शामिल हो।’

भारत में परिसंपत्ति प्रबंधन उद्योग, विशेष रूप से म्युचुअल फंड क्षेत्र ने हाल के वर्षों में मजबूत वृद्धि देखी है क्योंकि शेयर बाजार में निरंतर तेजी के बीच निवेशक आधार भी बढ़ा है। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के माध्यम से मासिक निवेश बढ़कर लगभग 30,000 करोड़ रुपये हो गया है जबकि कोविड-पूर्व अवधि में यह केवल 8,000 करोड़ रुपये था।

पिछले 3-4 वर्षों में निवेशकों में बढ़ती जागरूकता और भविष्य के विकास की संभावनाओं ने म्युचुअल फंड उद्योग में निवेश और नए भागीदारों को आकर्षित किया है। पिछले दो वर्षों में 8 नए लाइसेंस जारी किए गए हैं और इस साल म्युचुअल फंड कंपनियों की संख्या 50 पार कर गई है। हाल के समय में अमेरिका की ब्लैकरॉक, हॉन्ग कॉन्ग स्थित पीएजी और दक्षिण अफ्रीका की सैनलैम जैसी विदेशी परिसंपत्ति प्रबंधक ने संयुक्त उद्यमों और मौजूदा फंड हाउसों में निवेश के माध्यम से इस क्षेत्र में प्रवेश किया है।

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First Published - November 6, 2025 | 10:05 PM IST

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