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NSE की कंपनियों में FPIs की हिस्सेदारी 13 साल के निचले स्तर पर, DIIs और म्युचुअल फंड बने बाजार के नए दिग्गज

सितंबर 2025 तक एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की हिस्सेदारी बढ़कर 18.26 प्रतिशत हो गई

Last Updated- November 06, 2025 | 9:52 PM IST
NSE

प्राइम डेटाबेस के जुटाए आंकड़ों से जाहिर होता है कि सितंबर 2025 तक एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की हिस्सेदारी बढ़कर 18.26 प्रतिशत हो गई। इसके विपरीत जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान 76,619 करोड़ रुपये की निकासी के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की हिस्सेदारी 13 साल के निचले स्तर 16.71 प्रतिशत पर रह गई। मार्च 2025 की तिमाही में पहली बार डीआईआई ने एफपीआई को पीछे छोड़ दिया था।

घरेलू संस्थानों में म्युचुअल फंडों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है और उनका स्वामित्व लगातार नौवीं तिमाही में बढ़कर 10.93 प्रतिशत के सर्वा​​धिक ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। सितंबर तिमाही के दौरान म्युचुअल फंडों ने शेयरों में 1.64 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया। कुल मिलाकर डीआईआई का निवेश 2.2 लाख करोड़ रुपये रहा।

जून तिमाही में खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 7.53 प्रतिशत से घटकर 7.43 प्रतिशत रह गई। इसकी वजह उनकी 9,562 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली रही। इस बीच, एचएनआई यानी अमीर निवेशकों की हिस्सेदारी 2.05 प्रतिशत से बढ़कर 2.09 प्रतिशत हो गई।

प्राइम डेटाबेस ग्रुप के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा, ‘एफपीआई पारंपरिक रूप से भारतीय बाजार में सबसे बड़े गैर-प्रवर्तक शेयरधारक श्रेणी रहे हैं और उनके निवेश निर्णय बाजार की समग्र दिशा को अच्छे-खासे प्रभावित करते रहे हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है। खुदरा और एचएनआई निवेशकों के साथ-साथ डीआईआई भी अब एक मजबूत जवाबी भूमिका निभा रहे हैं और सितंबर 2025 तक उनकी संयुक्त हिस्सेदारी 27.78 प्रतिशत के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाएगी।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि एफपीआई एक महत्त्वपूर्ण घटक बने हुए हैं, लेकिन भारतीय पूंजी बाजार पर उनकी पकड़ कम हुई है।’

लगातार तीन तिमाहियों की गिरावट के बाद निजी कंपनियों में प्रमोटरों की हिस्सेदारी जून के 40.58 प्रतिशत से सितंबर 2025 में बढ़कर 40.7 प्रतिशत हो गई, जबकि शुद्ध बिक्री 24,055 करोड़ रुपये रही। पिछले चार वर्षों में, प्रमोटरों की हिस्सेदारी दिसंबर 2021 के 45.16 प्रतिशत से 446 आधार अंक कम हुई है।

First Published - November 6, 2025 | 9:49 PM IST

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