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EPF नियमों पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: विदेशी कर्मचारियों को भी देना होगा योगदान

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कोर्ट ने स्पाइसजेट और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को अपने अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों के लिए प्रोविडेंट फंड और अन्य बकाया राशियां चुकाने के लिए ईपीएफओ के नोटिस को बरकरार रखा

Last Updated- November 05, 2025 | 4:07 PM IST
EPFO

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार के उन नियमों को बरकरार रखा, जिनके तहत अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों (international workers) को कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में योगदान देना अनिवार्य है, भले ही उनकी मंथली इनकम ₹15,000 से कम हो। वहीं, भारतीय कर्मचारियों को केवल तब योगदान देना होता है जब उनकी मंथली इनकम ₹15,000 से ज्यादा हो।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की बेंच ने यह फैसला स्पाइसजेट (SpiceJet) और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (LG Electronics India) द्वारा दायर याचिका पर सुनाया। इन कंपनियों ने 2008 और 2010 में जारी सरकारी अधिसूचनाओं को चुनौती दी थी, जिनमें कहा गया था कि भारत में काम करने वाले विदेशी कर्मचारी और विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी — दोनों ही प्रोविडेंट फंड सिस्टम के तहत शामिल किए जाएंगे।

EPF में बदलाव अनुचित थे – स्पाइसजेट

स्पाइसजेट ने दलील दी कि विदेशी और भारतीय कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार करना अनुचित, भेदभावपूर्ण और सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। एयरलाइन का कहना था कि कानून में भारतीय और विदेशी कर्मचारियों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया गया है, लेकिन सरकारी नोटिफिकेशन ने ऐसा अंतर पैदा कर दिया, जो राष्ट्रीयता (nationality) के आधार पर भेदभाव के समान है और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

हालांकि अदालत ने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) अधिनियम के तहत सरकार को अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों तक यह योजना बढ़ाने का पूरा अधिकार है। सरकार की ओर से पेश वकील ने नियम का बचाव करते हुए कहा कि यह अंतर उचित है। उन्होंने बताया कि अगर सभी भारतीय कर्मचारियों को उनकी आय चाहे जो भी हो, प्रोविडेंट फंड में योगदान करने के लिए बाध्य किया जाए, तो इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

बकाया चुकाए कंपनियां

हालांकि यह बोझ ज्यादातर विदेशी कर्मचारियों पर लागू नहीं होता, क्योंकि वे आमतौर पर भारत में केवल दो से पांच साल की छोटी अवधि के लिए काम करते हैं। अदालत का यह ताजा फैसला उन विदेशी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा झटका है, जो भारत में अल्पकालिक नौकरियों के लिए आते हैं।

कंपनियों ने यह भी मांग की थी कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा भेजे गए मांग नोटिस रद्द किए जाएं। लेकिन अदालत ने कहा कि सरकार की अधिसूचनाएं कानूनी रूप से और उचित प्रक्रिया के तहत जारी की गई थीं। इसलिए हाईकोर्ट ने स्पाइसजेट और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को अपने अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों के लिए प्रोविडेंट फंड और अन्य बकाया राशियां चुकाने के लिए ईपीएफओ के नोटिस को बरकरार रखा।

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इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट के रुख के अनुरूप है, जबकि कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस मामले में अलग राय दी है। इन विरोधाभासी फैसलों के कारण अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में अंतिम निर्णय के लिए पहुंचने की संभावना है।

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First Published - November 5, 2025 | 3:48 PM IST

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