सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा रेलवे मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में राष्ट्रीय औसत पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) से अधिक खर्च किया है। दोनों ने क्रमशः बजटीय अनुमान का 63% और 57% खर्च किया है। कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर FY2025-26 के दौरान कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर बजटीय अनुमान का 52% रहा।
कैपेक्स में उछाल का एक बड़ा हिस्सा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग को जारी किए गए 50,000 करोड़ रुपये से जुड़ा है। जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इस विभाग का बजटीय अलॉटमेंट सिर्फ 20 करोड़ रुपये था। इस असाधारण राशि को छोड़ दिया जाए तो, सरकार का कुल पूंजीगत व्यय वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में बजटीय अनुमान के 47.3% पर रही।
वहीं, 3000 करोड़ रुपये या उससे अधिक अलॉटमेंट वाले मंत्रालयों के विश्लेषण से पता चला कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और आर्थिक मामलों का विभाग अपने आवंटन का केवल 2% ही खर्च कर पाए हैं। सीजीए के आंकड़ों के अनुसार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने 20,096 करोड़ रुपये के अपने कैपिटल अलॉटमेंट में से कोई भी राशि उपयोग नहीं की।
अप्रैल-सितंबर वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 40% बढ़कर 5.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो कि 6.6% की बजटीय वृद्धि के अनुमान से कहीं अधिक है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ”सरकार अब तक पूंजीगत व्यय में मुख्य भूमिका निभा रही थी, लेकिन जीएसटी संग्रह में कमी से राजस्व पर दबाव आने के कारण अब वे सतर्कता बरत सकती हैं। हालांकि, उपभोक्ता भावना में सुधार के साथ निजी क्षेत्र के निवेश में भी तेजी देखने को मिलेगी।” उन्होंने कहा कि सरकार अपने कुल कैपेक्स लक्ष्य को प्राप्त कर लेगी, लेकिन उससे अधिक खर्च की गुंजाइश सीमित है।
विशेषज्ञों ने बताया कि पूंजीगत व्यय में वृद्धि के साथ राजस्व व्यय में तेज गिरावट देखी गई है। मोतिलाल ओसवाल के विश्लेषण के अनुसार, अप्रैल–सितंबर FY26 में राजस्व खर्च 17.2 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025-26 के बजटीय अनुमान का 44% है। यह कम से कम पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ”हमारा मानना है कि रक्षा खर्च में वृद्धि के बावजूद राजकोषीय घाटा नियंत्रण में रहेगा। हालांकि राजस्व प्राप्तियों में सुस्ती के कारण 10 बेसिस प्वाइंट की फिसलन का जोखिम है, लेकिन सकारात्मक पक्ष यह है कि राजस्व व्यय अभी पूरी तरह नहीं बढ़ा है।”
नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से विचलन रोकने के लिए वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कैपेक्स में लगभग 15% की कटौती करनी होगी। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार लक्ष्य के भीतर रह पाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कैपेक्स विवेकाधीन खर्च होता है और आवश्यकता पड़ने पर इसे समायोजित किया जा सकता है। इससे 4.4% के राजकोषीय घाटा लक्ष्य को बनाए रखना संभव होगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को दोहराया कि सरकार को FY2025-26 में 4.4% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने का भरोसा है, और इसके बाद अगले वित्त वर्ष से ऋण-से-जीडीपी रेश्यो घटाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।