facebookmetapixel
Share Market: शेयर बाजार में जोरदार तेजी, निफ्टी रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा; सेंसेक्स 573 अंक चढ़ाUpcoming NFO: नया साल, नया जोश; जनवरी में 12 नए फंड होंगे लॉन्च, ₹100 से निवेश शुरूसरकार एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर GST 5% करने की तैयारी में, GST काउंसिल जल्द ले सकती है फैसलास्मोकिंग करने वाले दें ध्यान! 1 फरवरी से महंगी होगी सिगरेट, जानें अब कितना ज्यादा पैसा देना होगामुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की तारीख तय! रूट, स्पीड जान लीजिएनए साल में मनी मैनेजमेंट के 6 दमदार टिप्स, जेब में हमेशा रहेंगे पैसेMarket This Week: सेंसेक्स-निफ्टी 1% चढ़े, निवेशकों की वेल्थ ₹6 लाख करोड़ बढ़ी; ऑटो-मेटल स्टॉक्स चमकेITC Share Price: दो दिन में 15% लुढ़का, अब ब्रोकरेज ने किया डाउनग्रेड; आगे क्या करें निवेशक ?8th Pay Commission, EPF, टैक्स से लेकर बैंकिंग तक: 2026 में आपके लिए क्या-क्या बदलने वाला है?Mirae Asset की पैसा 4 गुना करने वाली स्कीम, मंथली ₹10,000 की SIP से 10 साल में बना ₹30 लाख का फंड

आंधी के लिए तनी छतरी

Last Updated- December 07, 2022 | 11:02 PM IST

वॉल स्ट्रीट से चली मंदी की आंधी से ढहते बाजार और उद्योग जगत को बचाने के लिए अब सरकार मैदान में कूद पड़ी है।


इसके तहत जहां एक ओर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सोमवार को नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 50 आधार अंकों की कटौती की, वहीं दूसरी ओर बाजार नियामक सेबी ने भी विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा जारी किए जाने वाले भागीदारी पत्र (पी नोट्स) को जारी किए जाने पर लगाया गया प्रतिबंध भी हटा दिया।

रिजर्व बैंक के पास अनिवार्य रूप से रखी जाने वाली रकम के अनुपात यानी सीआरआर में हुई कटौती के बाद बैंकों के लिए लगभग 200 अरब रुपये की नकदी मुहैया हो सकेगी। इससे बैंकों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट से उपजे दबावों से निबटने में खासी मदद मिल सकेगी।

इसी तरह पी नोट्स पर लगी पाबंदी हटाने से शेयर बाजार से बैक गियर लगा रहे विदेशी निवेशकों के वापस लौटने और विदेशी निवेश के बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। सेबी के अध्यक्ष सी.बी. भावे ने निदेशक मंडल की बैठक के बाद यह पाबंदी हटाने की घोषणा करते हुए कहा कि नियामक नकद और डेरिवेटिव्स, दोनों फंडों में पी नोट्स जारी करने के संबंध लगाया गया 40 फीसदी का प्रतिबंध समाप्त कर दिया है।

यही नहीं, वैश्विक हलचल के मद्देनजर सेबी ने विदेशी संस्थागत निवेशक के ढांचे की व्यापक समीक्षा का भी निर्णय किया है। नियामक ने पिछले साल अक्टूबर में भारी अटकलों के बीच ये प्रतिबंध लगाए थे।भावे ने माना कि इससे पी नोट्स जारी किए जाने की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा – हम अक्तूबर 2007 की स्थिति को फिर से ला रहे हैं, जब कोई प्रतिबंध नहीं था।

पिछले एक साल में कई विदेशी संस्थागत निवेशकों और सब अकाउंट ने पंजीकरण किया है और हम चाहते हैं कि यह रुख बरकरार रहे। शॉर्टसेलिंग के बारे में उन्होंने कहा- दूसरे बाजारों में क्या हो रहा है, हम इसकी निगरानी कर रहे हैं। हमें यह देखना होगा कि हमारे बाजार के लिए क्या सही है। कोई संस्थागत शॉर्टसेलिंग नहीं हो रही है। समस्या तब होती है जब कोई डिलीवरी नहीं होती।

सेंसेक्स धराशायी, 12 हजार से नीचे पहुंचा

यूरोपीय बाजारों से होते हुए एशिया पहुंची अमेरिकी मंदी की आंधी ने देश के शेयर बाजारों को एक बार फिर ढहा दिया। मुंबई शेयर बाजार के सूचकांक सेंसेक्स तो सोमवार को 724 अंक का जबरदस्त गोता लगा कर 12 हजार के नीचे आ पहुंचा। यह दो सालों में इसका सबसे निचला स्तर है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी भी 215 अंक लुढ़क कर 3600 के स्तर पर जा गिरा। मुंबई शेयर बाजार में तो कमोबेश सभी शेयरों की हालत पतली रही।

उपभोक्ता टिकाऊ क्षेत्र के शेयर सूचकांक में 11 फीसदी, अचल संपत्ति और धातु क्षेत्र में नौ फीसदी, पूंजीगत वस्तु और ऊर्जा में सात फीसदी, मझोले और छोटे शेयर सूचकांक में सात फीसदी, तेल और गैस में साढ़े छह फीसदी, आईटी व तकनीकी क्षेत्र में साढ़े पांच फीसदी, फार्मा, एफएमसीजी, बैंक में चार फीसदी तथा पीएसयू व वाहन क्षेत्र में साढ़े तीन फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

विभिन्न कंपनियों के शेयरों की अगर बात की जाए तो सोमवार को किसी भी कंपनी का शेयर बढ़त पर नहीं रहा। सबसे ज्यादा लुढक़ने वाले शेयरों में स्टरलाइट 15 फीसदी, रिलायंस इन्फ्रा, जेपी एसोसिएट्स साढ़े तेरह फीसदी, टाटा स्टील 11 फीसदी, डीएलएफ, टाटा पावर 10 प्रतिशत और रिलायंस कम्युनिकेशंस व ग्रासिम साढ़े नौ फीसदी गिरे।

ताकि हमको न कसे यह पंजा 

गोता लगाते बाजारों और सुस्त पड़ते उद्योगों से घबराई सरकार
रिजर्व बैंक ने आधा फीसदी घटाकर सीआरआर की दर की 8.5 फीसदी
सेबी ने हटाया अक्टूबर 2007 से लगा पी नोट्स पर प्रतिबंध

वाया यूरोप मंदी पहुंची एशिया

प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को रौंदते वैश्विक आर्थिक संकट के कारण एशियाई और यूरोपीय बाजारों ने भी सोमवार को गोता खाया। लंदन स्टॉक एक्सचेंज के एफटीएसई 100 समेत प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज हुई। वित्तीय हलचल से प्रभावित जर्मनी, बेल्जियम, आयरलैंड और आईसलैंड जैसे यूरोपीय देश संबंधित वित्तीय संस्थानों के लिए राहत पैकेज लेकर आए हैं।

First Published - October 7, 2008 | 1:21 AM IST

संबंधित पोस्ट