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लोन चुकाने के लिए EPF से पैसा निकालने का सोच रहे हैं? पहले ये बातें समझ लें, नहीं तो होगा नुकसान

EPF से होम लोन चुकाने को आकर्षक माना जा रहा है लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि इससे आपके रिटायरमेंट फंड को नुकसान पहुंच सकता है और आपको भविष्य में दिक्कत हो सकती है

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अमित कुमार   
Last Updated- January 09, 2026 | 7:44 PM IST

कई सैलरीड लोगों के लिए EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) की बचत से लोन चुकाना बहुत लुभावना लगता है। लोग सोचते हैं कि इससे बड़ा लोन खत्म, हर महीने का तनाव कम और जीवन कर्जमुक्त हो जाता है। लेकिन पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि खासकर होम लोन चुकाने के लिए EPF की रकम निकालना लंबे समय में काफी महंगा पड़ सकता है, जिसे ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।

EPF है रिटायरमेंट का मजबूत सहारा, कोई फालतू कैश नहीं

EPF को रिटायरमेंट के लिए बनाया गया है। ये एक मजबूरी वाला लंबे समय का निवेश है। कर्मचारी और कंपनी दोनों की तरफ से पैसा जाता है और सालाना करीब 8.25 प्रतिशत ब्याज मिलता है, वो भी कंपाउंडिंग के साथ। सबसे खास बात यह है कि ब्याज टैक्स-फ्री है। इसलिए ये सैलरीड लोगों के लिए सबसे अच्छा और कम रिस्क वाला तरीका है पैसा बढ़ाने का।

EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) के नियमों के मुताबिक, EPF से निकासी बहुत सीमित है ताकि रिटायरमेंट का पैसा सुरक्षित रहे। आम लोन जैसे पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने के लिए EPF से पैसा नहीं निकाल सकते। सिर्फ हाउसिंग लोन चुकाने के लिए ही कुछ खास शर्तों के साथ निकासी की इजाजत है, जैसा कि EPF स्कीम, 1952 में लिखा है।

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होम लोन समय के साथ हल्का क्यों लगता है?

होम लोन के मामले में समय के साथ बोझ कम होता जाता है। EMI चलते-चलते ब्याज का हिस्सा घटता है और मूल रकम का हिस्सा बढ़ता है। साथ ही, आमतौर पर सैलरी बढ़ती है, इन्फ्लेशन के साथ करियर आगे बढ़ता है, तो EMI का बोझ रिलेटिव तरीके से कम लगने लगता है।

टैक्स का भी फायदा है। पुराने टैक्स रिजीम में प्रिंसिपल और ब्याज दोनों पर छूट मिलती है, जिससे लोन की असली लागत कम हो जाती है। नए टैक्स रिजीम में ये फायदा नहीं है, लेकिन एक्सपर्ट कहते हैं कि EPF का लंबे समय तक कंपाउंडिंग इतना मजबूत है कि वो लोन जल्दी चुकाने से मिलने वाली बचत से ज्यादा फायदा देता है।

ब्याज दर का जाल

पहली नजर में आंकड़े थोड़े भ्रमित कर सकते हैं। अभी होम लोन की दरें करीब 7-7.5 प्रतिशत के आसपास हैं, जो EPF के 8.25 प्रतिशत से थोड़ी कम लगती हैं। फर्क छोटा-सा दिखता है। लेकिन EPF का ब्याज टैक्स-फ्री है, तो 30 प्रतिशत टैक्स स्लैब वाले के लिए ये 8.25 प्रतिशत करीब 11 प्रतिशत के बराबर टैक्सेबल रिटर्न देता है। इतना पोस्ट-टैक्स रिटर्न बहुत कम सुरक्षित निवेश देते हैं।

एक आम उदाहरण, दो अलग नतीजे

मान लीजिए किसी के पास 20 लाख का बकाया होम लोन है और EPF में भी 20 लाख रुपये हैं, साथ ही लोन में 10 साल बाकी हैं।

अगर पूरा EPF निकालकर लोन खत्म कर दें, तो अगले 10 साल में करीब 9 लाख रुपये ब्याज बच सकता है। लेकिन रिटायरमेंट का पूरा कोष खत्म हो जाएगा।

अगर EPF को हाथ नहीं लगाया, तो वही 20 लाख रुपये 10 साल में 44 लाख रुपये से ज्यादा हो सकता है, वो भी पूरी तरह टैक्स-फ्री। होम लोन का ब्याज देने के बाद भी, रिटायरमेंट में व्यक्ति ज्यादा मजबूत स्थिति में होगा। ज्यादातर मामलों में कंपाउंडिंग का जादू EPF के पक्ष में ज्यादा काम करता है।

कब EPF निकालना सही हो सकता है?

EPFO के नियमों के अनुसार, हाउसिंग लोन चुकाने के लिए EPF से पैसा सिर्फ एक बार जीवन में निकाला जा सकता है। इसके लिए कुछ शर्तें हैं, जैसे कम से कम 10 साल की सदस्यता, निकासी की सीमा वेतन, बैलेंस या बकाया लोन से जुड़ी होती है। पैसा सीधे लेंडर को जाता है।

एक्सपर्ट कहते हैं कि EPF निकालना सिर्फ कुछ खास स्थितियों में सोचना चाहिए, जैसे:

  • रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके हों और EPF में काफी ज्यादा बचत हो
  • बहुत ज्यादा कैश-फ्लो का दबाव हो और कोई दूसरा रास्ता न बचा हो
  • लोन की बाकी रकम कुल रिटायरमेंट कोष के मुकाबले बहुत छोटी हो

ऐसे मामलों में भी पहले अच्छे से कैलकुलेशन करना और किसी प्रोफेशनल से सलाह लेना बहुत जरूरी है।

First Published : January 9, 2026 | 7:44 PM IST