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वोडाफोन आइडिया को AGR बकाये में 10 साल की बड़ी राहत, 5G विस्तार का रास्ता साफ

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वोडाफोन आइडिया को AGR भुगतान में 10 साल की राहत दी गई है, जिससे 4G और 5G विस्तार के लिए फंड जुटाने की राह आसान मानी जा रही है

Last Updated- January 09, 2026 | 10:06 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत की तीसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया (वी) को दूरसंचार विभाग (डीओटी) से समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) भुगतान के लिए 10 साल की मोहलत मिली है। इससे कंपनी को बैंकों से पैसा जुटाने में मदद मिलेगी, जो उसे भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए 4जी और 5जी सेवाओं के विस्तार के लिए पूंजीगत खर्च योजनाओं के लिए जरूरी है।

शुक्रवार को दूरसंचार कंपनी द्वारा बीएसई को दी गई जानकारी में कहा गया कि सरकार ने वी से मार्च 2026 से शुरू होकर छह साल तक सालाना ज्यादा से ज्यादा 124 करोड़ रुपये और फिर मार्च 2032 से चार साल तक सालाना 100 करोड़ रुपये देने को कहा है। इस दौरान, कंपनी के एजीआर बकाये का एक सरकारी समिति द्वारा फिर से आकलन किया जाएगा और उसे फाइनल किया जाएगा। 31 दिसंबर, 2025 तक दूरसंचार कंपनी पर एजीआर बकाया 86,765 करोड़ रुपये है।

उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि कि सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट होने के बाद भारती एयरटेल अदालत जा सकती है, क्योंकि इस दूसरी सबसे बड़ी इस कंपनी ने वी की तरह ही एजीआर बकाया पर सरकार से राहत मांगी है। भारती एयरटेल का एजीआर बकाया 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान है और उसने पहले सरकार से बकाया को इक्विटी में बदलने के लिए कहा था। सुनील मित्तल की दूरसंचार कंपनी ने पहले ही एजीआर बकाया के 18,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। भारती एयरटेल से इस संबंध में पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं मिला है।

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सूत्रों ने बताया कि वी के लिए दोबारा तय किया गया बकाया दिसंबर 2025 तक फ्रीज की गई 86,795 करोड़ रुपये की रकम से कम होने की संभावना है। सरकार ने पूरे देश में सर्कल लेवल पर वित्त वर्ष 2006-07 से वित्त वर्ष 2018-19 तक की अवधि के एजीआर बकाये की समीक्षा शुरू कर दी है, जिसमें मूलधन, ब्याज, जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज शामिल है। सूत्रों ने यह भी बताया कि 2018 में वोडाफोन आइडिया बनाने के लिए कंपनियों के मर्जर से पहले आइडिया सेल्युलर और वोडाफोन इंडिया, साथ ही अन्य सब्सिडियरी कंपनियों के बकाये की भी समीक्षा की जा रही है।

ऐम्बिट कैपिटल में शोध विश्लेषक विवेकानंद सुब्बारामन ने कहा, ‘पुन: आकलन की प्रक्रिया के साथ सरकार की ओर से इस तरह के निर्णायक कदम वी को बैंक फंडिंग में सक्षम बनाएंगे, जो से पूंजीगत खर्च के लिए जरूरी है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला पक्ष में आने से वी को हाल में 3300 करोड़ रुपये के एनसीडी (गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर) जुटाने में मदद मिली है।’

इस सेक्टर पर नजर रखने वालों का कहना है कि इस कदम से वी में कोई बड़ा निवेशक आ सकता है और सरकार अपनी मौजूदा 48.9 प्रतिशत हिस्सेदारी कम कर सकती है, जिससे स्पेक्ट्रम के और ज्यादा बकाये को इक्विटी में बदला जा सकेगा।

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आईआईएफएल कैपिटल के विश्लेषकों ने शुक्रवार को वी के खुलासे के बाद एक नोट में कहा, ‘वित्त वर्ष 2035 तक एजीआर भुगतान न के बराबर होने से, वी के फंड जुटाने की संभावनाएं काफी बेहतर हो गई हैं। किसी प्रमुख निवेशक द्वारा पूंजी लगाने से सरकार की हिस्सेदारी भी कम होगी, जिससे 1.2 लाख करोड़ रुपये के स्पेक्ट्रम कर्ज के एक हिस्से को सरकारी इक्विटी में बदलने की गुंजाइश बनेगी (49% की सीमा को पार किए बिना)।’

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First Published - January 9, 2026 | 10:06 PM IST

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