facebookmetapixel
Advertisement
ऑप्शन बिजनेस की चमक पड़ी फीकी! NSE ने 15% घटाया IPO वैल्यूएशन, निवेशकों को कितने में मिलेगा शेयर?लीडरशिप पर सस्पेंस! टाटा ग्रुप में बैठकों का सिलसिला, क्या होगा बड़ा फैसला?नौकरी छोड़ने की सोच रहे हैं? कहीं आप इन 5 PF फायदों को तो नहीं भूल रहे?वीगालैंड डेवलपर्स आईपीओ खुला: ₹210 करोड़ के इश्यू में लगाएं पैसा? ग्रे मार्केट प्रीमियम दे रहा 17% मुनाफे का संकेतगोल्ड ETF में निवेश की होड़, अगस्त में आए $18 अरब; यूरोप सबसे आगे133% तक उछल सकता है Vodafone Idea! ये 2 फैक्टर्स बदलेंगे पूरा खेल, जेफरीज ने शुरू की कवरेजसोना 182 रुपये सुस्त, चांदी 907 रुपये नरम; आज क्यों गिर रहे दाम?MP Investment: दुबई से मध्य प्रदेश के लिए आया ₹53 हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश, ग्रीन एनर्जी से AI तक बड़े प्रोजेक्टApple का सबसे बड़ा धमाका! आया पहला फोल्डेबल iPhone Duo, साथ में आईफोन 18 प्रो, एयरपॉड्स 5 और नई वॉच भी लॉन्चStock Market Update: सीमित दायरे में बाजार, निफ्टी 23,400 के पास; Novartis India में 14% की बंपर तेजी

सॉफ्टवेयर-डिफाइंड वाहनों के दौर में बदली ऑटो इंडस्ट्री की भर्ती, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपर्ट्स की बढ़ी मांग

Advertisement

यह तकनीकी क्रांति वाहन कंपनियों में महिलाओं की संख्या भी बढ़ा रही है। यहां तक कि केवल महिलाओं द्वारा संचालित शॉप फ्लोर (उत्पादन क्षेत्र) का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है

Last Updated- July 16, 2026 | 10:25 PM IST
Software Defined Vehicles
प्रतीकात्मक तस्वीर

कारों का कंप्यूटरीकरण बढ़ने और उनके द्वारा हर क्षण डेटा उत्पन्न और संसाधित करने में इजाफा होने के साथ ही वाहन उद्योग की भर्ती रणनीति में एक बुनियादी बदलाव नजर आ रहा है। वाहन कंपनियां मैकेनिकल इंजीनियरों और विनिर्माण विशेषज्ञों के अलावा अब तेजी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरों, कोडर्स, डेटा वैज्ञानिकों, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) विशेषज्ञों को नियुक्त कर रही हैं। यह तकनीकी क्रांति वाहन कंपनियों में महिलाओं की संख्या भी बढ़ा रही है। यहां तक कि केवल महिलाओं द्वारा संचालित शॉप फ्लोर (उत्पादन क्षेत्र) का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है।

यह बदलाव लगभग पांच साल पहले शुरू हुआ और अब तेजी पकड़ चुका है। अग्रणी वाहन निर्माताओं की भर्ती पैटर्न में यह पहले से ही दिखाई दे रहा है। टाटा मोटर्स में अब 60 फीसदी से अधिक इंजीनियरिंग भर्ती विद्युत, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर और एम्बेडेड सिस्टम (सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का संयोजन) से होती है। टाटा मोटर्स के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी सीताराम कांडी ने कहा, ‘यह पारंपरिक ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग और डिजिटल तकनीकों के बीच बढ़ते संगम को दर्शाता है।’

यह बदलाव पूरे क्षेत्र में यानी यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन और दो-तीन पहिया वाहनों की पूरी मूल्य श्रृंखला में दिखाई दे रहा है क्योंकि उद्योग दक्षता सुधारने के लिए डिजिटल तकनीकों को अपना रहा है। उन्नत ड्राइवर-सहायता प्रणाली (एडास) और वाहन कनेक्टिविटी जैसी विशेषताओं ने तकनीक और गतिशीलता कौशल को भर्ती प्राथमिकताओं के केंद्र में ला दिया है। कांडी ने कहा, ‘जैसे-जैसे वाहन अधिक जुड़ावयुक्त, विद्युतीकृत और सॉफ्टवेयर-परिभाषित होते जा रहे हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग सबसे तेजी से बढ़ती प्रतिभा श्रेणियों में से एक बनकर उभरी है।’ 

ह्युंडै मोटर भी ऐसे ही रुझान देख रही है। कंपनी में पीपल स्ट्रैटजी के सहायक उपाध्यक्ष (एवीपी) एवं वर्टिकल हेड नटवर काडेल ने कहा, ‘हम इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर और एंबेडेड सिस्टम से जुड़े विशेष रूप से  उत्पाद नियोजन, कनेक्टिविटी, मोबिलिटी, खरीद और विनिर्माण इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में प्रतिभाशाली पेशेवरों की बढ़ती आवश्यकता महसूस कर रहे हैं।’

करीब एक दशक पहले की तुलना में अब सॉफ्टवेयर इंजीनियर वाहन के डिजाइन के शुरुआती चरण से ही प्रक्रिया का हिस्सा बन जाते हैं। वे मैकेनिकल इंजीनियरों के साथ मिलकर कनेक्टेड फीचर्स, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडास), ओवर-द-एयर (ओटीए) सॉफ्टवेयर अपडेट और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम जैसी तकनीकों पर काम करते हैं।

कांडी ने कहा, ‘आज वाहन विकास एक एकीकृत इंजीनियरिंग मॉडल पर आधारित है, जिसमें सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर अवधारणा के शुरुआती चरण से ही मिलकर काम करते हैं। इससे वाहनों का विकास अधिक तेजी से होता है। हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का बेहतर समन्वय सुनिश्चित होता है और उन्नत वाहन प्रौद्योगिकियों को विकसित करने तथा बाजार तक पहुंचाने में अधिक लचीलापन मिलता है।’

वाहन उद्योग के कारखानों के शॉप फ्लोर पर एक और बड़ा बदलाव महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के रूप में दिखाई दे रहा है। टाटा मोटर्स के विभिन्न संयंत्रों में 6,500 से अधिक महिला शॉप-फ्लोर तकनीशियन कार्यरत हैं। वहीं पुणे स्थित इयके एसयूवी असेंबली संयंत्र में लगभग 3,000 महिलाओं का पूर्णतः महिला कार्यबल काम कर रहा है।

दरअसल लगभग सभी प्रमुख कंपनियों में महिला कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है। हीरो मोटोकॉर्प के पास पहले से ही पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित एक असेंबली लाइन है और कंपनी का लक्ष्य वर्तमान लगभग 20 फीसदी महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी को बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 30 फीसदी करना है। एमजी मोटर में महिलाओं की हिस्सेदारी कुल कार्यबल का एक-तिहाई से अधिक है। वहीं वाणिज्यिक वाहन निर्माता अशोक लीलैंड ने तमिलनाडु के होसुर स्थित अपने संयंत्र में पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित एक असेंबली लाइन स्थापित की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ वर्षों में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी वर्तमान लगभग 15 फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी से भी अधिक हो सकती है। वाहनों में सॉफ्टवेयर की बढ़ती भूमिका यह भी बदल रही है कि वाहन में मूल्य का सृजन किस प्रकार होता है। टाटा मोटर्स के अनुसार वर्तमान में किसी वाहन के कुल मूल्य में सॉफ्टवेयर की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी हो गई है, जबकि पांच वर्ष पहले यह केवल 10 फीसदी थी।  सीआईईएल एचआर के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा, ‘एंबेडेड सॉफ्टवेयर, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम, ऑटोमोटिव साइबर सुरक्षा और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल क्षमताओं की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि वाहन निर्माता अपनी पारंपरिक इंजीनियरिंग कार्यबल के साथ-साथ भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रतिभाओं में भी निवेश कर रहे हैं।’

मिश्रा ने कहा कि यह स्थिति वैसी नहीं है कि एक प्रकार की नौकरियों के स्थान पर दूसरी प्रकार की नौकरियां आ जाएं। उन्होंने कहा, ‘हम प्रतिभाओं का अधिक संतुलित मिश्रण उभरते हुए देख रहे हैं जहां भविष्य की वृद्धि इस क्षमता पर निर्भर करेगी कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग को डिजिटल और सॉफ्टवेयर कौशल के साथ कितनी प्रभावी ढंग से एकीकृत किया जा सकता है।’

इलेक्ट्रिक और कनेक्टेड वाहनों की बिक्री में वृद्धि तथा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को तर्कसंगत बनाने जैसे अनुकूल कारकों के कारण चालू वित्त वर्ष में वाहन क्षेत्र में भर्ती 8 फीसदी बढ़ने की संभावना है। यह अनुमान एआई-संचालित प्रतिभा उपलब्धता और भर्ती प्रक्रिया आउटसोर्सिंग (आरपीओ) कंपनी टैग्ड और सीआईआई की एक रिपोर्ट में व्यक्त किया गया है।  हालांकि इस बदलाव ने कुछ नई चुनौतियां भी पैदा की हैं। सॉफ्टवेयर-डिफाइंड वाहनों की ओर बढ़ते रुझान के कारण एंबेडेड सिस्टम, एआई, साइबर सुरक्षा और वाहन कनेक्टिविटी में दक्ष पेशेवरों की भारी कमी हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसी वजह से वर्ष 2025 में भारत के आधे से भी कम मूल उपकरण निर्माता और उनके आपूर्तिकर्ता अपने डिजिटल कार्यक्रमों का प्रभावी विस्तार कर पाए।

यह परिवर्तन ऐसे समय हो रहा है, जब अकेले इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग से वर्ष 2030 तक लगभग 5 करोड़ रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मजबूत मांग के कारण आने वाले वर्षों में भर्ती गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी आएगी। प्राइमस पार्टनर्स के अनुराग सिंह ने कहा, ‘आने वाले वर्षों में इस तरह की भर्तियां और बढ़ेंगी, क्योंकि मैकेनिकल इंजीनियरिंग की प्रक्रियाएं अधिक दक्ष होती जाएंगी और वाहनों में सॉफ्टवेयर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल लगातार बढ़ेगा। इसके अलावा, कारखानों के शॉप फ्लोर पर स्वचालन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरों की मांग भी बढ़ेगी।’

Advertisement
First Published - July 16, 2026 | 10:25 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement