म्युचुअल फंड

Debt Mutual Funds: दिसंबर में डेट फंड्स को लगा ₹1.32 लाख करोड़ का झटका, जानें क्यों निवेशकों ने निकाले पैसे

यह निकासी मुख्य रूप से शॉर्ट-टर्म डेट कैटेगरी में हुई- जिसमें लिक्विड, मनी मार्केट और अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स शामिल हैं

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अंशु   
Last Updated- January 09, 2026 | 7:22 PM IST

Debt Mutual Funds: डेट म्युचुअल फंड्स में आउटफ्लो (पैसे की निकासी) का सिलसिला दिसंबर में भी जारी रहा। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, बीते महीने में डेट फंड्स को 1.32 लाख करोड़ रुपये  का भारी-भरकम झटका लगा। नवंबर में इन फंड्स से 25,693 करोड़ रुपये निकाले गए थे। इसी वजह से पूरे म्युचुअल फंड सेक्टर का आंकड़ा निगेटिव में चला गया। ज्यादातर पैसा लिक्विड, मनी मार्केट और अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फंड से निकाला गया। इसकी वजह साल के आखिर में कंपनियों और बड़े निवेशकों की नकदी जरूरतें थीं।

लिक्विड और मनी मार्केट फंड्स से हुई भारी निकासी

AMFI के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में निवेशकों ने अकेले लिक्विड फंड्स से 47,308 करोड़ रुपये निकाले। जबकि नवंबर में इस कैटेगरी में 14,050.72 करोड़ रुपये निकाले गए थे। वहीं, बीत महीने मनी मार्केट फंड्स 40,464 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया। जबकि नवंबर में इस कैटेगरी में 11,104.3 करोड़ रुपये का निवेश आया था। ये दोनों कैटेगरी, आमतौर पर बड़े संस्थागत निवेशों को आकर्षित करती हैं। ये फंड्स शॉर्ट टर्म में लिक्विडिटी की जरूरतों और ट्रेजरी निर्णयों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं।

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क्यों निवेशकों ने डेट फंड्स से निकाले पैसे?

दिसंबर तिमाही में इस तरह की मौसमी निकासी सामान्य होती है और इससे डेट फंड की मांग में किसी तरह की स्ट्रक्चरल कमजोरी के रूप में नहीं देखना चाहिए। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया में प्रिंसिपल रिसर्चर हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि डेट ओरिएंटेड म्युचुअल फंड्स में भारी-भरकम आउटफ्लो देखा गया, जो पिछले महीने की तुलना में काफी ज्यादा रही। इसकी वजह साल के अंत में ट्रेजरी से जुड़ी गतिविधियां और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें रहीं।

श्रीवास्तव ने बताया कि कॉरपोरेट्स और संस्थानों ने एडवांस टैक्स भुगतान, बैलेंस शीट एडजेस्टमेंट और वर्किंग कैपिटल जरूरतों के लिए अपनी अतिरिक्त नकदी निकाली। उन्होंने आगे कहा कि दिसंबर तिमाही में इस तरह की मौसमी निकासी सामान्य होती है और इससे डेट फंड की मांग में किसी तरह की स्ट्रक्चरल कमजोरी का संकेत नहीं मिलता।

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श्रीराम एएमसी के एमडी और सीईओ कार्तिक जैन ने कहा, “दिसंबर 2025 में इंडस्ट्री से लगभग 66,500 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी निवेशकों की डेट फंड्स के प्रति भावना में बदलाव के कारण नहीं, बल्कि मौसमी संतुलन (सीजनल रीबैलेंसिंग) के चलते हुई है।

यह निकासी मुख्य रूप से शॉर्ट-टर्म डेट कैटेगरी में हुई- जिसमें लिक्विड, मनी मार्केट और अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स शामिल हैं। यह कॉरपोरेट्स की तिमाही के अंत में नकदी प्रबंधन, एडवांस टैक्स पेमेंट और बैलेंस शीट को अंतिम रूप देने की सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप है।

ओवरनाइट और फ्लोटर फंड्स ने दिखाई मजबूती

AMFI के आंकड़ों के अनुसार, केवल ओवरनाइट फंड्स और फ्लोटर फंड्स को छोड़कर, बाकी सभी डेट फंड कैटेगरी में दिसंबर में आउटफ्लो देखने को मिला। बीते महीने ओवरनाइट फंड्स ने जोरदार रिकवरी की और इसमें 254 करोड़ रुपये का निवेश आया। जबकि नवंबर में इन फंड्स से 37,625 करोड़ रुपये निकाले गए थे। वहीं, फ्लोटर फंड्स में 722 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया। नवंबर में इस कैटेगरी में महज 91.8 करोड़ रुपये का निवेश आया था। निवेशक इसे इसलिए पसंद कर रहे थे क्योंकि इसमें कम अवधि का जोखिम होता है। इसके अलावा, यह काफी स्थिर रिटर्न भी देता है।

First Published : January 9, 2026 | 7:18 PM IST