facebookmetapixel
दूध के साथ फ्लेवर्ड दही फ्री! कहानी क्विक कॉमर्स की जो बना रहा नए ब्रांड्स को सुपरहिटWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड की लहर! IMD ने जारी किया कोहरा-बारिश का अलर्ट67% चढ़ सकता है सिर्फ ₹150 का शेयर, Motilal Oswal ने शुरू की कवरेज; BUY की दी सलाहअमेरिका का सख्त कदम, 13 देशों के लिए $15,000 तक का वीजा बॉन्ड जरूरीवेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिका की नजर: ट्रंप बोले- अमेरिकी कंपनियों को मिल सकती है सब्सिडीस्टॉक स्प्लिट का ऐलान: इस रियल्टी कंपनी के शेयर 15 जनवरी से होंगे स्प्लिट, जानें डिटेलStock Market Update: हैवीवेट शेयरों में बिकवाली से बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 340 अंक गिरा; निफ्टी 26,200 के पासStocks To Watch Today: ONGC से Adani Power तक, आज बाजार में इन स्टॉक्स पर रहेगी नजरमजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटा

दलाल स्ट्रीट में सरकारी तेल कंपनियों के शेयर संभले

Last Updated- December 07, 2022 | 4:44 AM IST

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंचने का असर देश की सभी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों  पर पड़ा  है।


कल भारी गिरावट के बाद उनके शेयरों में आज मामूली बढ़ोतरी हुई। कल उनके भाव  52 सप्ताह के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। मंगलवार के कारोबार में इन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों में ओएनजीसी को छोड़ सभी की स्थिति में थोड़ा ही परिवर्तन हुआ।

ओएनजीसी का शेयर जो सोमवार को 7.02 फीसदी गिरा था। आज भी 41.75 रुपये की भारी गिरावट के साथ 831.25  पर बंद हुआ। एचपीसीएल का शेयर 3 रुपये चढ़कर 196 रुपये पर बंद हुआ, वहीं बीपीसीएल के शेयर में 6.24 रुपये  की बढ़ोतरी  हुई और यह 284.64 रुपये पर पहुंच गया। इसी तरह आईओसी के शेयरों में 3.55 रुपये का इजाफा हुआ और यह 363 से 366.55 रुपये पर पहुंच गए।

कल बंबई शेयर बाजार (बीएसई) में सोमवार को हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन (बीपीसीएल) और इंडियन ऑयल कार्पोरेशन के शेयर 52 हफ्तों में सबसे निचले स्तर पर थे। एसबीआई म्युच्युअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी संजय सिन्हा ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों में गिरावट का यह दौर आगे भी जारी रहेगा।

शुक्रवार को तेल के दाम 10 डॉलर बढ़े और इसके दाम 139 डॉलर प्रति बैरल के अपने रिकार्ड स्तर पर पहुंच गए। इसके बाद तो निवेशकों के लिए इन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के शेयरों पर विचार करना भी मुश्किल हो गया जो तेल की कीमतों के 100 डॉलर तक पहुंचने बाद पिछले दो माह से इनसे खासी दूरी बना रहे हैं सिन्हा ने बताया कि पेट्रोल की कीमतों में हुई वृध्दि हमेशा स्थिर नहीं रहने वाली और इसका सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के घाटे से कोई संबंध नहीं है।

सरकार को सचमुच अगर इसकी चिंता है तो उसे तुरंत कठोर, असरदार और पारदर्शी कदम उठाने चाहिए। पेट्रोल और डीजल पर शुल्क 7.5 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी कर दिया गया है। दूसरे पेट्रोलियम पदार्थों पर यह शुल्क 10 से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।

First Published - June 10, 2008 | 10:46 PM IST

संबंधित पोस्ट