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शीर्ष स्तर से शेयर बाजार 10% फिसला, महंगाई में तेजी और मजबूत डॉलर ने बढ़ाई ​चिंता

इससे पहले अप्रैल 2022 से जून 2022 के बीच सूचकांक में 15 फीसदी की गिरावट आई थी। हालांकि पिछली सभी गिरावट थोड़े समय के लिए ही थीं।

Last Updated- November 13, 2024 | 10:01 PM IST
Stock Market

शेयर बाजार में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है और बेंचमार्क निफ्टी तथा निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप 100 अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर से 10 फीसदी से ज्यादा टूट चुके हैं। कुल मिलाकर बाजार ‘गिरावट’ के चरण में आ गया है। बाजार कमजोर नतीजों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली का पहले से ही दबाव झेल रहा था। इस बीच खुदरा मुद्रास्फीति में तेजी और डॉलर में मजबूती ने चिंता और बढ़ा दी है।

बाजार के उच्चतम स्तर से 10 फीसदी से ज्यादा फिसलने को ‘तकनीकी रूप से गिरावट’ कहा जाता है। इससे पहले मार्च 2020 में कोविड-19 के समय बिकवाली के दौरान निफ्टी ‘गिरावट’ के दायरे में आ गया था। यह घटनाक्रम बाजार में प्रवेश करने वाले उन नए निवेशकों के धैर्य की परीक्षा ले सकता है जिन्होंने अभी तक बाजार में लगातार गिरावट नहीं देखी है। इससे पहले अप्रैल 2022 से जून 2022 के बीच सूचकांक में 15 फीसदी की गिरावट आई थी। हालांकि पिछली सभी गिरावट थोड़े समय के लिए ही थीं।

निफ्टी 50 आज 324 अंक टूटकर 23,559 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 984 अंक के नुकसान के साथ 77,691 पर बंद हुआ। दोनों सूचकांकों में 3 अक्टूबर के बाद एक दिन की यह सबसे बड़ी गिरावट है। 26 सितंबर के उच्चतम स्तर से निफ्टी करीब 10.14 फीसदी और सेंसेक्स 9.5 फीसदी नीचे आ चुका है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 27 सितंबर के 478 लाख करोड़ रुपये से 48 लाख करोड़ रुपये घटकर 430 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

अक्टूबर में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 6.21 फीसदी पर पहुंच गई जो 14 महीने में सबसे अ​धिक है। एक साल में पहली बार मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लक्ष्य से पार हुई है। इससे आरबीआई द्वारा रीपो दर में कटौती की उम्मीद पर भी पानी फिरता दिख रहा है। बढ़ती मुद्रास्फीति से खपत मांग में भी कमी आने की आशंका है।

मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अ​धिकारी सौरभ मुखर्जी ने कहा, ‘मुद्रास्फीति में तेजी को देखते हुए आरबीआई के लिए दर में कटौती करना बहुत कठिन हो गया है। खपत पहले से ही कमजोर है और महंगाई बढ़ने से परिवारों के बजट पर भी असर पड़ेगा। कुल मिलाकर दरें घटाने की गुंजाइश सीमित होना अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए अच्छी खबर नहीं है।’

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं जिससे बाजार में गिरावट बढ़ी है। 26 सितंबर से अभी तक विदेशी निवेशक 1.1 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1.4 लाख करोड़ रुपये की लिवाली कर नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की है।
डॉलर सूचकांक 106.05 पर कारोबार कर रहा है जो 30 अप्रैल के बाद सबसे उच्च स्तर है।

एवेंडस कैपिटल मार्केट्स अल्टरनेट स्ट्रैटजीज के सीईओ एंड्रयू हॉलैंड ने कहा, ‘दुनिया भर में केवल अमेरिका का बाजार ही बढ़त दिखा रहा है। हमें अमेरिका में नए प्रशासन की नीतियों को समझने के लिए इंतजार करना होगा।’

First Published - November 13, 2024 | 9:57 PM IST

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