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लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार लुढ़का: सेंसेक्स 436 अंक टूटा, फेड नीति और FPI बिकवाली से दबाव बढ़ा

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निफ्टी अब तक दो सत्रों में 1.3 फीसदी गिर चुका है और इस महीने की शुरुआत की रिकॉर्ड ऊंचाई से 1.8 फीसदी नीचे आ गया है

Last Updated- December 09, 2025 | 10:22 PM IST
stock market

ल­गातार दूसरे सत्र में मंगलवार को शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। इसकी वजह इंडेक्स के दिग्गजों और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में आई नरमी रही। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच सतर्कता बनी रही।

सेंसेक्स 436 अंक यानी 0.51 फीसदी गिरकर 84,666 पर आ गया। निफ्टी 50 इंडेक्स 121 अंक यानी 0.5 फीसदी फिसलकर 25,840 पर टिका। निफ्टी अब तक दो सत्रों में 1.3 फीसदी गिर चुका है और इस महीने की शुरुआत की रिकॉर्ड ऊंचाई से 1.8 फीसदी नीचे आ गया है।

एनरिच मनी के सीईओ आर. पोनमुडी ने कहा, अमेरिका में मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के प्रमुख संकेतों से पहले बढ़ती सतर्कता के कारण व्यापक स्तर पर बिकवाली से बाजार दबाव में आ गए। अमेरिकी बॉन्ड पर उच्च प्रतिफल, डॉलर की लगातार मजबूती के बीच रुपये का 90 के नीचे गिरना और एफपीआई की निरंतर निकासी से बाजार की धारणा प्रभावित हो रही है।

एक ओर जहां फेड द्वारा बुधवार से दरों में ढील देने की व्यापक उम्मीद की जा रही है, वहीं वॉल स्ट्रीट बैंकों ने स्थिर मुद्रास्फीति और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में निरंतर मजबूती का हवाला देते हुए 2026 में दरों में कटौती के अपने पूर्वानुमान को घटा दिया है। उच्च अमेरिकी ब्याज दरें आमतौर पर डॉलर और ट्रेजरी यील्ड को बढ़ावा देती हैं जिससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए उभरते बाजारों के शेयरों का आकर्षण कम हो जाता है।

एफपीआई ने मंगलवार को 3,760 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 6,225 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

पोनमुडी ने कहा, व्यापार वार्ता में धीमी प्रगति के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की भारत के चावल आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की धमकी भरी नई टिप्पणी ने नकारात्मक धारणा को और बढ़ा दिया है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत के साथ अमेरिका समझौते पर काम करना जारी रखे हुए है जबकि उप-व्यापार प्रतिनिधि रिक स्वित्ज़र 10-11 दिसंबर को भारत आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि अमेरिका कुछ भारतीय आयातों पर लक्षित शुल्क लगा सकता है।

आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई और ये करीब 1.2 फीसदी तक लुढ़क गए। टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक में करीब 1.8 फीसदी की गिरावट आई। आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज सेंसेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में शामिल थे। एशियन पेंट्स में सबसे ज्यादा 4.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

16 सेक्टर सूचकांकों में से 11 गिरावट के साथ बंद हुए। इसके विपरीत व्यापक सूचकांकों में मामूली सुधार हुआ। बीएसई स्मॉलकैप में 1.1 फीसदी की वृद्धि हुई। मिडकैप सूचकांक 0.3 फीसदी चढ़ा। पिछले सत्र में दोनों में 2 फीसदी से अधिक की गिरावट आई थी। बाजार का व्यापक रुख सकारात्मक रहा जहां 2,550 शेयरों में तेजी रही जबकि 1,625 शेयरों में गिरावट आई।

व्यक्तिगत शेयरों में स्पाइसजेट में 5.6 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, जिससे इंडिगो में परिचालन संबंधी चुनौतियों के बावजूद तीन दिनों से जारी बढ़त जारी रही। इंडिगो के सीईओ द्वारा परिचालन स्थिर होने की घोषणा के बाद कंपनी के शेयरों में करीब 1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। मैक्वेरी और जेपी मॉर्गन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता के लिए सकारात्मक रेटिंग दोहराए जाने के बाद केन्स टेक्नॉलजी में 13.8 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। इस तरह चार सत्रों से चली आ रही गिरावट का सिलसिला टूट गया। तकनीकी तौर पर बाजार समर्थन के अहम स्तर की ओर बढ़ रहा है।

सैमको सिक्योरिटीज के डेरिवेटिव शोध विश्लेषक धूपेश धमेजा ने कहा, बेंचमार्क एक बार फिर अपने 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (50 डीएमए) के पास समर्थन ले रहा है। यह ऐसा दायरा है जहां पहले भी बाजार में रीबाउंड के प्रयास हुए हैं। उन्होंने कहा, व्यापक सकारात्मक रुझान के लिए इस स्तर से ऊपर बने रहना अहम होगा। ऊपर की ओर 26,000-26,100 तात्कालिक प्रतिरोध स्तर है जबकि 25,700 निर्णायक स्तर है।

आने वाले समय में इंडेक्स का प्रदर्शन आय वृद्धि के मुताबिक हो सकता है। बोफा के शोध प्रमुख (भारत) अमीश शाह ने कहा, पिछले दो दशकों के हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि निफ्टी केवल मज़बूत आय वृद्धि चक्रों के दौरान ही ऊंचा मूल्यांकन बनाए रखता है, जिसके अगले साल होने की संभावना नहीं है।

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First Published - December 9, 2025 | 10:10 PM IST

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