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सेंसेक्स-निफ्टी सात हफ्ते की सबसे बड़ी छलांग के साथ बंद, HDFC बैंक और रिलायंस ने दिखाई दमदार बढ़त

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एचडीएफसी बैंक, रिलायंस और एसबीआई की मजबूती से सेंसेक्स-निफ्टी सात हफ्ते में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचे, विदेशी निवेशकों की शॉर्ट कवरिंग ने तेजी को सहारा दिया।

Last Updated- August 11, 2025 | 10:17 PM IST
Stock Market
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार की तेजी के बीच बेंचमार्क सूचकांकों में करीब सात हफ्ते की सबसे बड़ी एकदिवसीय उछाल आई। इसमें एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे दिग्गज शेयरों की मजबूत बढ़त का योगदान रहा।

सेंसेक्स 746 अंक यानी 0.9 फीसदी चढ़कर 80,604 पर बंद हुआ। निफ्टी 222 अंक यानी 0.9 फीसदी के इजाफे के साथ 24,585 पर टिका। दोनों सूचकांकों का यह 26 जून के बाद से सबसे अच्छा प्रदर्शन है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 3.4 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 444 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की शॉर्ट कवरिंग के कारण भी यह बढ़त देखी गई क्योंकि मंदी के दांव कई साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए थे। 8 अगस्त तक इंडेक्स फ्यूचर्स में एफपीआई लॉन्ग-शॉर्ट अनुपात केवल 8.28 फीसदी था यानी हर 100 शॉर्ट पोजीशन के लिए केवल आठ लॉन्ग पोजीशन थीं।

व्यक्तिगत शेयरों में की बात करें तो एचडीएफसी बैंक में 1.2 फीसदी और रिलायंस इंडस्ट्रीज में 1.4 फीसदी की तेजी आई। मजबूत ट्रेजरी लाभ के कारण भारतीय स्टेट बैंक का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 12.5 फीसदी बढ़कर 19,160 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इससे बैंक का शेयर  2.5 फीसदी चढ़ा।

जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने सुर्खियां बटोरीं और सभी क्षेत्रों में व्यापक रफ्तार देखी गई। निवेशक आगामी अमेरिका-रूस शिखर सम्मेलन को लेकर सतर्क और आशावादी बने हुए हैं, जिससे भूराजनीतिक तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि अमेरिकी व्यापार नीति का वृद्धि पर वास्तविक असर अभी देखना बाकी है।

सोमवार की बढ़त के बावजूद भारतीय शेयर बाजार दबाव में बने हुए हैं। पिछले हफ्ते सेंसेक्स में 0.9 फीसदी और निफ्टी में 0.8 फीसदी की गिरावट आई थी जो लगातार छठे हफ्ते गिरावट का सिलसिला था जोर अप्रैल 2020 के बाद से सबसे लंबी गिरावट थी।

अमेरिका के साथ जारी व्यापारिक तनाव और कंपनियों की सुस्त आय के कारण बाजार की धारणा पर असर पड़ा है। पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूस से भारत के निरंतर तेल आयात का हवाला देते हुए भारतीय निर्यात पर 25 फीसदी का नया टैरिफ लगाया। इस कदम ने दोनों देशों के बीच गतिरोध और बढ़ा दिया है। इससे पहले टैरिफ में बढ़ोतरी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर विवादास्पद टिप्पणियां देखने को मिली थी।

भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्रों में अधिक पहुंच के लिए वॉशिंगटन के दबाव के कारण भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ वार्ता रुक गई थी। नतीजतन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे निर्यात प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारत नुकसान में पहुंच गया है। अब सभी की निगाहें इस सप्ताह राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच होने वाली बैठक पर रहेंगी।

एसबीआई सिक्योरिटीज में तकनीकी एवं डेरिवेटिव अनुसंधान प्रमुख सुदीप शाह ने तकनीकी मोर्चे के बारे में कहा, तेजी बनाए रखने और आगे ले जाने के लिए निर्णायक कदम की आवश्यकता है। शुरुआती तेजी के बाद बाजार की गति तेजी से घटी है।  24,700-24,740 का दायरा निफ्टी के लिए प्रतिरोध का अहम स्तर होगा और 24,740 से ऊपर निकलने पर 24,900 तक और बढ़त की संभावना है। इसके विपरीत, 24,400-24,440 का क्षेत्र समर्थन का अहम स्तर होगा। बाजार में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात अनुकूल रहा और 2,237 शेयर चढ़े जबकि 1,930 में गिरावट आई।

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First Published - August 11, 2025 | 9:51 PM IST

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