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निवेशक परेशान और बाजार धड़ाम, अमेरिकी चुनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ी गिरावट

विश्लेषकों का मानना है कि अगर ट्रंप की जीत होती है तो राजकोषीय नीति में ढील दी जा सकती है मगर शुल्क में भारी वृद्धि होगी, जिससे मुद्रास्फीति और ब्याज दरें बढ़ेंगी।

Last Updated- November 04, 2024 | 9:38 PM IST
Stock Market Crash

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को लेकर अनिश्चितता, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और कंपनियों के निराशाजनक नतीजों से बेंचमार्क सूचकांक कारोबार के दौरान आज करीब 2 फीसदी टूट गया था मगर बाद में इसने नुकसान की आधी भरपाई कर ली। बाजार में उठापटक मापने वाला सूचकांक इंडिया वीआईएक्स 5 फीसदी चढ़कर 16.7 पर पहुंच गया जो 6 अगस्त के बाद का उच्चतम स्तर है।

सेंसेक्स सुबह के कारोबार में 1.9 फीसदी टूटकर 78,233 पर आ गया था मगर कारोबार की समाप्ति पर यह 942 अंक या 1.2 फीसदी के नुकसान के साथ 78,782 पर बंद हुआ। निफ्टी भी करीब 488 अंक फिसलने के बाद थोड़ा संभला और 309 अंक नीचे 23,995 पर बंद हुआ। दोनों सूचकांकों में 3 अक्टूबर के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट है।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 6.1 लाख करोड़ रुपये घटकर 422 लाख करोड़ रुपये रह गया। 27 सितंबर के उच्चतम स्तर से बाजार पूंजीकरण में करीब 36 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अक्टूबर में रिकॉर्ड बिकवाली की थी और आज भी उन्होंने 4,330 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे।

निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं क्योंकि कंपनियों की निराशाजन कमाई, चुनौतीपूर्ण मांग के माहौल और ऊंचे मूल्यांकन ने बाजार में स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी हैं। सितंबर तिमाही में निफ्टी 50 की करीब एक-तिहाई कंपनियों के नतीजे अनुमान से कमतर रहे।

वैलेंटिस एडवाइजर्स के संस्थापक और प्रबंध निदेशक ज्योतिवर्धन जयपुरिया ने कहा, ‘बाजार शुरुआत में महंगा था और आय अगर अच्छी नहीं है तो इसमें गिरावट तय है। इसके साथ ही कुछ विदेशी निवेशक भारत के बाजार से निवेश निकालकर दूसरे देशों में लगा रहे हैं। महामारी के बाद भारत सहित सभी देशों में भारी वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया, जिससे कंपनियों की आय वृद्धि में तेजी आई मगर अब इसे सामान्य करना होगा। अब वैसी वृद्धि दर नहीं रह सकती।’

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे और शेयर बाजार पर इसके संभावित प्रभाव के मद्देनजर निवेशक जोखिम उठाने से परहेज कर रहे हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए कमला हैरिस और डॉनल्ड ट्रंप के बीच कड़ा मुकाबला है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर ट्रंप की जीत होती है तो राजकोषीय नीति में ढील दी जा सकती है मगर शुल्क में भारी वृद्धि होगी, जिससे मुद्रास्फीति और ब्याज दरें बढ़ेंगी।

हालांकि उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व इस हफ्ते ब्याज दर में 25 आधार अंक की कटौती कर सकता है। 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 4 फीसदी से थोड़ी ऊपर बंद हुई। अक्टूबर में बॉन्ड यील्ड करीब 50 आधार अंक बढ़कर 4.28 फीसदी पहुंच गया था।

तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में बढ़ोतरी को एक महीने टालने से यूरोपीय ब्रेंट क्रूड 3.6 फीसदी बढ़कर 75.2 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने शनिवार को अपने भाषण में इजरायल को करारा जवाब देने की चेतावनी दी। इसका असर भी बाजार पर पड़ा है। डॉलर के मुकाबले रुपया सर्वकालिक निचले स्तर 84.1 पर आ गया।

अमेरिकी चुनाव और फेड के नतीजों के अलावा निवेशकों की नजर चीन पर भी है। निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि चीन की सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नए प्रोत्साहन उपायों की घोषणा कर सकती है। सेंसेक्स के करीब 20 फीसदी शेयर गिरावट पर बंद हुए।

रिलायंस इंडस्ट्रीज में 2.7 फीसदी और एचडीएफसी बैंक में 1.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इन दो शेयरों में गिरावट से सेंसेक्स का नुकसान बढ़ गया।

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज में रिटेल शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘हमें बाजार में अभी नरमी बने रहने की उम्मीद है। इस हफ्ते कई महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम होने वाले हैं और कई बड़ी कंपनियों के नतीजे भी आएंगे जिससे शेयर विशेष में उठापटक देखी जा सकती है।’

First Published - November 4, 2024 | 9:35 PM IST

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