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विदेशी पूंजी निकासी से टूटा सेंसेक्स

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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 1,817 करोड़ रुपये के शेयर बेचे जबकि देसी संस्थागत निवेशक 1,622 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे।

Last Updated- November 01, 2023 | 11:17 PM IST

विदेशी पूंजी की निकासी और फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले निवेशकों के सतर्क रुख के बीच बुधवार को स्थानीय शेयर बाजारों में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और दोनों मानक सूचकांक करीब आधा फीसदी तक टूट गए।

बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित सूचकांक सेंसेक्स 283.60 अंक यानी 0.44 फीसदी की गिरावट के साथ 63,591.33 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 324.47 अंक तक गिरकर 63,550.46 अंक पर आ गया था।

उधर, बेंचमार्क निफ्टी एक बार फिर 19,000 से नीचे बंद हुआ क्योंकि विदेशी फंडों ने बिकवाली जारी रखी। आईटी, स्टील व उपभोक्ता शेयरों में कमजोरी के कारण सूचकांक आधा फीसदी नीचे बंद हुआ। निफ्टी 90 अंक टूटकर 18,989 पर बंद हुआ। 28 जून के बाद से यह दूसरा मौका है जब इंडेक्स 19,000 से नीचे बंद हुआ। 26 अक्टूबर को निफ्टी 18,857 पर बंद हुआ था।

दोनों सूचकांक अपने-अपने सर्वोच्च स्तर से करीब 6-6 फीसदी नीचे है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 1,817 करोड़ रुपये के शेयर बेचे जबकि देसी संस्थागत निवेशक 1,622 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे।

सेंसेक्स की कंपनियों में एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, एचसीएल टेक्नोलॉजिज, नेस्ले, मारुति सुजूकी, जेएसडब्ल्यू स्टील, एनटीपीसी और लार्सन ऐंड टुब्रो में प्रमुख रूप से गिरावट रही। दूसरी तरफ सन फार्मा, बजाज फिनसर्व, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारतीय स्टेट बैंक और भारती एयरटेल के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

मेहता इक्विटीज लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) प्रशांत तापसे ने कहा, ‘निवेशकों ने लगातार दूसरे दिन अपना सतर्क रुख जारी रखा और शेयर में निवेश को कम करने पर ध्यान दिया।

धातु, ऊर्जा, वाहन एवं बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का जोर रहा जबकि दूरसंचार शेयरों में तेजी रही।’ व्यापक बाजार में बीएसई मिडकैप सूचकांक में 0.39 फीसदी की गिरावट आई जबकि स्मॉलकैप 0.10 फीसदी टूटा। धातु खंड में सर्वाधिक 1.45 फीसदी का नुकसान देखा गया।

अक्टूबर में भारत में विनिर्माण गतिविधियां सुस्त पड़ने की रिपोर्ट आई है। एसऐंडपी ग्लोबल इंडिया का मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अक्टूबर में गिरकर 55.5 पर आ गया, जो फरवरी के बाद से विस्तार की सबसे धीमी दर है। सितंबर में यह 57.5 पर रहा था।

जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘पीएमआई आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर में मांग सुस्त रही और एशियाई एवं यूरोपीय बाजारों की तुलना में भारत में अधिक सतर्कता देखी गई। हालांकि, पहली छमाही में कर संग्रह की अच्छी स्थिति और वाहन क्षेत्र में मांग उम्मीद के अनुरूप रहने से बाजार पर नाममात्र का नकारात्मक प्रभाव पड़ा।’

एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्केई एवं चीन का शांघाई कम्पोजिट चढ़कर बंद हुए जबकि हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग गिरावट पर रहा। यूरोपीय बाजार दोपहर के सत्र में मिलेजुले रुख के साथ कारोबार कर रहे थे। मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में बढ़त दर्ज की गई थी।

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First Published - November 1, 2023 | 11:17 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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