भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती की। विश्लेषकों के अनुसार यह कदम रिजर्व बैंक ने सिंतबर तिमाही में जीडीपी के 8.2 वृद्धि के मजूबत आंकड़ों के आधार पर उठाया है। बहरहाल, विश्लेषकों का अनुमान है कि अमेरिका के शुल्कों का प्रभाव कायम रहने के कारण बाजार में तेज रैली की उम्मीद नहीं है। बाजार की धारणा भूराजनीतिक स्थितियों के साथ कंपनियों की आमदनी और रुपये का दायरा नियंत्रित करेगा।
अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक व निदेशक यू आर भट्ट ने कहा कि रेट कट अप्रत्याशित नहीं था। भारतीय बाजारों ने उच्च आयात शुल्क की नई वास्तविकता के साथ रहना सीख लिया है। निर्यातक अपने बाजार का विविधीकरण कर रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के साथ और व्यापार समझौतों को लेकर जारी बातचीत के बीच निर्यातक नए बाजार ढूंढ़ सकते हैं।
भट्ट ने कहा, ‘मुद्रास्फीति जितनी कम हो सकती है, उतनी कम है। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की अनिश्चितता कुछ समय तक जारी रहेगी। रिजर्व बैंक महंगाई को लेकर ब्याज दरों के बारे में सही संकेत देना चाहता था। अमेरिकी फेड भी दरों में कटौती करने में बहुत आक्रामक नहीं हो सकता है। घरेलू स्तर पर रेट कट घरेलू अर्थव्यवस्था में रिजर्व बैंक और सरकार के विश्वास को दर्शाता है। बाजार ज्यादातर अल्पावधि से मध्यम अवधि में दायरे में रहेंगे, मौजूदा स्तरों से लगभग 2-3 प्रतिशत तक लाभ सीमित रहेगा।’
रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 26 के लिए अपने जीडीपी विकास पूर्वानुमान को बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया जबकि पहले यह पूर्वानुमान 6.8 प्रतिशत था। इसने वित्त वर्ष 26 के लिए महंगाई के पूर्वानुमान को 2.6 प्रतिशत से संशोधित कर 2 प्रतिशत कर दिया।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि रीपो दर में कटौती करने का केंद्रीय बैंक का सर्वसम्मत निर्णय मौद्रिक नीति समिति में आम सहमति को दर्शाता है कि गिरते रुपये के मामले में भी विकास को बढ़ावा देना जोखिम लेने लायक है।
विजयकुमार ने कहा, ‘वित्त वर्ष 26 के लिए 7.3 प्रतिशत जीडीपी विकास का अनुमान बाजार के लिए सकारात्मक है। बैंकों को कुल मिलाकर नीतिगत निर्णय पसंद आएगा, लेकिन दर में कटौती पर बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया देने की संभावना नहीं है। इसका कारण यह है कि ऐसा करने पर बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) पर दबाव आएगा और उन्हें जमा दर कम करने पर जमा जुटाने में कठिनाई होगी। रिजर्व बैंक की कटौती से वाहन और रियल एस्टेट जैसे दर-संवेदनशील क्षेत्रों को लाभ पहुंचने की संभावना है।’
सूचकांकों में बीएसई सेंसेक्स कैलेंडर वर्ष 2025 में लगभग 9 प्रतिशत बढ़ गया है। आंकड़ों के अनुसार मिड कैप 0.5 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स -7 प्रतिशत के लाभ के साथ पिछड़ गए हैं।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक व प्रमुख जी चोक्कालिंगम ने कहा कि बाजारों को रेट कट की उम्मीद थी, लेकिन रिजर्व बैंक ने जो घोषणा की, वह उन्हें मौजूदा स्तरों से ऊपर ले जाने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है।
चोक्कालिंगम ने कहा, ‘विनिर्माण क्षेत्र को अधिक प्रोत्साहन और खपत को बढ़ावा देने के लिए दरों में और कटौती की आवश्यकता है। सेंसेक्स और निफ्टी के बाहर के शेयरों के लिए नकदी की आवश्यकता है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी चिंताजनक है, जो विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई ) के धन को भारतीय बाजारों से दूर रखेगी। हालांकि लार्जकैप अपेक्षाकृत स्थिर रह सकते हैं।