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गिरे हुए स्मॉल-मिडकैप शेयर अब देंगे कमाल का रिटर्न? एक्सपर्ट्स ने बताया सही समय

अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक दबाव से महीनों तक जूझने के बाद स्मॉल और मिडकैप शेयरों में फिर जान लौटती दिख रही है, वैल्यूएशन सुधरने से FY27 को लेकर उम्मीदें बढ़ीं

Last Updated- February 05, 2026 | 7:48 AM IST
Mid & Smallcap Stocks

कई महीनों तक वैश्विक दबाव और अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ की मार झेलने के बाद अब छोटे और मझोले शेयरों के लिए माहौल सुधरता नजर आ रहा है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अंतिम रूप लेने के बाद बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि स्मॉल और मिडकैप शेयर एक अच्छे दौर में प्रवेश कर सकते हैं। उनका कहना है कि वैल्यूएशन अब आकर्षक हो गए हैं और वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) इन शेयरों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

जनवरी 2026 में आई थी तेज गिरावट

India-US trade agreement की घोषणा से पहले जनवरी 2026 में छोटे और मझोले शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 3.4 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 4.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसी दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स में 3.1 प्रतिशत की गिरावट आई। यह गिरावट ऐसे समय आई जब पिछले कैलेंडर वर्ष में मिडकैप शेयरों में 5.7 प्रतिशत की तेजी और स्मॉलकैप शेयरों में 5.6 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी।

गिरावट से बाजार की “हवा” निकली

विश्लेषकों के मुताबिक हालिया गिरावट से स्मॉल और मिडकैप शेयरों में मौजूद जरूरत से ज्यादा तेजी यानी “फ्रॉथ” खत्म हो गया है। इससे अब इन शेयरों में जोखिम और रिटर्न का संतुलन बेहतर हो गया है। स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीश बालिगा का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से जिन सेक्टरों को नुकसान हुआ था, उनमें अब दोबारा वैल्यूएशन बढ़ने यानी री-रेटिंग की उम्मीद है।

अंबरीश बालिगा ने कहा कि अमेरिका ने टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जिससे खासतौर पर छोटी कंपनियों को फायदा होगा। उन्होंने बताया कि ऑटो एंसिलरी, केमिकल और टेक्सटाइल जैसे अमेरिका से जुड़े सेक्टर ज्यादातर स्मॉल और मिडकैप सेगमेंट में ही आते हैं। उनका कहना है कि जैसे-जैसे समझौते की पूरी जानकारी सामने आएगी, वैसे-वैसे स्मॉलकैप शेयरों में हलचल बढ़ सकती है।

वैल्यूएशन अब सही स्तर पर

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक निफ्टी मिडकैप 100 इस समय 34.6 गुना के ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ (TTM) पी/ई पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके 5-साल के औसत 35.7 और 10-साल के औसत 40.1 से कम है। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 का TTM पी/ई 29.7 है, जो इसके 5-साल के औसत 27.5 से थोड़ा ऊपर लेकिन 10-साल के औसत 99 से काफी नीचे है। तुलना में निफ्टी 50 का TTM पी/ई 23.4 है।

विदेशी निवेशकों की रुचि लौटने के संकेत

विश्लेषकों का मानना है कि वैल्यूएशन में आई नरमी से विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) फिर से भारतीय बाजार की ओर रुख कर सकते हैं। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के एक दिन बाद 3 फरवरी को विदेशी निवेशकों ने ₹5,236.28 करोड़ के भारतीय शेयर खरीदे। इसके अगले दिन भी उन्होंने ₹29.79 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की।

FY27 को लेकर इक्विनॉमिक्स रिसर्च का भरोसा

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के फाउंडर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर जी. चोक्कलिंगम का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 स्मॉल और मिडकैप शेयरों का साल हो सकता है। उन्होंने कहा कि आकर्षक दाम, वैश्विक अस्थिरता में कमी और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी मिलकर इन शेयरों में मजबूत रिकवरी की जमीन तैयार कर रही है।

बोनांजा के अभि‍नव तिवारी की राय

बोनांजा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी ने कहा कि टैरिफ में राहत से स्मॉल और मिडकैप शेयरों का आउटलुक बेहतर हुआ है। उनके मुताबिक इससे निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी, वैश्विक व्यापार संबंध स्थिर होंगे और कंपनियों की कमाई में सुधार देखने को मिल सकता है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि मजबूत सेक्टरों में गिरावट के दौरान चुनिंदा खरीदारी करें और वैश्विक संकेतों से आने वाले उतार-चढ़ाव पर नजर रखें।

JM फाइनेंशियल ने बताए फायदे वाले सेक्टर

JM Financial Institutional Equities के अनुसार अमेरिका के टैरिफ घटने से इलेक्ट्रॉनिक्स, डायमंड और ज्वेलरी, टेक्सटाइल, मशीनरी, केमिकल और ऑटोमोबाइल सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है। ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि तेल-ईंधन, मेडिकल उपकरण, एयरक्राफ्ट, प्लास्टिक और केमिकल जैसे उत्पाद अमेरिका से आयात में बड़ा हिस्सा रखते हैं। इसके अलावा कृषि उत्पादों पर भी असर दिख सकता है, क्योंकि भारत अगर अमेरिकी कृषि आयात पर टैरिफ घटाता है तो घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

First Published - February 5, 2026 | 7:48 AM IST

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