facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

शेयर बाजार में 50,000 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील का दबाव, निवेशकों की दुविधा बढ़ी

Advertisement

बाजार में गिरावट और अनिश्चितता के कारण निजी इक्विटी फर्मों और संस्थागत निवेशकों को शेयर बेचने में कठिनाई, थोक सौदों की संख्या घटी

Last Updated- February 17, 2025 | 11:09 PM IST
Stock Market

आज से लेकर 10 अप्रैल तक करीब 6 अरब डॉलर (50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा) मूल्य के शेयर खरीद-बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएंगे। आम तौर पर बाजार में शेयरों की इतनी बड़ी मात्रा को बड़े थोक सौदों के जरिये निपटाया गया है।

मगर बाजार की चुनौतिपूर्ण स्थिति को देखते हुए आईपीओ से पहले या एंकर बुक के तौर पर निवेश करने वाली निजी इक्विटी (पीई) फर्मों और संस्थागत निवेशकों को अपने शेयरों को बेचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

बाजार के भागीदारों का कहना है कि शेयर कीमतों में तेज गिरावट के कारण बड़े थोक (ब्लॉक) सौदे करना कठिन हो गया है। कई र्पीई फर्में और अन्य प्रमुख निवेशक भी इस दुविधा में हैं कि कम मूल्य पर शेयर बेचें या बाजार में सुधार की उम्मीद में अपने शेयर बनाए रखें।

यह दुविधा पहले से ही आंकड़ों में दिख रही है। जनवरी में 26,000 करोड़ रुपये से कम के थोक सौदे हुए, जो 2024 के मासिक औसत 50,763 करोड़ रुपये से काफी कम है। फरवरी में भी यही रूझान रहा और सौदों की मात्रा और घट गई। इस महीने 14 फरवरी तक केवल 5,023 करोड़ रुपये मूल्य के थोक सौदे हुए।

सितंबर और दिसंबर तिमाही में कंपनियों के कमजोर नतीजे, डॉलर में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड में तेजी से बाजार में गिरावट आने से शेयरों के थोक सौदे करना कठिन हो गया है। इसके अलावा डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका की नीतियों में बदलाव के कारण भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों में अपना निवेश घटा रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव में 2025 में अभी तक निफ्टी 3 फीसदी टूट चुका है। अक्टूबर से ही सूचकांक में गिरावट का रुख बना हुआ है और उच्चतम स्तर से अभी तक यह 11 फीसदी नीचे आ चुका है। इस साल अभी तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 1.04 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है।

एसबीआई कैपिटल मार्केट्स में इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के समूह प्रमुख दीपक कौशिक ने कहा, ‘कई शेयर जिनकी लॉक-इन अवधि खत्म हो रही है, वे अपने निर्गम मूल्य से नीचे कारोबार कर रहे होंगे। अगर ऐसा है तो मुझे नहीं लगता कि बहुत सारे थोक सौदे होंगे।

शेयर बिक्री के लिए मूल्यांकन, बाजार की भावना और उठापटक महत्त्वपूर्ण कारक हैं। बाजार में मौजूदा अस्थिरता ने उचित मूल्य का पता लगाना और निवेश निकलना मुश्किल बना दिया है।’हालांकि कुछ बैंकरों का मानना है कि ब्लूचिप या सूचीबद्ध होने के बाद अच्छा प्रदर्शन करने वाले शेयरों में थोक सौदे होने की संभावना है।

जेएम फाइनैंशियल के प्रबंध निदेशक चिराग नेगांधी ने कहा, ‘लॉक इन अवधि खत्म होने के बाद शेयरों की बिक्री उसकी कीमत और निवेशक के नजरिये पर निर्भर करती है। जो शेयर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, उसमें मुनाफावसूली हो सकती है।’ हालांकि कई शेयरधारक बाजार में उठापटक कम होने का इंतजार करेंगे।

कौशिक ने कहा, ‘कुछ कंपनियों ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की अपनी योजना बाजार की स्थिति देखकर फिलहाल टाल दी है। अमेरिका की व्यापार नीति में स्थिरता आने तक बाजार में उथलपुथल बनी रह सकती है और थोक सौदे तथा आईपीओ का बाजार नरम रह सकता है।’

थोक सौदे या ब्लॉक डील का मतलब शेयरधारकों द्वारा सूचीबद्ध कंपनियों में बड़ी मात्रा में शेयरों की खरीद-बिक्री से है। इसके लिए स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा अलग से विंडो उपलब्ध कराई जाती है।

Advertisement
First Published - February 17, 2025 | 11:09 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement