म्युचुअल फंड उद्योग ने आगामी बजट के लिए अपनी मांगों में दीर्घावधि इक्विटी निवेश पर कराधान में बदलाव की मांग की है। उसने निवेशकों के लंबे समय तक निवेश से जुड़ाव को प्रोत्साहित करने के लिए ज्यादा छूट सीमा और रियायती कराधान का प्रस्ताव दिया है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) ने अपने मांग पत्र में होल्डिंग अवधि के आधार पर इक्विटी निवेश के लिए अलग टैक्स ढांचे का प्रस्ताव दिया है।
उसका सुझाव है कि एक साल से ज्यादा और तीन साल तक रखे गए इक्विटी निवेश पर एक वित्त वर्ष में 2,00,000 रुपये से अधिक के मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगना चाहिए। अभी ऐसे निवेश पर एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के फायदे पर 12.5 प्रतिशत का दीर्घावधि पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर लगता है।
उसने तीन साल से अधिक रखे गए निवेश पर होन वाले पूंजीगत लाभ को कर छूट का प्रस्ताव किया है। विकल्प के तौर पर उसका सुझाव है कि पांच साल से ज्यादा समय तक रखे गए इक्विटी-ओरिएंटेड म्युचुअल फंडों की यूनिटों पर दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर से छूट दी जाए।
एम्फी ने कहा है कि मौजूदा टैक्स ढांचे के कारण ज्यादातर निवेशक 12 महीने या 24 महीने की अवधि के बाद अपना निवेश निकाल लेते हैं, जिससे फंड उद्योग से काफी पूंजी बाहर चली जाती है।
एम्फी ने कहा, ‘म्युचुअल फंड उद्योग में स्थिर दीर्घावधि पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए पांच साल से ज्यादा समय तक रखी गई यूनिटों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स से छूट दी जानी चाहिए।