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शेयर बाजार में सुधार के बीच IPOs की बहार, 66 कंपनियां जुटाएंगी ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा

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भारत-पाकिस्तान तनाव और ट्रंप के टैरिफ के लिहाज से बाजार का बुरा दौर पीछे छूट जाने की उम्मीदों के बीच कंपनियां आने वाले महीनों में अपने आईपीओ लाने की तैयारी में जुट गई हैं।

Last Updated- May 25, 2025 | 9:22 PM IST
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शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव भरी तेजी से भारत के प्राथमिक बाजार की नैया भी तैरने लगी है। भारत-पाकिस्तान तनाव और डॉनल्ड ट्रंप के टैरिफ के लिहाज से शेयर बाजार का बुरा दौर पीछे छूट जाने की उम्मीदों के बीच 60 से ज्यादा कंपनियां आने वाले महीनों में अपने आईपीओ लाने की तैयारी में जुट गई हैं। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि 66 कंपनियों को 1.02 लाख करोड़ रुपये के आईपीओ लाने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की मंजूरी मिल गई है। इनमें, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (15,000 करोड़ रुपये), क्रेडिला फाइनैं​शियल सर्विसेज (5,000 करोड़ रुपये), जेएसडब्ल्यू सीमेंट (4,000 करोड़ रुपये), मंजूश्री टेक्नोपैक (3,000 करोड़ रुपये), नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी (संभावित आईपीओ आकार 3,000 करोड़ रुपये) और वेरिटास फाइनैंस (2,800 करोड़ रुपये) सूचीबद्ध होने के लिए इंतजार कर रही कंपनियों में शामिल हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर शेयर बाजार में ​​स्थिति अनुकूल रही तो अगले 6 से 8 महीनों के दौरान प्राथमिक बाजार में बड़ा सुधार देखा जा सकता है। अरिहंत कैपिटल मार्केट्स के चेयरमैन अशोक जैन ने कहा, ‘अगर व्यापक सूचकांक अपने मौजूदा स्तरों पर बने रहते हैं या ऊपर बढ़ते हैं तो निवेशक धारणा सुधर सकती है और आईपीओ लाने के लिए कंपनियां प्रोत्साहित हो सकती हैं। कुल मिलाकर, मजबूत और सकारात्मक शेयर बाजार प्राथमिक बाजार की मजबूती के लिए जरूरी है। अगर मौजूदा ​स्थिति बनी रही तो आगामी महीनों में निवेशकों के लिए परिदृश्य अनुकूल नजर आता है।’

दलाल पथ पर सेंसेक्स और निफ्टी-50 ने अपने अप्रैल के निचले स्तरों से क्रमशः 13 फीसदी और 13.6 फीसदी का सुधार दर्ज किया है जबकि निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांकों में इस अवधि में 18.6 तथा 20.8 फीसदी की तेजी आई है। इसका असर आईपीओ बाजार पर भी दिखा है, जिसमें कई महीनों के सूखे के बाद मेनबोर्ड यानी प्रमुख आईपीओ आने शुरू हो गए हैं।

जनवरी और फरवरी 2025 में मुख्य बाजार के 10 आईपीओ आए जबकि मार्च में एक भी नहीं आया और अप्रैल में सिर्फ एक कंपनी (एथर एनर्जी) ने अपना आईपीओ पेश किया। इसी तरह का रुझान सेबी को कंपनियों के आईपीओ के आवेदनों में भी देखा गया। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि 25 से अधिक कंपनियां ने जनवरी में सेबी के पास अपने डीआरएचपी जमा कराए। फरवरी में ऐसे आवेदनों की संख्या घटकर 13 और मार्च में 10 रह गई थी मगर अप्रैल में बढ़कर 20 हो गई।

मई की बात करें तो दो बड़े आईपीओ – बोराना वीव्स और बेलराइज इंडस्ट्रीज आए हैं जिन्हें निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली। उदाहरण के लिए बोराना वीव्स के आईपीओ को 148 गुना और बेलराइज इंडस्ट्रीज को 43 गुना अभिदान मिला। इस सप्ताह चार अन्य प्रमुख आईपीओ – एजिस वोपैक टर्मिनल्स, श्लॉस बेंगलूरु, प्रोस्टार्म इन्फो सिस्टम्स और स्कोडा ट्यूब्स बाजार में आएंगे। विश्लेषकों का कहना है कि भारत-पाकिस्तान से जुड़ी चिंताओं के बीच जिन कंपनियों ने पूंजी जुटाने की अपनी योजनाओं को रोक दिया था, उन्होंने दोनों देशों के बीच ‘संघर्ष विराम’ की घोषणा होते ही बाजार हालात का जायजा लेना शुरू कर दिया।

प्राइम डेटाबेस के अनुसार कुल मिलाकर 68 कंपनियों ने बाजार नियामक को अपने दस्तावेज सौंपे हैं और वे मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। इनमें टाटा कैपिटल (20,000 करोड़ रुपये), एचडीबी फाइनैंशियल सर्विसेज (12,500 करोड़ रुपये), डॉर्फ-केटल केमिकल्स इंडिया (5,000 करोड़ रुपये), फिजिक्सवाला (4,600 करोड़ रुपये), हीरो फिनकॉर्प (3,668.13 करोड़ रुपये), प्रेस्टीज हॉस्पिटैलिटी (2,700 करोड़ रुपये) और वीवर्क इंडिया मैनेजमेंट (2,500 करोड़ रुपये) मुख्य रूप से शामिल हैं।

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First Published - May 25, 2025 | 9:22 PM IST

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