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मैग्नेट रिसाइक्लिंग पर जोर, पीएलआई योजना में शामिल करने की सिफारिश

चीन ने आरईपीएम का भारत को निर्यात सीमित कर दिया है। इसकी वजह से भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग के उत्पादन पर असर पड़ा है।

Last Updated- October 22, 2025 | 9:03 AM IST
rare-earth magnet

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उपयोग किए जा चुके मैग्नेट (चुंबक) की रिसाइक्लिंग को प्रस्तावित उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) में शामिल किए जाने का अनुरोध किया है। मंत्रालय ने भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) से कहा है कि भारत में दुर्लभ स्थायी मैग्नेट (आरईपीएम) के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए इसे पीएलआई में शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि देश पहले से ही ई-कचरा पैदा करने के मामले में दुनिया के शीर्ष 3 देशों में शामिल हो चुका है। इस मामले से जुड़े कई सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कहा कि अधिकांश घरेलू मोबाइल विनिर्माण कंपनियां रिसाइकल आरईपीएम का उपयोग करती हैं, लेकिन भारत में सुनने योग्य (हियरेबल्स) और पहनने योग्य (वियरेबल्स) उपकरणों का उत्पादन करने वाली कंपनियों पर कुछ असर पड़ा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘सुनने योग्य और पहनने योग्य सामान बनाने वाली कंपनियों ने चीन और अन्य देशों दोनों में विभिन्न कंपनियों से वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था कर ली थी। इसकी वजह से कुल मिलाकर असर कम था।’

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी, इंटरनैशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) और उसके सहयोगी संगठनों की ग्लोबल ई-कचरा मॉनिटर 2022 रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2022 में लगभग 41.7 लाख टन ई-कचरा पैदा किया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि इसके बाद भारत अब विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ई-कचरा उत्पादन करने वाला देश बन गया है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि देश द्वारा 2070 तक कार्बन तटस्थता का लक्ष्य रखने और इलेक्ट्रिक गतिशीलता की ओर अपने बदलाव को तेज करने के साथ की कवायद में है, वहीं आने वाले वर्षों में ई-कचरे की एक भारी मात्रा पैदा होने की संभावना है, जिसमें उपयोग किए गए दुर्लभ स्थायी मैग्नेट (आरईपीएम) भी शामिल हैं।

इसे देखते हुए आईटी मंत्रालय ने सिफारिश की थी कि एमएचआई प्रस्तावित पीएलआई का विस्तार करे और इस्तेमाल किए जा चुके मैग्नेट की रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए इस योजना में शामिल करे। अन्य अधिकारी ने कहा, ‘रिसाइक्लिंग को पीएलआई योजना में शामिल किए जाने से इस उद्योग को औपचारिक ढांचे के तहत लाने में मदद मिलेगी।’

घरेलू आरईपीएम को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना में सफल बोलीदाताओं (निजी कंपनियों) के लिए वित्तीय प्रोत्साहन का प्रस्ताव है, जिसमें पूंजी संबंधी सब्सिडी और बिक्री पर आधारित प्रोत्साहन शामिल हैं। यह कंपनियां 6,000 टन प्रति वर्ष संयुक्त उत्पादन क्षमता वाले 5 विनिर्माण संयंत्र स्थापित करेंगी। इस योजना में एमएचआई नोडल मंत्रालय है और इस समय योजना पर विभिन्न मंत्रालयों के बीच मंत्रणा चल रही है।

बहरहाल भारी उद्योग मंत्रालय ने आईटी मंत्रालय से कहा है कि इस योजना का ध्यान घरेलू आरईपीएम विनिर्माण को प्रोत्साहन देने तक सीमित है। भारी उद्योग मंत्रालय ने आईटी मंत्रालय को बताया कि मैग्नेट या महत्त्वपूर्ण खनिज की रिसाइक्लिंग खनन मंत्रालय के अंतर्गत आता है। आईटी मंत्रालय और भारी उद्योग मंत्रालय ने इस मसले पर बिज़नेस स्टैंडर्ड के सवालों का जवाब नहीं दिया।

इस साल अप्रैल से चीन ने आरईपीएम का भारत को निर्यात सीमित कर दिया है। इसकी वजह से भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग के उत्पादन पर असर पड़ा है। आरईपीएम का इस्तेमाल वाहनों के कई कल पुर्जों को बनाने में किया जाता है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों के ट्रैक्शन मोटरों में इसका इस्तेमाल होता है।

First Published - October 22, 2025 | 9:03 AM IST

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