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Equity Market: भारतीय शेयरों में रिटेल निवेशकों का हिस्सा 8 फीसदी बढ़ा

मॉर्गन स्टैनली ने कहा कि यह आंकड़ा अगले कुछ वर्षों में और बढ़ने की संभावना है क्योंकि अभी भी भारतीय परिवारों का शेयरों में काफी कम निवेश है।

Last Updated- November 11, 2024 | 10:28 PM IST
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पिछले 10 साल में भारतीय इक्विटी में खुदरा स्वामित्व 8 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 23.4 फीसदी पर पहुंच गया। यह जानकारी मॉर्गन स्टैनली के हालिया नोट से मिली। मॉर्गन स्टैनली ने कहा कि यह आंकड़ा अगले कुछ वर्षों में और बढ़ने की संभावना है क्योंकि अभी भी भारतीय परिवारों का शेयरों में काफी कम निवेश है।

भारत की जनसांख्यिकी, नीतिगत ढांचा, निवेशक शिक्षा और सकारात्मक वास्तविक दरों के कम रहने से भारत में इक्विटी के प्रति निवेशकों का रुझान और बढ़ेगा।

जोनाथन एफ गार्नर (एशिया प्रमुख और उभरते बाजार रणनीतिकार) की अगुआई में मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों ने लिखा कि लागत के हिसाब से परिवारों की संपत्ति का सिर्फ तीन फीसदी इक्विटी में लगा है। इसमें संस्थापकों की इक्विटी होल्डिंग शामिल नहीं है।

ये आंकड़े बढ़कर दो अंकों में जा सकते हैं। अगर हम पिछले दशक में संपत्ति सृजन पर नजर डालें (हमारा अनुमान है कि भारतीय परिवारों ने 8.5 अरब डॉलर की संपदा जोड़ीं) तो इसमें करीब 11 फीसदी इक्विटी से हुई। संपत्ति सृजन में इक्विटी के ऐसे गैर-आनुपातिक हिस्से से हमारी राय की पुष्टि होती है।

हालांकि मॉर्गन स्टैनली को उम्मीद है कि बाजार और कंपनियों की गतिविधियां आगामी वर्षों में बढ़ेंगी। लेकिन इक्विटी बाजार का रिटर्न अगले 10 साल में मद्धम रहने की संभावना है और यह निचले दो अंकों में रह सकता है।

मॉर्गन स्टैनली ने कहा कि इक्विटी निर्गम निम्न स्तर से थोड़ा ऊपर हैं और हमें पूंजीगत खर्च भी नजर आ रहा है, ऐसे में हमें उम्मीद है कि इक्विटी निर्गम आगामी पांच साल में नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे। (पिछला उच्चस्तर 2009 में बाजार पूंजीकरण का 3.5 फीसदी था)। बैंकों और बॉन्ड बाजारों से कॉरपोरेट उधारी बढ़ने की ओर है जो पिछले साल घटकर निचले स्तर पर चली गई थी।

मॉर्गन स्टैनली ने कहा कि आगामी पांच वर्षों में नई ऊंचाई हमारा आधार है। इसके साथ ही बाजार में नकदी और डेरिवेटिव में ट्रेडिंग गतिविधियां बढ़ सकती हैं क्योंकि बाजार के भागीदार अगले कुछ सालों में काफी आक्रामक तरीके से पोर्टफोलियो में फेरबदल कर सकते हैं। यह एक संकेत है कि तेजड़ियों का बाजार परिपक्वता के लिए रफ्तार पकड़ रहा है।

कॉरपोरेट आय और एफआईआई निवेश

गार्नर का मानना है कि भारतीय कंपनी जगत की आय को इमर्जिंग प्राइवेट कैपेक्स साइकल, कॉरपोरेट बैलेंस शीट में कर्ज घटने और डिस्क्रिशनरी उपभोग में ढांचागत बढ़ोतरी से सहारा मिला है। उन्होंने कहा कि आय के परिदृश्य से भारतीय इक्विटी का मूल्यांकन स्वीकार करने योग्य लगता है।

उन्होंने कहा कि आय का रुझान अभी भी नॉमिनल जीडीपी से नीचे है। ऐसे में इस चक्र में और बढ़त की गुंजाइश है। अनुमान है कि अगले चार-पांच साल में आय में 18-20 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के हिसाब से बढ़ोतरी होगी जिससे बाजार और आगे जा सकते हैं।

मॉर्गन स्टैनली के मुताबिक ऐसी सकारात्मक चीजें विदेशी निवेशकों को भारतीय इक्विटी की ओर आकर्षित करना जारी रख सकती है। इसके अलावा इंडेक्स का बढ़ता भार भी निवेशकों के लिए भारत के इक्विटी बाजार को आकर्षक बनाता है और उनके लिए इससे दूर रहना मुश्किल है।

अहम जोखिम

मॉर्गन स्टैनली के नोट के मुताबिक लंबी अवधि में अफसरशाही, न्यायपालिका, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण में भारत क्षमता अवरोध का सामना कर सकता है। अन्य जोखिमों में भूराजनीतिक, टेक उद्योग पर आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का प्रभाव, कृषि क्षेत्र में कम उत्पादकता, जलवायु परिवर्तन, राज्यों के स्तर पर राजकोषीय चुनौतियां और पर्याप्त सुधारों का अभाव शामिल है। गार्नर ने कहा कि कई स्मॉल और मिडकैप शेयरों का मूल्यांकन ज्यादा लग रहा है। लेकिन हम पूरे बाजार के मूल्यांकन को लेकर चिंतित नहीं हैं।

हमारी राय यह है कि हम अभी आय चक्र के मध्य में हैं। अल्पावधि के लिहाज से सख्त नीतिगत माहौल वृद्धि के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, खास तौर से तब जब विश्व में नरमी देखने को मिले। वैश्विक वृद्धि में खासी नरमी या तेल की कीमतों में तीव्र बढ़ोतरी से भारत की वृद्धि के साथ-साथ फंडिंग प्रभावित हो सकती है।

First Published - November 11, 2024 | 10:28 PM IST

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