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जीनोम टेस्ट हुए सस्ते और सुलभ, रुटीन टेस्ट के दाम 30 से 40 प्रतिशत तक घटे

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लागत में यह तेज गिरावट तकनीकी प्रगति, आधुनिक प्लेटफॉर्मों, बढ़ती परीक्षण मात्रा और स्थानीय कंपनियों के प्रवेश आदि की वजह से संभव हुई है

Last Updated- October 06, 2025 | 1:48 AM IST

जीनोमिक टे​स्टिंग कभी महंगी और विशिष्ट सेवा मानी जाती थी। यह अब पूरे भारत में तेजी से सस्ती और सुलभ हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में रुटीन टेस्ट की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत की गिरावट आई है।

कैंसर के जोखिम का पता लगाने के लिए बीआरसीए1/2 और नॉन-इनवेसिव प्रीनटाल टे​स्टिंग (एनआईपीटी) जैसे रुटीन टेस्ट की कीमतें अब 5,000 और 20,000 रुपये के बीच हैं। यहां तक कि आधुनिक प्रक्रियाएं, जैसे कि होल एक्सोम सीक्वेंसिंग (जिनकी कीमत पहले लगभग 25,000 रुपये थी) अब 18,000 रुपये तक में उपलब्ध है। संपूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग की लागत (जो वर्तमान में लगभग 60,000 रुपये है) अगले तीन वर्षों में 20,000 रुपये से कम रह जाने की उम्मीद है।

लागत में यह तेज गिरावट तकनीकी प्रगति, आधुनिक प्लेटफॉर्मों, टेस्टों की बढ़ती संख्या और स्थानीय कंपनियों के प्रवेश आदि की वजह से संभव हुई है। अस्पताल और डायग्नोस्टिक श्रृंखलाएं तेजी से अपनी क्षमता का विस्तार कर रही हैं, महानगरों से आगे बढ़कर मझोले और छोटे शहरों में प्रवेश कर रही हैं, साथ ही वे बायोइन्फोर्मेटिक्स और एआई में निवेश कर रही हैं।

अपोलो हॉस्पिटल्स अब तक 11,000 से ज्यादा जीनोमिक कंसल्टेशन आयोजित कर चुका है। वह 12 शहरों में जीनोमिक्स संस्थान चलाता है। गुवाहाटी और भुवनेश्वर सहित पांच और शहरों में इसका विस्तार कर रहा है। अपोलो हॉस्पिटल्स की उपाध्यक्ष प्रीता रेड्डी ने कहा, ‘11,000 से ज्यादा जीनोमिक परामर्श आनुवंशिक जानकारी को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा में शामिल करने के प्रभाव के बारे में बताते हैं। हम जीनोमिक परीक्षण को सुलभ और मानक स्वास्थ्य सेवा का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

डायग्नोस्टिक क्षेत्र की बड़ी कंपनियां भी विस्तार कर रही हैं। एजिलस डायग्नोस्टिक्स की रिपोर्ट के अनुसार जीनोमिक्स सेगमेंट अब उसके कुल राजस्व में 5-7 प्रतिशत का योगदान देता है। तीन साल पहले यह 2 प्रतिशत से भी कम था। रेडक्लिफ लैब्स का अनुमान है कि यह 30-40 प्रतिशत है और छोटे शहरों में मांग तेजी से बढ़ रही है। मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर ने तीन साल पहले इस क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद से 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी है। डॉ. लाल पैथलैब्स ने हाल में अपने जीनइवॉल्व डिवीजन के माध्यम से पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए इसे 500 से अधिक जीनोमिक परीक्षण तक पहुंचा दिया है।

उद्योग के अनुमानों के अनुसार भारत का जीनोमिक डायग्नोस्टिक्स बाजार 2024 में 55 करोड़ डॉलर का था और इसके 2030 तक लगभग तीन गुना बढ़कर 1.5 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है। अभी यह 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। चिकित्सकों के इसे अपनाने में वृद्धि हो रही है और परीक्षणों की घटती कीमतों ने भी इस बाजार की लोकप्रियता में इजाफा किया है।

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First Published - October 5, 2025 | 10:28 PM IST

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