प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को एक कथित मार्केटिंग घोटाले के संबंध में एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज की 757.8 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की। इसने दावा किया कि एमवे बहु-स्तरीय मार्केटिंग घोटाला कर रही थी। ईडी ने एमवे के 36 विभिन्न खातों से 345.94 करोड़ रुपये की बैंक जमा तथा 411.83 करोड़ रुपये की अचल और चल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है।
आर्थिक मामलों के विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2021-22 में (दिसंबर 2021 तक) ईडी अस्थायी रूप से 8,989.3 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर चुका था। निर्णायक प्राधिकरण ने करीब दो-तिहाई या 5,779.1 करोड़ रुपये की पुष्टि की।
आर्थिक मामलों के विभाग की रिपोर्ट के अनुसार निर्णायक प्राधिकरण द्वारा इस अस्थायी कुर्की की पुष्टि किए जाने के बाद, जिसमें यह माना जाता है कि यह संपत्ति धन शोधन में शामिल है, प्रवर्तन निदेशालय उस संपत्ति को कब्जे में ले लेता है और दोषी उस संपत्ति का लाभ नहीं उठाता और इस तरह यह अस्थायी उपाय नहीं रह जाता।
वर्ष 2020-21 में अस्थायी कुर्की आदेश (पीएओ) के अंतर्गत कुर्क की गई 14,107.6 करोड़ रुपये की राशि में से आधी या 7,104.2 करोड़ रुपये की पुष्टि निर्णायक प्राधिकरण द्वारा की गई थी।
बिजनेस स्टैंडर्ड के एक विश्लेषण में पाया गया है कि इस सरकारी जांच निकाय ने पिछले पांच साल में अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने वर्ष 2016-17 में 4,567 समन जारी किए, 226 तलाशी लीं और 31 गिरफ्तारियां कीं। वर्ष 2021-22 में (दिसंबर 2021 तक) में धन शोधन निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत 11,252 समन जारी किए गए, 572 तलाशी ली गईं और 54 गिरफ्तारियां की गई थीं। इससे पिछले साल प्रवर्तन निदेशालय ने 78 गिरफ्तारियां की थीं।
इसके अलावा विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि वर्ष 2005 के बाद से ईडी द्वारा अस्थायी रूप से कुर्क की गई 96,868.85 करोड़ रुपये की परिसंपत्ति में से 67,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की परिसंपत्ति पिछले चार साल में अस्थायी रूप से कुर्क की गई थी।
अलबत्ता, इस अवधि के दौरान पीएओ के न्यायिक निर्णय में गिरावट आई। उदाहरण के लिए वर्ष 2018-19 में, ईडी द्वारा अस्थायी रूप से कुर्क किए गए 15,490 करोड़ रुपये में से 13,175 करोड़ रुपये को निर्णायक प्राधिकरण ने स्वीकृति दी थी। लेकिन वर्ष 2019-20 में 28,815 करोड़ रुपये में से केवल 7,449 करोड़ रुपये को ही निर्णायक प्राधिकरण द्वारा स्वीकृति दी गई थी।
वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 में (दिसंबर 2021 तक) स्वीकृत की गई संपत्ति का अनुपात क्रमश: 50 प्रतिशत और 64 प्रतिशत था।