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तीन साल में निकलने के प्रावधान पर भारत व अमेरिका सहित IPEF देशों की नजर

भारत अभी इसके 4 प्रमुख क्षेत्रों में से 3- व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और स्वच्छ अर्थव्यवस्था में ही शामिल हुआ है

Last Updated- July 09, 2023 | 10:23 PM IST
IPEF

इंडो पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF) में 3 साल में बाहर निकलने का प्रावधान डाला जा सकता है, जिससे 14 देशों के इस आर्थिक पहल में देशों को इससे बाहर निकलने की सहूलियत मिल सके। इस मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी। भारत व अमेरिका सहित IPEF के सदस्य देश इस सिलसिले में फैसले पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अभी अंतिम फैसला नहीं किया गया है।

उपरोक्त उल्लिखित लोगों में से एक ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘बाहर निकलने के प्रावधान को शामिल करने पर चर्चा हुई है। अगर किसी भी समय में कोई देश महसूस करता है कि आर्थिक पहल IPEF उस देश के पक्ष में लाभ नहीं पहुंचा रहा है, ऐसे मामले में समझौते पर हस्ताक्षर के 3 साल के भीतर इससे बाहर निकलने का विकल्प होगा।’

इस मामले को अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत अभी इसके 4 प्रमुख क्षेत्रों में से 3- व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और स्वच्छ अर्थव्यवस्था में ही शामिल हुआ है। भारत ने पिछले साल IPEF के ट्रेड पिलर से संबंधी वार्ता से कदम पीछे खींच लिए थे और कहा था कि यह साफ नहीं है कि भारत सहित सदस्य देशों को क्या लाभ होगा।

Also Read: IPEF के 14 देशों ने पूरी की सप्लाई चेन पर बातचीत, समझौते में भारत भी शामिल

भारत इस समय ऑब्जर्वर की स्थिति में है और ट्रेड पिलर में शामिल होने पर अंतिम फैसला अभी होना है। इस मामले में वाणिज्य विभाग जल्द ही अंतिम फैसला करेगा, जो भारत के पक्ष पर प्रधानमंत्री कार्यालय से मंजूरी की कवायद में लगा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की आर्थिक पहल में बाहर निकलने का प्रावधान पहले भी रखा गया है, हालांकि इसकी शर्तें देखना अहम है।

इंडियन काउंसिल फार रिसर्च आन इंटरनैशनल इकनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) में प्रोफेसर अर्पिता मुखर्जी ने कहा कि हमने पहले भी क्षेत्रीय व्यापार समझौतों जैसे रीजनल कंप्रेहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) में इस तरह के प्रवेश व बाहर निकलने के प्रावधान देख चुके हैं। दरअसल ब्रिटेन भी यूरोपीय संघ से बाहर निकल गया था। बहरहाल कुछ नियम एवं शर्तों के तहत ही इससे बाहर हुआ जा सकता है।

First Published - July 9, 2023 | 10:23 PM IST

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