facebookmetapixel
Advertisement
80वां स्वतंत्रता दिवस: PM मोदी ने 13वीं बार लाल किले पर फहराया तिरंगा, राजस्थानी पगड़ी में आए नजरलाल किले की प्राचीर से बोले PM: देश अब छोटे सपनों से नहीं चलेगा, बड़े संकल्प के साथ ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ रहे हम80वां स्वतंत्रता दिवस: राजघाट पर बापू को नमन के बाद लाल किला पहुंचे PM मोदी, पहली बार वंदे मातरम गाया गयाअमेरिकी कोर्ट ने एंट्रिक्स के खिलाफ देवास का फैसला रखा बरकरार, 56.25 करोड़ डॉलर का अवॉर्ड कायमएअर इंडिया A320 का हाइड्रोलिक सिस्टम हुआ था फेल, 4 सेकंड तक नियंत्रण से बाहर रहा विमान: एयरबसमहिंद्रा का भारी ट्रकों पर बड़ा दांव, बाजार हिस्सेदारी 5% करनी की तैयारी; नई डीलरशिप जोड़ेगी कंपनीAMCA लड़ाकू विमान के लिए रिलायंस और रोल्स-रॉयस ने मिलाया हाथ, भारत में बनेगा फाइटर जेट इंजनवैश्विक पटल पर चमका भारत, प्यू रिसर्च के सर्वे में दुनिया के कई देशों ने जताई सकारात्मक रायस्वतंत्रता दिवस पर घूमने का बढ़ा क्रेज, होटल बुकिंग 20% तक बढ़ी; युवाओं में ट्रैवल का जोशलंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की मांग बढ़ी, ब्याज दर स्थिर रहने की उम्मीद से मिला सहारा

जरूरी टेक्नॉलजी में दक्षिण कोरिया के साथ साझेदारी का विस्तार चाहता है भारत: जयशंकर

Advertisement

जयशंकर ने अपने समकक्ष चो ताये-यूल के साथ 10वीं भारत-दक्षिण कोरिया संयुक्त आयोग बैठक (जेसीएम) की सह-अध्यक्षता के दौरान यह बात कही।

Last Updated- March 06, 2024 | 11:21 PM IST
India's Foreign Minister Subrahmanyam Jaishankar

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत, दक्षिण कोरिया के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक समसामयिक बनाने के लिए महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों, सेमीकंडक्टर और हरित हाइड्रोजन जैसे नये क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी का विस्तार करना चाहता है।

जयशंकर ने अपने समकक्ष चो ताये-यूल के साथ 10वीं भारत-दक्षिण कोरिया संयुक्त आयोग बैठक (जेसीएम) की सह-अध्यक्षता के दौरान यह बात कही। जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दक्षिण कोरिया के दौरे के वक्त द्विपक्षीय संबंध विशेष रणनीति साझेदार की ऊंचाई पर पहुंचे थे।

विदेश मंत्री ने कहा, ”यह जरूरी है कि हम उसे बनाए रखें। बीते वर्षों में हम और मजबूत हुए हैं। हम वास्तव में एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण भागीदार बन गए हैं और हमारा द्विपक्षीय आदान-प्रदान, व्यापार, निवेश, रक्षा और विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग में तेजी से वृद्धि हुई है और हमने सहयोग के पारंपरिक क्षेत्रों में गतिशीलता बनाए रखी है।”

उन्होंने कहा, ”अब हम अपने संबंधों को और अधिक समसामयिक बनाने के लिए महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों, सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन, मानव संसाधन गतिशीलता, परमाणु सहयोग आदि नये क्षेत्रों में विस्तार करने में रुचि लेंगे।” उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विचारों में बढ़ती समानता देखी है।

उन्होंने कहा, ‘‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रित करना अहम है…।” जयशंकर ने कहा कि उन्होंने बहुत आशावादी होकर और उम्मीद से संयुक्त आयोग का रुख किया है। उन्होंने कहा, ”मैं जानता हूं कि हमारे बीच अच्छा मित्रभाव है। हमारी चुनौती इसे व्यावहारिक परिणामों में तब्दील करना है।” उन्होंने कहा, ” हमारे नेता पिछले साल हिरोशिमा और नयी दिल्ली में दो बार मिल चुके हैं। मुझे लगता है कि उनकी चर्चाओं ने हमें आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया है।” जयशंकर ने दिसंबर में विदेश मंत्री पद पर नियुक्ति के लिए चो को बधाई भी दी।

Advertisement
First Published - March 6, 2024 | 12:20 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement