GenZ Work Trends: इन्फोसिस के सह-संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति भले ही 72 घंटे काम करने की बात करते हों, लेकिन भारत की Gen Z की सोच इससे बिल्कुल अलग है। एक नए सर्वे के मुताबिक Gen Z युवाओं के लिए नौकरी चुनते समय सबसे अहम चीज वर्क-लाइफ बैलेंस है। नौकरी डॉट कॉम की ओर से जारी इस सर्वे में करीब 23,000 Gen Z प्रोफेशनल्स से बात की गई। इनमें से लगभग आधे लोगों ने कहा कि नौकरी का ऑफर देखते समय वे सबसे पहले यह देखते हैं कि काम और निजी जिंदगी में संतुलन मिलेगा या नहीं।
सर्वे में यह भी सामने आया कि जिन Gen Z प्रोफेशनल्स को 5 से 8 साल का अनुभव है, उनमें वर्क-लाइफ बैलेंस की मांग और ज्यादा है। इस ग्रुप में करीब 60 फीसदी लोगों ने इसे अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। यह स्टडी ‘The Gen Z Work Code’ नाम से जारी की गई है। इसमें IT, बैंकिंग (BFSI), ऑटो, BPO और एजुकेशन जैसे 80 अलग-अलग सेक्टरों के युवा शामिल थे। सर्वे में शामिल लोग मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से थे।
सर्वे के मुताबिक 81 फीसदी Gen Z युवाओं को सार्वजनिक या निजी तारीफ से ज्यादा सीखने और आगे बढ़ने के मौके चाहिए। वहीं 57 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके लिए करियर ग्रोथ का मतलब नई स्किल्स सीखना है, न कि सिर्फ प्रमोशन या सैलरी बढ़ना। Gen Z के लिए कंपनी की सबसे अहम वैल्यू पारदर्शिता है। करीब 65 फीसदी लोगों ने इसे सबसे जरूरी बताया। जिन युवाओं के पास 5 से 8 साल का अनुभव है, उनमें यह आंकड़ा बढ़कर 71 फीसदी हो जाता है। इसके मुकाबले डायवर्सिटी, पर्यावरण नीति और सामाजिक काम जैसी बातें उनकी प्राथमिकता में पीछे रहीं।
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सर्वे के अनुसार, सैलरी के अलावा Gen Z नौकरी चुनते समय सबसे पहले वर्क-लाइफ बैलेंस, फिर स्पष्ट करियर ग्रोथ, उसके बाद कंपनी की वैल्यू और अंत में लीडरशिप स्टाइल को महत्व देती है। Gen Z के लिए करियर ग्रोथ का मतलब बदल गया है। 57 फीसदी लोग इसे नई स्किल्स सीखने से जोड़ते हैं। क्रिएटिव फील्ड्स जैसे डिजाइन और ऐडवर्टाइजिंग में यह आंकड़ा 78 फीसदी तक पहुंच जाता है।सिर्फ 21 फीसदी लोग सैलरी बढ़ने को ग्रोथ मानते हैं और केवल 12 फीसदी प्रमोशन को सबसे जरूरी मानते हैं।
अगर नौकरी में आगे बढ़ने के मौके नहीं मिलते, तो 14 फीसदी Gen Z एक साल के अंदर नौकरी छोड़ सकते हैं। वहीं 37 फीसदी दो से तीन साल में कंपनी बदलने को तैयार हैं। हालांकि ज्यादा सैलरी वाले युवा ज्यादा समय तक कंपनी में टिकते हैं। जिनकी सालाना कमाई 15–25 लाख रुपये है, उनमें 56 फीसदी लोग 5 साल तक कंपनी में रहने को तैयार हैं।
सर्वे में यह भी पूछा गया कि ऑफिस में सबसे ज्यादा तनाव किस बात से होता है। 36 फीसदी लोगों ने वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी को सबसे बड़ा तनाव बताया। 31 फीसदी ने करियर ग्रोथ न मिलने को, 19 फीसदी ने टॉक्सिक सहकर्मियों को, और 16 फीसदी ने माइक्रोमैनेज करने वाले बॉस को तनाव की वजह बताया।