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Toilet Seat Tax: वित्तीय संकट से निपटने के लिए हिमाचल प्रदेश में ‘टॉयलेट सीट’ पर टैक्स लागू, देने होंगे इतने पैसे

इस टैक्स का सबसे अधिक असर शहरी इलाकों में होगा, जहां कई घरों में एक से अधिक बाथरूम होते हैं

Last Updated- October 04, 2024 | 4:27 PM IST
Toilet Seat Tax

हिमाचल प्रदेश की सरकार ने राज्य में वित्तीय संकट से निपटने के लिए टॉयलेट सीट पर टैक्स लगाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई में कांग्रेस सरकार ने 1 अक्टूबर 2024 को एक अधिसूचना जारी कर यह टैक्स लागू किया। इस कदम का उद्देश्य राज्य के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना है।

टॉयलेट सीट टैक्स का प्रावधान

नई नीति के तहत शहरी इलाकों में घरों में मौजूद हर टॉयलेट सीट पर 25 रुपये मासिक टैक्स लगाया जाएगा। यह राशि मौजूदा सीवरेज बिल में जोड़ी जाएगी और जल शक्ति विभाग के खाते में जमा की जाएगी। यह विभाग पानी और स्वच्छता सेवाओं का प्रबंधन करता है। अब सीवरेज बिल पानी के बिल का 30 प्रतिशत होगा। जिनके पास निजी जल स्रोत हैं, लेकिन सरकारी सीवरेज सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें भी प्रति टॉयलेट सीट 25 रुपये मासिक देना होगा। राज्य के सभी डिविजनल अधिकारियों को इस नीति को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

शहरी इलाकों में ज्यादा असर

हिमाचल प्रदेश में 5 नगर निगम, 29 नगरपालिकाएं और 17 नगर पंचायतें हैं, जिनमें 75 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। इस टैक्स का सबसे अधिक असर शहरी इलाकों में होगा, जहां कई घरों में एक से अधिक बाथरूम होते हैं, जिससे इन घरों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ बढ़ेगा। इसके अलावा, सरकार ने अक्टूबर से हर कनेक्शन पर 100 रुपये मासिक पानी का नया बिल भी लागू किया है।

यह नई नीति पिछले सरकार के मुफ्त पानी देने के वादे से एक बड़ा बदलाव है। भाजपा ने चुनाव से पहले राज्य में मुफ्त पानी देने का वादा किया था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ये नए शुल्क लागू किए हैं।

पानी के राजस्व संग्रह के लिए इन्सेंटिव

सरकार ने शहरी स्थानीय निकायों (ULBs), पंचायती राज संस्थाओं (PRIs), गांव की जल और स्वच्छता समितियों (VWSC) और ठेका एजेंसियों के लिए पानी के राजस्व संग्रह को बढ़ाने के लिए इन्सेंटिव योजना भी शुरू की है। इसके तहत:

75% से 100% राजस्व संग्रह पर 15% इन्सेंटिव।
50% से 75% संग्रह पर 10% इन्सेंटिव।
50% से कम संग्रह पर 5% इन्सेंटिव मिलेगा।
इसके साथ ही, सरकार ने विधवाओं, अनाथों, परित्यक्त महिलाओं और दिव्यांगों को मुफ्त पानी कनेक्शन देने और उनसे कोई उपयोग शुल्क नहीं लेने की घोषणा की है, बशर्ते वे सही प्रमाण पत्र पेश करें।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रतिक्रिया

इस नई नीति की आलोचना कई राजनीतिक नेताओं ने की है, जिनमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी शामिल हैं। उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर लिखा, “अगर यह सच है, तो अविश्वसनीय! जब मोदी जी स्वच्छता को जन आंदोलन बना रहे हैं, कांग्रेस लोगों से टॉयलेट के लिए टैक्स वसूल रही है! यह देश को शर्मसार करने वाला कदम है।”

First Published - October 4, 2024 | 4:27 PM IST

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